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Lakhimpur Kheri News: जागरूकता की कमी ने थामे फाइलेरिया अभियान के कदम
Sat, 30 Aug 2025 12:52 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 30 Aug 2025 12:52 AM IST
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जिला अस्पताल में लोगों को फाइलेरिया दवा की जानकारी देती टीम। संवाद
लखीमपुर खीरी। जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए 18 दिनों तक अभियान चलाकर लोगों को दवा खिलाई गई। अभियान के तहत जिले में 25 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि लोगों में जागरूकता की कमी की वजह से समय पूरा होने के बाद भी लक्ष्य करीब 80 प्रतिशत ही पहुंच सका है। इससे फाइलेरिया की दवा अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंच से दूर है।
बीती 10 अगस्त से 28 अगस्त तक जिले में फाइलेरिया अभियान चलाया जा रहा था। हालांकि अभियान का समय बीत जाने के बाद लक्ष्य अभी 80 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। जबकि इस अभियान को पंख लगाने के लिए 2382 टीमों को लगाया गया है। विभागीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में फाइलेरिया की दवा खाने में लोग आनाकानी कर रहे हैं। जागरूकता की कमी की वजह से कई लोग दवा ही नहीं खा रहे हैं।
कई बार लोग दवा खिलाने गई टीम से ही भिड़ जाते हैं। इससे दवा खिलाने गई टीम को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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दवा के अभाव में यह हो सकती है परेशानी
फाइलेरिया रोग क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला एक तरह का संक्रामक रोग है। इसे हाथी पांव, एलीफैन्टेसियासिस के नाम से भी जाना जाता है। इसके लक्षण पैरों में सूजन, हाथ में सूजन, पुरुषों में हाइड्रोसील, महिलाओं के स्तनों में सूजन होती है। फाइलेरिया की दवा खाने से इन बीमारियों से बचा जा सकता है। दवाओं के साथ यह भी जरूरी है कि मच्छरों के काटने से खुद को बचाएं।
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दवा खाने के दौरान फाइलेरिया संक्रमित में होंगे यह लक्षण, घबराए नहीं
जिन व्यक्तियों में फाइलेरिया के परजीवी होते हैं। उन व्यक्तियों में दवा के सेवन के बाद चक्कर आना, जी मिचलाना, उल्टी आना या हल्का बुखार आदि लक्षण आ सकते हैं, जो कि एक से दो घंटे में समाप्त हो जाते हैं। गम्भीर समस्या के समाधान को जिला स्तर पर रैपिड रिस्पाॅन्स टीम का गठन किया गया है।
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स्वास्थ्यकर्मी के सामने खानी चाहिए दवा
फाइलेरिया की दवा में आइवरमेक्टीन एवं अलबेन्डाजोल टैबलेट शामिल हैं। साल में एक बार घर-घर तक मुफ्त दी जाती है। डीईसी की गोली खाली पेट नहीं खानी है। अल्बेन्डाजोल की गोली चबाकर खानी होती है। दवा देने वाले स्वास्थ्यकर्मी के सामने सभी दवाओं को खाना जरूरी है।
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अधिकारियों को भी खिलाई गई है दवा
लोगों में जागरूकता आए इसलिए जिले के आलाधिकारी भी आगे आए हैं। बीते दिनों विकास भवन में सीडीओ अभिषेक कुमार सहित सभी अधिकारियों व कर्मचारियों ने फाइलेरिया की दवा का सेवन किया था। वहीं नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव व पालिका के अधिकारियों व कर्मचारियों ने दवा खाई थी। साथ ही जिला कारागार में भी अधिकारियों, कर्मचारियों व बंदियों को भी फाइलेरिया की दवा खिलाई गई थी।
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लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। यह दवा उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए ही है। लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। ताकि प्रत्येक जरूरी व्यक्ति को इस दवा का लाभ मिल सके।
हरिशंकर, जिला मलेरिया अधिकारी
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बीती 10 अगस्त से 28 अगस्त तक जिले में फाइलेरिया अभियान चलाया जा रहा था। हालांकि अभियान का समय बीत जाने के बाद लक्ष्य अभी 80 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। जबकि इस अभियान को पंख लगाने के लिए 2382 टीमों को लगाया गया है। विभागीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में फाइलेरिया की दवा खाने में लोग आनाकानी कर रहे हैं। जागरूकता की कमी की वजह से कई लोग दवा ही नहीं खा रहे हैं।
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कई बार लोग दवा खिलाने गई टीम से ही भिड़ जाते हैं। इससे दवा खिलाने गई टीम को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दवा के अभाव में यह हो सकती है परेशानी
फाइलेरिया रोग क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला एक तरह का संक्रामक रोग है। इसे हाथी पांव, एलीफैन्टेसियासिस के नाम से भी जाना जाता है। इसके लक्षण पैरों में सूजन, हाथ में सूजन, पुरुषों में हाइड्रोसील, महिलाओं के स्तनों में सूजन होती है। फाइलेरिया की दवा खाने से इन बीमारियों से बचा जा सकता है। दवाओं के साथ यह भी जरूरी है कि मच्छरों के काटने से खुद को बचाएं।
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दवा खाने के दौरान फाइलेरिया संक्रमित में होंगे यह लक्षण, घबराए नहीं
जिन व्यक्तियों में फाइलेरिया के परजीवी होते हैं। उन व्यक्तियों में दवा के सेवन के बाद चक्कर आना, जी मिचलाना, उल्टी आना या हल्का बुखार आदि लक्षण आ सकते हैं, जो कि एक से दो घंटे में समाप्त हो जाते हैं। गम्भीर समस्या के समाधान को जिला स्तर पर रैपिड रिस्पाॅन्स टीम का गठन किया गया है।
स्वास्थ्यकर्मी के सामने खानी चाहिए दवा
फाइलेरिया की दवा में आइवरमेक्टीन एवं अलबेन्डाजोल टैबलेट शामिल हैं। साल में एक बार घर-घर तक मुफ्त दी जाती है। डीईसी की गोली खाली पेट नहीं खानी है। अल्बेन्डाजोल की गोली चबाकर खानी होती है। दवा देने वाले स्वास्थ्यकर्मी के सामने सभी दवाओं को खाना जरूरी है।
अधिकारियों को भी खिलाई गई है दवा
लोगों में जागरूकता आए इसलिए जिले के आलाधिकारी भी आगे आए हैं। बीते दिनों विकास भवन में सीडीओ अभिषेक कुमार सहित सभी अधिकारियों व कर्मचारियों ने फाइलेरिया की दवा का सेवन किया था। वहीं नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव व पालिका के अधिकारियों व कर्मचारियों ने दवा खाई थी। साथ ही जिला कारागार में भी अधिकारियों, कर्मचारियों व बंदियों को भी फाइलेरिया की दवा खिलाई गई थी।
लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। यह दवा उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए ही है। लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। ताकि प्रत्येक जरूरी व्यक्ति को इस दवा का लाभ मिल सके।
हरिशंकर, जिला मलेरिया अधिकारी