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किसी के दिल की मायूसी जहां से होकर गुजरी है..
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लखीमपुर खीरी। शिक्षक कपिल देव खरे और माधव वाजपेयी की स्मृृति में सोमवार को काव्य संध्या हुई, जिसमें राष्ट्रीय कवि डॉ. कुमार विश्वास समेत नामी कवियों और कवियत्रियों ने अपने गीतों से दर्शकों को आनंदित किया। डॉ. कुमार विश्वास ने अपने चिरपरिचित अंदाज में पंक्तियां पेश की, कि किसी के दिल की मायूसी जहां से होके गुजरी है, हमारी सारी चालाकी वहीं पर खोके गुजरी है। तुम्हारी और हमारी रात में बस फर्क इतना है, तुम्हारी सो के गुजरी है हमारी रो के गुजरी है।
राजकीय इंटर कॉलेज के ग्राउंड पर काव्य संध्या का शुभारंभ अर्बन कोआपरेटिव बैंक की अध्यक्ष पुष्पा सिंह, मोहन वाजपेयी, अवधेश सिंह, महेंद्र तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। लखनऊ से आई कवियत्री कविता तिवारी ने अपने अंदाज में पंक्तियां पेश की, कि अगर माटी के पुतले देह में ईमान जिंदा है, तभी इस देश की समृद्धि का अरमान जिंदा है। न भाषण से हैं उम्मीदें न वादों पर भरोसा है, शहीदों की बदौलत मेरा हिंदोस्तान जिंदा है।
नैनीताल से आयी कवियत्री गौरी मिश्रा ने कहा कि जहां दुश्वार हैं राहें वहीं आराम लिखा है, यूं लगता है मुहब्बत का कोई पैगाम लिखा है। मैं अपना घर समझकर चली आयी यहां क्योंकि तुम्हारे दिल के दरवाजे पे मेरा नाम लिखा है। इस कविता को सुनकर दर्शक झूम उठे। लखीमपुर के वीर रस के कवि आशीष अनल और नवल सुधांशु ने मंच का संचालन संभाला। इसके अलावा कवि डॉ आलोक मिश्रा, सतेंद्र त्रिवेदी गंवार, नवल सुधांशु, सुनीत वाजपेयी ने कविताएं सुनाकर दर्शकों की वाहवाही हासिल की।
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एआरटीओ भी बने कवि
कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा को लेकर एआरटीओ प्रशासन बीके सिंह ने मंच संभाला, लेकिन उन्होंने माइक संभालते ही शृंगार रस की कविताएं सुनानी शुरू कर दी। दर्शकों ने तालियां बजाकर स्वागत किया। सीतापुर से आए एआरटीओ प्रवर्तन उदित नारायन ने सड़क की व्यथा पर कविता सुनाई और सड़क हादसों से बचने के लिए प्रेरित किया।
भीड़ देख गदगद हुए कवि
जीआईसी ग्राउंड के बाहर शाम चार बजे से इंट्री के लिए लंबी कतारें लग गई। पास देखकर लोगों को प्रवेश दिया गया। बाउंसरों की देखरेख के अलावा पुलिस सुरक्षा चुस्त रही। विशाल वाजपेयी, अतुल गुप्ता, कन्हैया गुप्ता भी व्यवस्था को दुरुस्त करते रहे।
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राजकीय इंटर कॉलेज के ग्राउंड पर काव्य संध्या का शुभारंभ अर्बन कोआपरेटिव बैंक की अध्यक्ष पुष्पा सिंह, मोहन वाजपेयी, अवधेश सिंह, महेंद्र तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। लखनऊ से आई कवियत्री कविता तिवारी ने अपने अंदाज में पंक्तियां पेश की, कि अगर माटी के पुतले देह में ईमान जिंदा है, तभी इस देश की समृद्धि का अरमान जिंदा है। न भाषण से हैं उम्मीदें न वादों पर भरोसा है, शहीदों की बदौलत मेरा हिंदोस्तान जिंदा है।
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नैनीताल से आयी कवियत्री गौरी मिश्रा ने कहा कि जहां दुश्वार हैं राहें वहीं आराम लिखा है, यूं लगता है मुहब्बत का कोई पैगाम लिखा है। मैं अपना घर समझकर चली आयी यहां क्योंकि तुम्हारे दिल के दरवाजे पे मेरा नाम लिखा है। इस कविता को सुनकर दर्शक झूम उठे। लखीमपुर के वीर रस के कवि आशीष अनल और नवल सुधांशु ने मंच का संचालन संभाला। इसके अलावा कवि डॉ आलोक मिश्रा, सतेंद्र त्रिवेदी गंवार, नवल सुधांशु, सुनीत वाजपेयी ने कविताएं सुनाकर दर्शकों की वाहवाही हासिल की।
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एआरटीओ भी बने कवि
कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा को लेकर एआरटीओ प्रशासन बीके सिंह ने मंच संभाला, लेकिन उन्होंने माइक संभालते ही शृंगार रस की कविताएं सुनानी शुरू कर दी। दर्शकों ने तालियां बजाकर स्वागत किया। सीतापुर से आए एआरटीओ प्रवर्तन उदित नारायन ने सड़क की व्यथा पर कविता सुनाई और सड़क हादसों से बचने के लिए प्रेरित किया।
भीड़ देख गदगद हुए कवि
जीआईसी ग्राउंड के बाहर शाम चार बजे से इंट्री के लिए लंबी कतारें लग गई। पास देखकर लोगों को प्रवेश दिया गया। बाउंसरों की देखरेख के अलावा पुलिस सुरक्षा चुस्त रही। विशाल वाजपेयी, अतुल गुप्ता, कन्हैया गुप्ता भी व्यवस्था को दुरुस्त करते रहे।