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खोवा के दाम आसमान पर, बाजार से दूध गायब
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 12 Mar 2017 11:08 PM IST
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होटलों पर 350 में बिका खोवा, पनीर पहुंच से दूर
होली पर गुझियों की मिठास के बिना आनंद अधूरा है, जिसके लिए खोवा (मावा) की डिमांड एकाएक बढ़ने से इसके दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। कुछ दिन पहले तक 180 रुपये प्रति किलो वाला खोवा रविवार को 350 रुपये के पार पहुंच गया। दूध से बने अन्य उत्पाद जैसे पनीर भी महंगे दामों के चलते आम लोगों की पहुंच से दूर हो गया है। वहीं मिठाइयां भी दुकानों से नदारद दिखीं।
बाजार में खोवा की डिमांड को पूरा करने के लिए मिठाई दुकानदार और डेयरी संचालकों ने ज्यादातर दूध खोवा बनाने में खपाया है, जिसकी कई दिन पहले से तैयारी चल रही थी। क्योंकि एक दिन में इतनी बड़ी डिमांड पूरी करना संभव नहीं था। ऐसे में नकली खोवा को खपाने का प्रयास रहता है। मौके का फायदा उठाने में दूधिए भी पीछे नहीं रहे, जिन्होंने 10 से 15 रुपये प्रति लीटर के दाम में इजाफा कर दिया। रही सही कसर दुकानदारों ने पूरी करते हुए मनमाने रेट वसूले। इससे कई दुकानों पर मिठाई गायब हो गई। पनीर के रेट भी 180 से बढ़कर 280 रुपये तक पहुंच गए। बाजार से दूध गायब होने से लोग चाय पीने को तरस गए। दूध, खोवा के रेट पर छाई महंगाई की धुंध के मंगलवार से पहले छटने के आसार नहीं है।
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होली पर गुझियों की मिठास के बिना आनंद अधूरा है, जिसके लिए खोवा (मावा) की डिमांड एकाएक बढ़ने से इसके दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। कुछ दिन पहले तक 180 रुपये प्रति किलो वाला खोवा रविवार को 350 रुपये के पार पहुंच गया। दूध से बने अन्य उत्पाद जैसे पनीर भी महंगे दामों के चलते आम लोगों की पहुंच से दूर हो गया है। वहीं मिठाइयां भी दुकानों से नदारद दिखीं।
बाजार में खोवा की डिमांड को पूरा करने के लिए मिठाई दुकानदार और डेयरी संचालकों ने ज्यादातर दूध खोवा बनाने में खपाया है, जिसकी कई दिन पहले से तैयारी चल रही थी। क्योंकि एक दिन में इतनी बड़ी डिमांड पूरी करना संभव नहीं था। ऐसे में नकली खोवा को खपाने का प्रयास रहता है। मौके का फायदा उठाने में दूधिए भी पीछे नहीं रहे, जिन्होंने 10 से 15 रुपये प्रति लीटर के दाम में इजाफा कर दिया। रही सही कसर दुकानदारों ने पूरी करते हुए मनमाने रेट वसूले। इससे कई दुकानों पर मिठाई गायब हो गई। पनीर के रेट भी 180 से बढ़कर 280 रुपये तक पहुंच गए। बाजार से दूध गायब होने से लोग चाय पीने को तरस गए। दूध, खोवा के रेट पर छाई महंगाई की धुंध के मंगलवार से पहले छटने के आसार नहीं है।
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