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वर्ल्ड फोटोग्राफी प्रतिस्पर्धा में खीरी का भी रहा है रुतबा
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नेचर और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी में यहां के लोगों ने भी वैश्विक स्तर पर कमाया है नाम
अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफर सतपाल सिंह के बाद उनके शिष्य आगे बढ़ा रहे हैं परंपरा
लखीमपुर खीरी। वर्ल्ड फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं में खीरी जिले ने भी अपनी अहम आमद दर्ज कराकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। वर्ल्ड फोटोग्राफी डे पर अमर उजाला जिले के ऐसे ही कुछ लोगों को याद कर रहा है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फोटोग्राफी में अपने हुनर का लोहा मनवाया है। वर्ल्ड फोटोग्राफी डे पर खीरी के फोटोग्राफरों का कहना है कि बहुत सारी वन्य जीवों की प्रजातियां कम हो रही है, जिन्हें बचाने की जरूरत है।
मोहम्मदी कस्बे के रहने वाले सतपाल सिंह और उनके शिष्य हिमांशु व प्रियांशु ने वैश्विक फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं में जनपद की शान ऊंची की है। अंतरराष्ट्रीय वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर सतपाल सिंह ने अपने हुनर से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए हैं। इसी के साथ वह अपना हुनर अपने शिष्य प्रियांशु व हिमांशु को भी सिखा रहे हैं, जिनकी तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में चयनित हुई हैं।
मूल रूप से नेचर फोटोग्राफर सतपाल सिंह बताते हैं कि प्रकृति की खूबसूरती से ही उन्हें फोटोग्राफी की प्रेरणा मिली है। सतपाल सिंह ने प्रकृति के संरक्षण का बीड़ा भी उठाया है। वह चार-पांच साल से गोमती बचाओ अभियान में जुटे हैं। सतपाल सिंह की खींची तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाहवाही लूटी है। वह 2018-19 में एशिया पैनासोनिक के ब्रांड एंबेस्डर भी रहे हैं। वाशिंगटन डीसी की गैलरी में भी उनके चित्रों को सराहना मिली। उन्हें फोटोग्राफी में 100 से अधिक नेशनल और इंटरनेशनल अवॉर्ड मिल चुके हैं।
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मोहम्मदी के ही रहने वाले 20 साल के प्रियांशु त्रिपाठी बताते हैं कि 2016 में उन्हें फोटोग्राफी का शौक चढ़ा। 2017-18 में वह सतपाल सिंह के संपर्क में आए और फिर उनके शागिर्द बन गए। अपने हुनर के बल पर वह इस वर्ष के हैबिटेट ऑफ द ईयर 2021 चुने गए हैं, जबकि 2020 में उनकी तस्वीर मॉंन्टियर इंटरनेशनल फोटोग्राफी अवॉर्ड में चयनित हो चुकी है और सैंक्चुरी एशिया मैगजीन के कवर फोटो पर भी छप चुकी है।
मोहम्मदी क्षेत्र के अलीनगर गांव के रहने वाले नेचर फोटोग्राफर और 21 साल केेे हिमांशु वर्मा बताते हैं कि 2020 में उन्हें भी ‘द सैंक्चुरी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी अवार्ड्स 2020’ में चयनित हुई थी, जो सैंक्चुरी एशिया में छपी। इसके अलावा वाइल्डलाइफ चैनल पर भी प्रसारित हो चुकी है। हिमांशु कहते हैं, गौरेया, तितलियां और छोटे-छोटे कीट पतंगों का खत्म होना चिंता का विषय है।
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अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफर सतपाल सिंह के बाद उनके शिष्य आगे बढ़ा रहे हैं परंपरा
लखीमपुर खीरी। वर्ल्ड फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं में खीरी जिले ने भी अपनी अहम आमद दर्ज कराकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। वर्ल्ड फोटोग्राफी डे पर अमर उजाला जिले के ऐसे ही कुछ लोगों को याद कर रहा है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फोटोग्राफी में अपने हुनर का लोहा मनवाया है। वर्ल्ड फोटोग्राफी डे पर खीरी के फोटोग्राफरों का कहना है कि बहुत सारी वन्य जीवों की प्रजातियां कम हो रही है, जिन्हें बचाने की जरूरत है।
मोहम्मदी कस्बे के रहने वाले सतपाल सिंह और उनके शिष्य हिमांशु व प्रियांशु ने वैश्विक फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं में जनपद की शान ऊंची की है। अंतरराष्ट्रीय वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर सतपाल सिंह ने अपने हुनर से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए हैं। इसी के साथ वह अपना हुनर अपने शिष्य प्रियांशु व हिमांशु को भी सिखा रहे हैं, जिनकी तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में चयनित हुई हैं।
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मूल रूप से नेचर फोटोग्राफर सतपाल सिंह बताते हैं कि प्रकृति की खूबसूरती से ही उन्हें फोटोग्राफी की प्रेरणा मिली है। सतपाल सिंह ने प्रकृति के संरक्षण का बीड़ा भी उठाया है। वह चार-पांच साल से गोमती बचाओ अभियान में जुटे हैं। सतपाल सिंह की खींची तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाहवाही लूटी है। वह 2018-19 में एशिया पैनासोनिक के ब्रांड एंबेस्डर भी रहे हैं। वाशिंगटन डीसी की गैलरी में भी उनके चित्रों को सराहना मिली। उन्हें फोटोग्राफी में 100 से अधिक नेशनल और इंटरनेशनल अवॉर्ड मिल चुके हैं।
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मोहम्मदी के ही रहने वाले 20 साल के प्रियांशु त्रिपाठी बताते हैं कि 2016 में उन्हें फोटोग्राफी का शौक चढ़ा। 2017-18 में वह सतपाल सिंह के संपर्क में आए और फिर उनके शागिर्द बन गए। अपने हुनर के बल पर वह इस वर्ष के हैबिटेट ऑफ द ईयर 2021 चुने गए हैं, जबकि 2020 में उनकी तस्वीर मॉंन्टियर इंटरनेशनल फोटोग्राफी अवॉर्ड में चयनित हो चुकी है और सैंक्चुरी एशिया मैगजीन के कवर फोटो पर भी छप चुकी है।
मोहम्मदी क्षेत्र के अलीनगर गांव के रहने वाले नेचर फोटोग्राफर और 21 साल केेे हिमांशु वर्मा बताते हैं कि 2020 में उन्हें भी ‘द सैंक्चुरी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी अवार्ड्स 2020’ में चयनित हुई थी, जो सैंक्चुरी एशिया में छपी। इसके अलावा वाइल्डलाइफ चैनल पर भी प्रसारित हो चुकी है। हिमांशु कहते हैं, गौरेया, तितलियां और छोटे-छोटे कीट पतंगों का खत्म होना चिंता का विषय है।