{"_id":"572c9b7a4f1c1bda275ccef4","slug":"kfara-baisakhi-festival-starts-drew-a-crowd-of-thousands","type":"story","status":"publish","title_hn":"कफारा में बैसाखी मेला शुरू, उमड़ी हजारों की भीड़ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कफारा में बैसाखी मेला शुरू, उमड़ी हजारों की भीड़
अमर उजाला ब्यूरो/धौरहरा।
Updated Sat, 07 May 2016 12:21 AM IST
विज्ञापन
कफारा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लीलानाथ मंदिर में पूजा अर्चना कर दान किया सत्तू दुकानों पर उमड़ी ग्राहकों की भीड़, दिन भर चले भंडारे
यहां की सांस्कृतिक विरासत में प्रमुख स्थान रखने वाला बैसाखी मेला शुक्रवार को स्नान, दान और भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना के साथ शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने प्राचीन लीलानाथ मंदिर में पूजा अर्चना कर जौ का सत्तू अर्पित किया। बाद में उसे प्रसाद के रूप में परिवार सहित ग्रहण किया। मेले में कई श्रद्धालुओं ने भंडारे का आयोजन किया। जिसमें साधु संतों के अलावा श्रद्धालुओं को सत्तू का प्रसाद बांटा गया। मेले में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ रही। लीलानाथ मंदिर पर यह मेला 500 साल से भी अधिक समय से लगता आ रहा है।
यह पौराणिक बैसाखी मेला सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा को संजोए हुए है। वैसे तो लीलानाथ मंदिर परिसर मे हर अमावस्या को मेला लगता हैं लेकिन बैसाखी अमावस्या पर लगने वाला मेला किसानों का विशेष पर्व माना जाता है। यहां श्रद्धालु तीर्थ सरोवर में स्नान करने के बाद मंदिर में सत्तू चढ़ाते हैं और दान कर प्रसाद के रूप में खाते भी हैं। यह मेला सात दिनों तक चलता है। बैसाखी अमावस्या को श्रद्धालु मंदिर परिसर में सत्यनारायण कथा भी सुनते हैं। बैसाखी मेले में सात दिनों तक लगातार भंडारा चलता है और कई जगहों पर प्याऊ भी श्रद्धालु लगाते हैं।
सूखे मसालों, लकड़ी के फर्नीचर की सजती हैं दुकानें बैसाखी मेले में सूखे मसालों और लकड़ी के फर्नीचर की दुकानें खूब सजती हैं। यहां सूखे मसाले जैसे हल्दी, मिर्च, धनिया, मेथी, लहसुन, खूब बिकता है। इसके अलावा लकड़ी के फर्नीचर, किचन में काम काम आने वाले लकड़ी के बर्तन और अन्य वस्तुएं जैसे चौकी, बेलन, मूसल, लकड़ी के खिलौनों की खूब बिक्री होती है।
विज्ञापन
श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में लगाई डुबकी कफारा मेला के अलावा अन्य जगहों पर पवित्र नदियों के किनारे मेले लगे।
श्रद्धालुओं ने शारदा, सरयू, गोमती, उल्ल, कठिना, मनोगंगा आदि नदियों में डुबकी लगाकर सत्तू दान किया। श्रद्धालुओं ने जालिम नगर पुर, रामनगर बगहा में पवित्र सरयू नदी में स्नान कर इलाके के नारायणेश्वर मंदिर, जंगली नाथ मंदिर, नागेश्वर नाथ मंदिर धौरहरा में शिवलिंग का जलाभिषेक कर सत्तू अर्पित किया। ट्यूबवेल से भरवाया कफारा बावड़ी तीर्थ में पानी अमर उजाला में खबर छपने के बाद चेते जिम्मेदार लोग धौरहरा (लखीमपुर खीरी)।
कफारा के श्रीलीलानाथ मंदिर परिसर स्थित प्राचीन बावड़ी तीर्थ के सूख जाने की खबर अमर उजाला में छपने के बाद लीलानाथ मंदिर समिति ने शुक्रवार सुबह से ही ट्यूबवेल से बावड़ी को भरवाना शुरू कर दिया। शाम तक ट्यूबवेल चलने के बाद भी बावड़ी पूरी तरह भर नहीं पाई। बावड़ी सूखने से श्रद्धालुओं को स्नान और जलाभिषेक के लिए पानी का संकट पैदा हो गया था। कफारा के प्राचीन श्री लीलानाथ मंदिर परिसर में स्थित यह बावड़ी तीर्थ 500 साल से भी अधिक पुराना है। करीब 100 साल पहले इस तीर्थ का जीर्णोद्धार खैरीगढ़ स्टेट की तत्कालीन महारानी सुरथ कुमारी शाह ने कराया था। बावड़ी तीर्थ के सूख जाने से बैसाखी अमावस्या पर आने वाले हजारों स्नार्थियों में मायूसी फैल गई थी।
अमर उजाला ने छह मई के अंक में पहले पेज पर ‘500 साल में पहली बार सूखी कफारा बावड़ी’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इस कबर के बाद लीलालाथ मंदिर प्रबंध समिति चेती और पूरे दिन ट्यूबवेल चलाकर पानी भरवा दिया। पानी भरने से पहले तीर्थ की विधिवत सफाई भी कराई। लीलानाथ समिति के अध्यक्ष राशीश अवस्थी कोषाध्यक्ष अशोक निगम, प्रदीप शुक्ल, सुशील शुक्ल आदि लोगों ने बावड़ी भरने के काम में सहयोग किया।
विज्ञापन
यहां की सांस्कृतिक विरासत में प्रमुख स्थान रखने वाला बैसाखी मेला शुक्रवार को स्नान, दान और भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना के साथ शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने प्राचीन लीलानाथ मंदिर में पूजा अर्चना कर जौ का सत्तू अर्पित किया। बाद में उसे प्रसाद के रूप में परिवार सहित ग्रहण किया। मेले में कई श्रद्धालुओं ने भंडारे का आयोजन किया। जिसमें साधु संतों के अलावा श्रद्धालुओं को सत्तू का प्रसाद बांटा गया। मेले में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ रही। लीलानाथ मंदिर पर यह मेला 500 साल से भी अधिक समय से लगता आ रहा है।
यह पौराणिक बैसाखी मेला सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा को संजोए हुए है। वैसे तो लीलानाथ मंदिर परिसर मे हर अमावस्या को मेला लगता हैं लेकिन बैसाखी अमावस्या पर लगने वाला मेला किसानों का विशेष पर्व माना जाता है। यहां श्रद्धालु तीर्थ सरोवर में स्नान करने के बाद मंदिर में सत्तू चढ़ाते हैं और दान कर प्रसाद के रूप में खाते भी हैं। यह मेला सात दिनों तक चलता है। बैसाखी अमावस्या को श्रद्धालु मंदिर परिसर में सत्यनारायण कथा भी सुनते हैं। बैसाखी मेले में सात दिनों तक लगातार भंडारा चलता है और कई जगहों पर प्याऊ भी श्रद्धालु लगाते हैं।
विज्ञापन
सूखे मसालों, लकड़ी के फर्नीचर की सजती हैं दुकानें बैसाखी मेले में सूखे मसालों और लकड़ी के फर्नीचर की दुकानें खूब सजती हैं। यहां सूखे मसाले जैसे हल्दी, मिर्च, धनिया, मेथी, लहसुन, खूब बिकता है। इसके अलावा लकड़ी के फर्नीचर, किचन में काम काम आने वाले लकड़ी के बर्तन और अन्य वस्तुएं जैसे चौकी, बेलन, मूसल, लकड़ी के खिलौनों की खूब बिक्री होती है।
विज्ञापन
श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में लगाई डुबकी कफारा मेला के अलावा अन्य जगहों पर पवित्र नदियों के किनारे मेले लगे।
श्रद्धालुओं ने शारदा, सरयू, गोमती, उल्ल, कठिना, मनोगंगा आदि नदियों में डुबकी लगाकर सत्तू दान किया। श्रद्धालुओं ने जालिम नगर पुर, रामनगर बगहा में पवित्र सरयू नदी में स्नान कर इलाके के नारायणेश्वर मंदिर, जंगली नाथ मंदिर, नागेश्वर नाथ मंदिर धौरहरा में शिवलिंग का जलाभिषेक कर सत्तू अर्पित किया। ट्यूबवेल से भरवाया कफारा बावड़ी तीर्थ में पानी अमर उजाला में खबर छपने के बाद चेते जिम्मेदार लोग धौरहरा (लखीमपुर खीरी)।
कफारा के श्रीलीलानाथ मंदिर परिसर स्थित प्राचीन बावड़ी तीर्थ के सूख जाने की खबर अमर उजाला में छपने के बाद लीलानाथ मंदिर समिति ने शुक्रवार सुबह से ही ट्यूबवेल से बावड़ी को भरवाना शुरू कर दिया। शाम तक ट्यूबवेल चलने के बाद भी बावड़ी पूरी तरह भर नहीं पाई। बावड़ी सूखने से श्रद्धालुओं को स्नान और जलाभिषेक के लिए पानी का संकट पैदा हो गया था। कफारा के प्राचीन श्री लीलानाथ मंदिर परिसर में स्थित यह बावड़ी तीर्थ 500 साल से भी अधिक पुराना है। करीब 100 साल पहले इस तीर्थ का जीर्णोद्धार खैरीगढ़ स्टेट की तत्कालीन महारानी सुरथ कुमारी शाह ने कराया था। बावड़ी तीर्थ के सूख जाने से बैसाखी अमावस्या पर आने वाले हजारों स्नार्थियों में मायूसी फैल गई थी।
अमर उजाला ने छह मई के अंक में पहले पेज पर ‘500 साल में पहली बार सूखी कफारा बावड़ी’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इस कबर के बाद लीलालाथ मंदिर प्रबंध समिति चेती और पूरे दिन ट्यूबवेल चलाकर पानी भरवा दिया। पानी भरने से पहले तीर्थ की विधिवत सफाई भी कराई। लीलानाथ समिति के अध्यक्ष राशीश अवस्थी कोषाध्यक्ष अशोक निगम, प्रदीप शुक्ल, सुशील शुक्ल आदि लोगों ने बावड़ी भरने के काम में सहयोग किया।