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हमेशा याद रहेंगे राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा
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कल्याण सिंह के साथ विजय शुक्ला रिंकू फाइल फोटो
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। अयोध्या में रामजन्म भूमि मंदिर आंदोलन के पुरोधा और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जिले से गहरा नाता रहा। इसी वजह से उनका अक्सर यहां आना जाना रहा। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए वह कई बार जिले में आए। उनके निधन से यहां हर कोई आहत दिखा। इस दौरान लोगों ने उनके साथ बिताए पलों को याद कर अपने संस्मरण भी साझा किए।
भाजपा प्रवक्ता रमेश चंद्र मिश्रा बताते हैं पूर्व सीएम का स्वभाव काफी सरल था। विनय कटियार 2004 का लोकसभा चुनाव खीरी से लड़े थे। ढखरेवा में रैली हुई थी, जिसमें पूर्व कबीना मंत्री पटेल राम कुमार वर्मा के साथ रैली को उन्होंने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में हुए कार्यक्रम में उन्होंने भाग लिया और विकास भवन का शिलान्यास भी किया। इसके बाद उद्घाटन करने भी वही आए थे।
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मिठाई, दही-बूरा था पसंद
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शरद बाजपेई बताते हैं कि पिता डॉ. जय शंकर बाजपेई 1977 से 1987, 1989 से 93 तक जिलाध्यक्ष रहे। सन 1984-85 में कल्याण सिंह प्रदेेश अध्यक्ष थे। उस समय वह जिले में आकर उनके घर पर रुके थे। पिता जी के साथ फूलबेहड़ सहित कई गांवों का भ्रमण किया था। इसके बाद 1991 में कलराज मिश्र के साथ आए। इधर, 2016-17 में जयपुर में राजभवन में उनसे मुलाकात हुई थी। शरद बाजपेई बताते हैं कि उनकी याददाश्त काफी तेज थी। कई लोगों के नाम लेकर उनका हालचाल जानकर जिले की सभी सीटों कोलेकर चुनावी चर्चा की। अंतिम मुलाकात पांच जनवरी 2020 को उनके लखनऊ स्थित आवास पर हुई थी। उनका निधन अपूर्णनीय क्षति है।
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राममंदिर आंदोलन के भागीदारों को देते थे प्राथमिकता
विहिप के आचार्य संजय मिश्र बताते हैं कि कल्याण सिंह राममंदिर आंदोलन के कर्णधार थे। आंदोलन के भागीदारों को प्राथमिकता देते थे। करीब पांच साल पहले जयपुर में संत सम्मेलन हुआ था। तब राजभवन में उनसे मुलाकात हुई थी। जिले के तमाम लोगों का हालचाल पूछा था। संजय मिश्र ने बताया कि कल्याण सिंह बेहद सरल स्वभाव के थे। संघ के कार्यक्रम में निर्धारित गणवेश के साथ सामान्य कार्यकर्ता के तरह शामिल होते थे। लोग उन्हें सुनने को आतुर रहते थे। यही कारण था कि उनके कार्यक्रम में इस कदर भीड़ होती थी कि मैैदान में पैर रखने की जगह नहीं बचती थी।
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पूर्व सीएम की देन है एमएससी बॉटनी की फैकल्टी
बेसिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष एवं पूर्व वाईडी कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष संजीव कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह बेहद सरल स्वभाव के थे और लखीमपुर वालों को बेहद सम्मान देते थे। 1997-98 में उन्होंने एबीवीपी से छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव जीता। पूर्व कबीना मंत्री पटेल रामकुमार वर्मा के माध्यम से वह कल्याण सिंह को शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित करने गए, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। शपथ ग्रहण कार्यक्रम होने के बाद उनसे एमएसी बॉटनी की फैकल्टी के लिए कहा गया। इस पर उन्होंने तत्कालीन शिक्षा मंत्री राकेशधर त्रिपाठी से कहा, जिसके बाद कॉलेज में फैकल्टी बन गई।
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अयोध्या के नायक के रूप में याद किए जाएंगे पूर्व सीएम
भाजपा जिला उपाध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू बताते हैं कि एक चुनावी रैली में 1998 में पूर्व सीएम कल्याण सिंह का गोला नगर आगमन हुआ था। इसमें भीड़ देखकर काफी खुश हुए थे। जिले में उनके काफी संख्या में चाहने वाले थे। ऐसे में कार्यक्रम खत्म होने के बाद काफी देर तक शहर में रुककर राजनीति पर विस्तार से चर्चा की। पूर्व कबीना मंत्री स्वर्गीय राम कुमार वर्मा उनके बेहद करीबी थे। इनकी चुनाव सभा से लेकर आरएसएस के कार्यक्रमों में उनका आना जाना रहता था। वह सदैव अयोध्या के नायक के रूप में याद किए जाएंगे। संवाद
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भाजपा प्रवक्ता रमेश चंद्र मिश्रा बताते हैं पूर्व सीएम का स्वभाव काफी सरल था। विनय कटियार 2004 का लोकसभा चुनाव खीरी से लड़े थे। ढखरेवा में रैली हुई थी, जिसमें पूर्व कबीना मंत्री पटेल राम कुमार वर्मा के साथ रैली को उन्होंने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में हुए कार्यक्रम में उन्होंने भाग लिया और विकास भवन का शिलान्यास भी किया। इसके बाद उद्घाटन करने भी वही आए थे।
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मिठाई, दही-बूरा था पसंद
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शरद बाजपेई बताते हैं कि पिता डॉ. जय शंकर बाजपेई 1977 से 1987, 1989 से 93 तक जिलाध्यक्ष रहे। सन 1984-85 में कल्याण सिंह प्रदेेश अध्यक्ष थे। उस समय वह जिले में आकर उनके घर पर रुके थे। पिता जी के साथ फूलबेहड़ सहित कई गांवों का भ्रमण किया था। इसके बाद 1991 में कलराज मिश्र के साथ आए। इधर, 2016-17 में जयपुर में राजभवन में उनसे मुलाकात हुई थी। शरद बाजपेई बताते हैं कि उनकी याददाश्त काफी तेज थी। कई लोगों के नाम लेकर उनका हालचाल जानकर जिले की सभी सीटों कोलेकर चुनावी चर्चा की। अंतिम मुलाकात पांच जनवरी 2020 को उनके लखनऊ स्थित आवास पर हुई थी। उनका निधन अपूर्णनीय क्षति है।
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राममंदिर आंदोलन के भागीदारों को देते थे प्राथमिकता
विहिप के आचार्य संजय मिश्र बताते हैं कि कल्याण सिंह राममंदिर आंदोलन के कर्णधार थे। आंदोलन के भागीदारों को प्राथमिकता देते थे। करीब पांच साल पहले जयपुर में संत सम्मेलन हुआ था। तब राजभवन में उनसे मुलाकात हुई थी। जिले के तमाम लोगों का हालचाल पूछा था। संजय मिश्र ने बताया कि कल्याण सिंह बेहद सरल स्वभाव के थे। संघ के कार्यक्रम में निर्धारित गणवेश के साथ सामान्य कार्यकर्ता के तरह शामिल होते थे। लोग उन्हें सुनने को आतुर रहते थे। यही कारण था कि उनके कार्यक्रम में इस कदर भीड़ होती थी कि मैैदान में पैर रखने की जगह नहीं बचती थी।
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पूर्व सीएम की देन है एमएससी बॉटनी की फैकल्टी
बेसिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष एवं पूर्व वाईडी कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष संजीव कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह बेहद सरल स्वभाव के थे और लखीमपुर वालों को बेहद सम्मान देते थे। 1997-98 में उन्होंने एबीवीपी से छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव जीता। पूर्व कबीना मंत्री पटेल रामकुमार वर्मा के माध्यम से वह कल्याण सिंह को शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित करने गए, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। शपथ ग्रहण कार्यक्रम होने के बाद उनसे एमएसी बॉटनी की फैकल्टी के लिए कहा गया। इस पर उन्होंने तत्कालीन शिक्षा मंत्री राकेशधर त्रिपाठी से कहा, जिसके बाद कॉलेज में फैकल्टी बन गई।
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अयोध्या के नायक के रूप में याद किए जाएंगे पूर्व सीएम
भाजपा जिला उपाध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू बताते हैं कि एक चुनावी रैली में 1998 में पूर्व सीएम कल्याण सिंह का गोला नगर आगमन हुआ था। इसमें भीड़ देखकर काफी खुश हुए थे। जिले में उनके काफी संख्या में चाहने वाले थे। ऐसे में कार्यक्रम खत्म होने के बाद काफी देर तक शहर में रुककर राजनीति पर विस्तार से चर्चा की। पूर्व कबीना मंत्री स्वर्गीय राम कुमार वर्मा उनके बेहद करीबी थे। इनकी चुनाव सभा से लेकर आरएसएस के कार्यक्रमों में उनका आना जाना रहता था। वह सदैव अयोध्या के नायक के रूप में याद किए जाएंगे। संवाद

छात्रसंघ अध्यक्ष को शपथ दिलाते पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह फाइल फोटो- फोटो : LAKHIMPUR