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घास के मैदानों का शुरू हुआ वैज्ञानिक प्रबंधन
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में आयोजित कार्यशाला में बताई गई वैज्ञानिक प्रबंधन की तकनीक के आधार पर डीटीआर बफरजोन की मैलानी रेंज में घास के मैदानों का वैज्ञानिक प्रबंधन शुरू हो गया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि हाल ही में दुधवा नेशनल पार्क में घास के मैदानों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन के लिए आयोजित हुई कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने विशेष तकनीकी के जरिए प्रबंधन के सुझाव दिए थे। जिसके तहत पहले चरण में मैलानी रेंज की जटपुरा बीट के घास मैदान के प्रबंधन का कार्य शुरू किया गया। साथ ही शाकाहारी और मांसाहारी चीतल, पाढ़ा, सांभर, कांकड़, हिरन प्रजाति, खरगोश आदि के अलावा हाथी और गैंडों की पंसदीदा घास के साथ ही उपयोगी और अनुपयोगी घासों की पहचान के बाद ट्रैक्टर के जरिए कार्य शुरू किया गया।
डीडी ने बताया कि जंगल की खाद्य श्रृंखला में शाकाहारी वन्यजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका है और इनकी संख्या घटने से मांसाहारी वन्यजीव भोजन की तलाश में जंगल के बाहर आस-पास गांवों की ओर निकल सकते हैं। शाकाहारी वन्यजीवों के भोजन के रूप में नरम घस उगाने की वैज्ञानिक तकनीक के जरिए फाटा प्रबंधन का कार्य शुरू कर दिया गया है। दुधवा टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्यजीवों की खाद्य श्रृंखला को मजबूत करने के अलावा जैव विविधता संरक्षण और संवर्धन के दृष्टिकोण से घास के मैदानों का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि हाल ही में दुधवा नेशनल पार्क में घास के मैदानों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन के लिए आयोजित हुई कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने विशेष तकनीकी के जरिए प्रबंधन के सुझाव दिए थे। जिसके तहत पहले चरण में मैलानी रेंज की जटपुरा बीट के घास मैदान के प्रबंधन का कार्य शुरू किया गया। साथ ही शाकाहारी और मांसाहारी चीतल, पाढ़ा, सांभर, कांकड़, हिरन प्रजाति, खरगोश आदि के अलावा हाथी और गैंडों की पंसदीदा घास के साथ ही उपयोगी और अनुपयोगी घासों की पहचान के बाद ट्रैक्टर के जरिए कार्य शुरू किया गया।
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डीडी ने बताया कि जंगल की खाद्य श्रृंखला में शाकाहारी वन्यजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका है और इनकी संख्या घटने से मांसाहारी वन्यजीव भोजन की तलाश में जंगल के बाहर आस-पास गांवों की ओर निकल सकते हैं। शाकाहारी वन्यजीवों के भोजन के रूप में नरम घस उगाने की वैज्ञानिक तकनीक के जरिए फाटा प्रबंधन का कार्य शुरू कर दिया गया है। दुधवा टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्यजीवों की खाद्य श्रृंखला को मजबूत करने के अलावा जैव विविधता संरक्षण और संवर्धन के दृष्टिकोण से घास के मैदानों का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
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