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आर्गेनोफॉस्फेट जहर खाने से हुई थी बाघिन की मौत
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बांकेगंज। गोला रेंज में बिझौली गांव के पास दो माह पहले बड़ी नहर के पानी में उतराते मिली बाघिन के शव की विसरा रिपोर्ट आ गई है। आईवीआरआई बरेली से आई विसरा रिपोर्ट में मौत ‘आर्गेनोफॉस्फेट’ जहर से होने की पुष्टि हुई है। कहने को तो यह कीटनाशक है, मगर शिकारी भोजन बने वन्यजीव पर यह डालकर बाघ-बाघिन को आसानी से शिकार बना लेते हैं। ऐसे में बाघिन का शिकार का अंदेशा जताया जा रहा है। इसके चलते वन विभाग की टीम बाघिन की मौत की नए सिरे से जांच करने में जुट गई है।
दो माह पहले 10 जुलाई को बाघिन का शव बड़ी नहर में उतराते मिला था। पोस्टमार्टम में तत्काल उसकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका था। इसलिए उसका विसरा जांच के लिए आइवीआरआई (बरेली) भेजा गया था। दो महीने बाद आईवीआरआई से आई विसरा रिपोर्ट में बाघिन के शरीर में आर्गेनोफॉस्फेट जहर मिलना बताया गया है। तराई में पेशेवर शिकारी बाघों का शिकार करने के लिए इसी तरह का जहर इस्तेमाल करते हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि जब कोई बाघ किसी जानवर का शिकार करता है, तब वह अपने स्वभाव के मुताबिक शिकार का कुछ अंश खाकर उसे छोड़ कर चला जाता है। फिर दोबारा उसे खाने आता है। इस बीच शिकारी बाघ द्वारा मारे गए जानवर पर आर्गेनोफॉस्फेट नामक तीव्र कीटनाशक दवा डाल देते हैं। बाघ जब अपने शिकार को खाता है तो जहर उसके शरीर में चला जाता है, फिर वे तेज प्यास लगने पर नदी, नहरों और जलाशयों की तरफ भागते हैं। पानी पीने के दौरान ही उनकी वहीं मौत हो जाती है। तब घात लगाए बैठे शिकारी उनकी खाल, मांस मूंछों के बाल, नाखून और दांत आदि निकाल लेते हैं। इन सब चीजों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी कीमत मिलती है। अमर उजाला ने बाघिन के शिकार की आशंका पहले ही जाहिर की थी। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस समय इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी थी। विसरा रिपोर्ट आने के बाद यह आशंका सही साबित हुई है। अब इस मामले की नए सिरे से जांच होगी।
बिझौली गांव के पास बड़ी नहर में मिले बाघिन के शव की विसरा रिपोर्ट आ गई है। विसरा में आर्गेनोफॉस्फेट के तत्व मिले हैं। बाघिन के मौत मामले की नए सिरे से जांच कराई जाएगी। - समीर कुमार, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग।
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दो माह पहले 10 जुलाई को बाघिन का शव बड़ी नहर में उतराते मिला था। पोस्टमार्टम में तत्काल उसकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका था। इसलिए उसका विसरा जांच के लिए आइवीआरआई (बरेली) भेजा गया था। दो महीने बाद आईवीआरआई से आई विसरा रिपोर्ट में बाघिन के शरीर में आर्गेनोफॉस्फेट जहर मिलना बताया गया है। तराई में पेशेवर शिकारी बाघों का शिकार करने के लिए इसी तरह का जहर इस्तेमाल करते हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि जब कोई बाघ किसी जानवर का शिकार करता है, तब वह अपने स्वभाव के मुताबिक शिकार का कुछ अंश खाकर उसे छोड़ कर चला जाता है। फिर दोबारा उसे खाने आता है। इस बीच शिकारी बाघ द्वारा मारे गए जानवर पर आर्गेनोफॉस्फेट नामक तीव्र कीटनाशक दवा डाल देते हैं। बाघ जब अपने शिकार को खाता है तो जहर उसके शरीर में चला जाता है, फिर वे तेज प्यास लगने पर नदी, नहरों और जलाशयों की तरफ भागते हैं। पानी पीने के दौरान ही उनकी वहीं मौत हो जाती है। तब घात लगाए बैठे शिकारी उनकी खाल, मांस मूंछों के बाल, नाखून और दांत आदि निकाल लेते हैं। इन सब चीजों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी कीमत मिलती है। अमर उजाला ने बाघिन के शिकार की आशंका पहले ही जाहिर की थी। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस समय इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी थी। विसरा रिपोर्ट आने के बाद यह आशंका सही साबित हुई है। अब इस मामले की नए सिरे से जांच होगी।
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बिझौली गांव के पास बड़ी नहर में मिले बाघिन के शव की विसरा रिपोर्ट आ गई है। विसरा में आर्गेनोफॉस्फेट के तत्व मिले हैं। बाघिन के मौत मामले की नए सिरे से जांच कराई जाएगी। - समीर कुमार, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग।
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