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जेल में बंद ग्राम पंचायत अधिकारी निलंबित

Thu, 10 Sep 2020 01:37 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2020 01:37 AM IST
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Jailed gram panchayat officer suspended
लखीमपुर खीरी। बिजुआ ब्लॉक में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी धीरज सिंह राना को डीपीआरओ ने निलंबित कर दिया है। ग्राम पंचायत अधिकारी चार सितंबर 2020 से जेल में बंद है। बताते हैं कि दूसरी शादी करने पर पहली पत्नी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने ग्राम पंचायत अधिकारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बीडीओ बिजुआ ने ग्राम पंचायत अधिकारी के जेल जाने की सूचना छह सितंबर 2020 को डीपीआरओ को दी थी, लेकिन किसी अधिकारी के पास चार्ज न होने के चलते उस दिन कार्रवाई नहीं हो सकी। बुधवार को चार्ज मिलने के बाद डीपीआरओ मनोज कुमार यादव ने ग्राम पंचायत अधिकारी धीरज सिंह राना को निलंबित कर दिया। साथ ही इस मामले में एडीओ पंचायत फूलबेहड़ को जांच अधिकारी नामित कर 15 दिन में आरोप पत्र निर्गत करने के निर्देश दिए हैं। संवाद
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दो अधिकारियों में बंटा डीपीआरओ का चार्ज
लखीमपुर खीरी। 13 दिनों बाद रिक्त पड़े डीपीआरओ पद का कार्यभार दो अधिकारियों में बांट दिया गया है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने एडीपीआरओ मनोज कुमार यादव को डीपीआरओ का प्रशासनिक चार्ज दिया है, जबकि डीसी मनरेगा राजनाथ प्रसाद भगत को वित्तीय चार्ज दिया गया है। इससे पंचायत राज विभाग में कामकाज सुचारू हो सकेगा और लंबित मामलों में कार्रवाई हो सकेगी।
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विभागीय कार्यों में लापरवाही और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई न करने के चलते शासन ने 26 अगस्त 2020 को तत्कालीन डीपीआरओ अजय कुमार श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया था, लेकिन इनके स्थान पर किसी नए अधिकारी की तैनाती नहीं हुई थी। इससे करीब 13 दिनों तक विभागीय कामकाज प्रभावित रहा और डीपीआरओ का चार्ज किसी अन्य अधिकारी को देने को लेकर अफवाहों का बाजार भी गर्म रहा था। हालांकि इस दौरान एडीपीआरओ कामकाज देखते रहे, लेकिन चार्ज उन्हें भी नहीं मिला था। मंगलवार को उपनिदेशक पंचायत एके सिंह ने डीपीआरओ कार्यालय का निरीक्षण कर विभागीय कार्यों की समीक्षा की थी और डीपीआरओ का चार्ज एडीपीआरओ को देने की संस्तुति की थी। इसके बाद डीएम ने डीपीआरओ का कार्यभार दो अधिकारियों में बांट दिया। एडीपीआरओ मनोज कुमार को डीपीआरओ का विभागीय चार्ज मिला, जबकि उपायुक्त मनरेगा राजनाथ प्रसाद भगत को वित्तीय अधिकार दिया गया है। इस व्यवस्था से पंचायत राज विभाग का कामकाज सुचारू रूप से संचालित होगा, लेकिन पूर्णकालिक डीपीआरओ की तैनाती न होने से विभाग में खींचतान भी मच सकती है। क्योंकि दो अधिकारियों के पास चार्ज होने से विभागीय कार्यों में दूसरे अधिकारी के दखल से विवाद की स्थिति बन सकती है। संवाद
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