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खतरा: जेल में क्षमता से कई गुना ज्यादा हैं बंदी
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लखीमपुर जिला कारागार
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। जेल में बंदी और कैदी यातनाएं भोगने को मजबूर हैं। क्षमता से अधिक बंदियों के कारण सांस दूभर हो रहा है। एक-एक बैरक में दोगुने से ढाई गुने बंदियों और कैदियों के रहने से उठने बैठने में भी दिक्कत हो रही है। ऐसे में कोरोना काल के चलते बंदियों की इतनी संख्या से संक्रमण के खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि, जेल प्रशासन कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर जेल में बंदियों को रख रहा है।
आजादी के बाद भी जेल के मैनुअल में कोई बदलाव नहीं हुआ। आबादी बढ़ी अपराध बढ़े, नतीजतन अपराधियों की संख्या बढ़ी, जेल में कैदियों की तादात बढ़ी, लेकिन जेल में रहने के लिए क्षमता के मुताबिक जेल में बैरकें नहीं बढ़ सकीं। जेलों के आधुनिकीकरण और उन्हें सुधार गृह में तब्दील करने की सरकारी दावे यहां खोखले साबित हो रहे हैं। जिला जेल में 725 बंदियों/कैदियों की रखने की क्षमता है। इन बंदियों के रहने के लिए 17 बैरकें हैं, लेकिन गुरुवार को इस जेल में 1825 लोग निरुद्ध हैं। क्षमता से ढाई गुना अधिक बंदी/कैदियों के खाने का बजट तो जेल के पास है, लेकिन रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। मजबूरन जेल प्रशासन एक-एक बैरक में क्षमता से दोगुने-तीन गुने बंदियों को रख रहा है। हालांकि कोरोना संक्रमण की शुरुआत होने पर शासन के आदेश पर जेल प्रशासन ने सात साल तक की सजा पाने वाले कैदियों को आठ हफ्ते की पैरोल पर रिहा कर दिया था। इसके अलावा कई बंदियों की जमानतें हो गई थीं। इससे जेलों में बंदियों और कैदियों की संख्या काफी कम हो गई थी। नए बंदियों के लिए जेल प्रशासन ने अस्थायी जेल बनाई थीं। इन बंदियों को पहले 14 दिन क्वारंटीन होना पड़ता है। क्वारंटीन अवधि पूरे होने के बाद ही उन्हें स्थायी जेल में लाया जाता है। जेल प्रशासन रोजाना दिन में दो बार स्थायी और अस्थायी जेल को सैनिटाइज करा रही है।
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सैनिटाइज होने के 48 घंटे बाद दिया जाता है सामान
कोरोना को लेकर जेल प्रशासन कोई भी ढिलाई करने के मूड में नहीं है। जेल अधीक्षक आरबी पटेल ने बताया कि बंदियों का जो सामान परिवार वाले लेकर आते हैं। उसे सैनिटाइज कर 48 घंटे रखने के बाद बंदी तक पहुंचाया जाता है। साबुन से तीन बार हाथ धोना अनिवार्य है। बिना मास्क के कोई बंदी नहीं रहता है। इसके अलावा प्रतिदिन जेल को दिन में दो बार सैनिटाइज कराया जाता है।
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परिजनों की बंदियों से मुलाकात के अभी आसार नहीं
कोराना संक्रमण की शुरूआत से अपने गुनाहों की सजा काट रहे बंदी और कैदियों के परिवार वालों को अभी राहत मिलने के आसार नहीं है, क्योंकि शासन ने बंदी से मुलाकात पर लगाई रोक अभी नहीं हटाई है। जेल अधीक्षक की माने तो अभी मुलाकात पर शासन स्तर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
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बंदी-कैदियों की यह है दिनचर्या
जेल में बंदियों और कैदियों को सुबह पांच बजे उठना पड़ता है। नित्यक्रिया से निपटने के बाद गणना में शामिल होते हैं। गणना पूरी होने के बाद आठ बजे चाय और नाश्ता दिया जाता है।
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यह है बंदियों-कैदियों के खाने का मेन्यू
नाश्ते में मंगलवार, शनिवार को चना, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को दलिया दिया जाता है। सोमवार और बृहस्पतिवार को बंद दिया जाता है। प्रतिदिन शाम को 45 ग्राम गुड़ भी दिया जाता है। सुबह 11 बजे भोजन में दाल, चावल, सब्जी, रोटी दोनों समय दी जाती है। दाल का शेड्यूल निर्धारित है, जिसमें अरहर, उड़द, उड़द राजमा, चना, मसूर, खड़ी मसूर शामिल है। पहले, और तीसरे रविवार को विशेष भोजन में पूड़ी, सब्जी, हलुआ और रवे का हलुवा शामिल है। दूसरे रविवार को कढ़ी और चावल खिलाया जाता है।
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जेल की क्षमता सिर्फ 725 लोगों को रखने की है, लेकिन हमेशा बंदी और कैदियों की संख्या ढाई गुना से अधिक रहती है। नई बैरक बन गई है, लेकिन अभी शुरू नहीं हुई है। कोरोना को लेकर जेल प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। सावधानी बरतने के साथ सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
आरबी पटेल, जेल अधीक्षक
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आजादी के बाद भी जेल के मैनुअल में कोई बदलाव नहीं हुआ। आबादी बढ़ी अपराध बढ़े, नतीजतन अपराधियों की संख्या बढ़ी, जेल में कैदियों की तादात बढ़ी, लेकिन जेल में रहने के लिए क्षमता के मुताबिक जेल में बैरकें नहीं बढ़ सकीं। जेलों के आधुनिकीकरण और उन्हें सुधार गृह में तब्दील करने की सरकारी दावे यहां खोखले साबित हो रहे हैं। जिला जेल में 725 बंदियों/कैदियों की रखने की क्षमता है। इन बंदियों के रहने के लिए 17 बैरकें हैं, लेकिन गुरुवार को इस जेल में 1825 लोग निरुद्ध हैं। क्षमता से ढाई गुना अधिक बंदी/कैदियों के खाने का बजट तो जेल के पास है, लेकिन रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। मजबूरन जेल प्रशासन एक-एक बैरक में क्षमता से दोगुने-तीन गुने बंदियों को रख रहा है। हालांकि कोरोना संक्रमण की शुरुआत होने पर शासन के आदेश पर जेल प्रशासन ने सात साल तक की सजा पाने वाले कैदियों को आठ हफ्ते की पैरोल पर रिहा कर दिया था। इसके अलावा कई बंदियों की जमानतें हो गई थीं। इससे जेलों में बंदियों और कैदियों की संख्या काफी कम हो गई थी। नए बंदियों के लिए जेल प्रशासन ने अस्थायी जेल बनाई थीं। इन बंदियों को पहले 14 दिन क्वारंटीन होना पड़ता है। क्वारंटीन अवधि पूरे होने के बाद ही उन्हें स्थायी जेल में लाया जाता है। जेल प्रशासन रोजाना दिन में दो बार स्थायी और अस्थायी जेल को सैनिटाइज करा रही है।
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सैनिटाइज होने के 48 घंटे बाद दिया जाता है सामान
कोरोना को लेकर जेल प्रशासन कोई भी ढिलाई करने के मूड में नहीं है। जेल अधीक्षक आरबी पटेल ने बताया कि बंदियों का जो सामान परिवार वाले लेकर आते हैं। उसे सैनिटाइज कर 48 घंटे रखने के बाद बंदी तक पहुंचाया जाता है। साबुन से तीन बार हाथ धोना अनिवार्य है। बिना मास्क के कोई बंदी नहीं रहता है। इसके अलावा प्रतिदिन जेल को दिन में दो बार सैनिटाइज कराया जाता है।
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परिजनों की बंदियों से मुलाकात के अभी आसार नहीं
कोराना संक्रमण की शुरूआत से अपने गुनाहों की सजा काट रहे बंदी और कैदियों के परिवार वालों को अभी राहत मिलने के आसार नहीं है, क्योंकि शासन ने बंदी से मुलाकात पर लगाई रोक अभी नहीं हटाई है। जेल अधीक्षक की माने तो अभी मुलाकात पर शासन स्तर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
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बंदी-कैदियों की यह है दिनचर्या
जेल में बंदियों और कैदियों को सुबह पांच बजे उठना पड़ता है। नित्यक्रिया से निपटने के बाद गणना में शामिल होते हैं। गणना पूरी होने के बाद आठ बजे चाय और नाश्ता दिया जाता है।
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यह है बंदियों-कैदियों के खाने का मेन्यू
नाश्ते में मंगलवार, शनिवार को चना, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को दलिया दिया जाता है। सोमवार और बृहस्पतिवार को बंद दिया जाता है। प्रतिदिन शाम को 45 ग्राम गुड़ भी दिया जाता है। सुबह 11 बजे भोजन में दाल, चावल, सब्जी, रोटी दोनों समय दी जाती है। दाल का शेड्यूल निर्धारित है, जिसमें अरहर, उड़द, उड़द राजमा, चना, मसूर, खड़ी मसूर शामिल है। पहले, और तीसरे रविवार को विशेष भोजन में पूड़ी, सब्जी, हलुआ और रवे का हलुवा शामिल है। दूसरे रविवार को कढ़ी और चावल खिलाया जाता है।
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जेल की क्षमता सिर्फ 725 लोगों को रखने की है, लेकिन हमेशा बंदी और कैदियों की संख्या ढाई गुना से अधिक रहती है। नई बैरक बन गई है, लेकिन अभी शुरू नहीं हुई है। कोरोना को लेकर जेल प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। सावधानी बरतने के साथ सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
आरबी पटेल, जेल अधीक्षक