{"_id":"6887bf44b075815c4b02f24e","slug":"it-is-a-challenge-to-go-from-mitauli-to-lakhimpur-shahjahanpur-sitapur-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1001-151805-2025-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: मितौली से लखीमपुर, शाहजहांपुर, सीतापुर जाना चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: मितौली से लखीमपुर, शाहजहांपुर, सीतापुर जाना चुनौती
विज्ञापन
अमित गुप्ता
मितौली। जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर मितौली कहने को तो तहसील है, लेकिन यहां की परिवहन व्यवस्था काफी खराब है। इस मार्ग पर एक भी सरकारी रोडवेज बस नहीं है। प्राइवेट बसें संचालित होती हैं, जिनके पहिये शाम पांच बजे के बाद थम जाते हैं। इमरजेंसी में अगर किसी को कहीं जाना पड़ जाए तो बड़ा संकट खड़ा हो जाता है। कभी-कभी बुकिंग पर भी सवारी वाहन नहीं मिल पाते। खुद का वाहन है तो ठीक, नहीं तो मुसीबत।
मितौली कस्बा जिला मुख्यालय के साथ ही पड़ोसी जिला शाहजहांपुर और सीतापुर से भी जुड़ा है, लेकिन क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि मितौली आने जाने के लिए रात में कोई संसाधन नहीं है। मितौली तहसील का दर्जा प्राप्त हुए एक दशक हो चुके हैं, फिर भी सुविधाओं का अभाव है। शाम होते ही सवारी वाहनों का संचालन पूरी तरह बंद हो जाता है। अगर किसी को देर शाम जिला मुख्यालय के अलावा मैगलगंज, सीतापुर, लखनऊ जाना पड़ जाए तो जाना मुश्किल हो जाएगा।
खास बात यह है कि जनप्रतिनिधि भी ध्यान नहीं देते हैं। इधर, क्षेत्र के लोगों ने इस मार्ग पर रोडवेज बसों के संचालन की मांग की है, ताकि क्षेत्र की जनता का जिला मुख्यालय के साथ सीतापुर, शाहजहांपुर जाने का भी रास्ता साफ हो जाए। एआरएम गीता सिंह ने बताया कि डिपो पर सभी बसें अनुबंधित है, जिनके मार्ग पहले ही निर्धारित है। भविष्य में डिपो बनता है और निगम की बसें मिलती है तो इस मार्ग पर बस संचालन का रास्ता साफ हो जाएगा।
विज्ञापन
परिवहन व्यवस्था से ही क्षेत्र का विकास होता है, लेकिन वह यहां है नहीं। जनप्रतिनिधियों को सोचना चाहिए कि जनता को मूलभूत सुविधाएं मिल रही है या नहीं। - मुस्तफा इदरीसी, टेलर
मितौली आने जाने के लिए शाम के बाद कोई संसाधन नहीं है। कई बार इस समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों से कहा, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। - अमित गुप्ता, व्यापारी
इमरजेंसी में लखीमपुर, मैगलगंज, सीतापुर, लखनऊ जाना पड़ पाए तो मुश्किल हो जाएगा। कभी-कभी यहां से बुकिंग के वाहन भी नहीं मिलते हैं। ऐसे में अगर खुद का वाहन है तो ठीक, नहीं तो आने-जाने का संकट है। -राजिक अली, मितौली
तहसील बनने के बाद हम लोगों को आस थी कि अब क्षेत्र का विकास होगा। यातायात की सुविधा सुगम हो जाएगी, लेकिन 12 वर्ष बीत गए, कुछ भी नहीं बदला। -अमित कटियार, मितौली
विज्ञापन
मितौली कस्बा जिला मुख्यालय के साथ ही पड़ोसी जिला शाहजहांपुर और सीतापुर से भी जुड़ा है, लेकिन क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि मितौली आने जाने के लिए रात में कोई संसाधन नहीं है। मितौली तहसील का दर्जा प्राप्त हुए एक दशक हो चुके हैं, फिर भी सुविधाओं का अभाव है। शाम होते ही सवारी वाहनों का संचालन पूरी तरह बंद हो जाता है। अगर किसी को देर शाम जिला मुख्यालय के अलावा मैगलगंज, सीतापुर, लखनऊ जाना पड़ जाए तो जाना मुश्किल हो जाएगा।
विज्ञापन
खास बात यह है कि जनप्रतिनिधि भी ध्यान नहीं देते हैं। इधर, क्षेत्र के लोगों ने इस मार्ग पर रोडवेज बसों के संचालन की मांग की है, ताकि क्षेत्र की जनता का जिला मुख्यालय के साथ सीतापुर, शाहजहांपुर जाने का भी रास्ता साफ हो जाए। एआरएम गीता सिंह ने बताया कि डिपो पर सभी बसें अनुबंधित है, जिनके मार्ग पहले ही निर्धारित है। भविष्य में डिपो बनता है और निगम की बसें मिलती है तो इस मार्ग पर बस संचालन का रास्ता साफ हो जाएगा।
विज्ञापन
परिवहन व्यवस्था से ही क्षेत्र का विकास होता है, लेकिन वह यहां है नहीं। जनप्रतिनिधियों को सोचना चाहिए कि जनता को मूलभूत सुविधाएं मिल रही है या नहीं। - मुस्तफा इदरीसी, टेलर
मितौली आने जाने के लिए शाम के बाद कोई संसाधन नहीं है। कई बार इस समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों से कहा, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। - अमित गुप्ता, व्यापारी
इमरजेंसी में लखीमपुर, मैगलगंज, सीतापुर, लखनऊ जाना पड़ पाए तो मुश्किल हो जाएगा। कभी-कभी यहां से बुकिंग के वाहन भी नहीं मिलते हैं। ऐसे में अगर खुद का वाहन है तो ठीक, नहीं तो आने-जाने का संकट है। -राजिक अली, मितौली
तहसील बनने के बाद हम लोगों को आस थी कि अब क्षेत्र का विकास होगा। यातायात की सुविधा सुगम हो जाएगी, लेकिन 12 वर्ष बीत गए, कुछ भी नहीं बदला। -अमित कटियार, मितौली

अमित गुप्ता

अमित गुप्ता

अमित गुप्ता