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मुद्दे दरकिनार, जातीय समीकरणों में उलझे उम्मीदवार
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लखीमपुर खीरी। तरक्की के लिहाज से पिछड़े सूबे के सबसे बड़े खीरी जिले में मुद्दों की भरमार है। लेकिन राजनीतिक दल मुद्दों को दरकिनार कर जातीय समीकरणों को सुलझाने में उलझे हुए हैं। जिले में आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। सभी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, युवाओं को रोजगार, खराब सड़कें, सिंचाई संसाधनों का अभाव, शुद्ध पेयजल की समस्या समेत विकास के मुद्दे हैं। आधे जिला कई दशकों नदियों से होने वाली बाढ़ और कटान की त्रासदी झेल रहा है। फिर भी इन बड़े मुद्दों पर उम्मीदवारों का ध्यान नहीं है।
पलिया विधानसभा क्षेत्र के मतदाता दशकों से शारदा और सुहेली नदियों में हर साल आने वाली बाढ़ से तबाही झेल रहे हैं। क्षेत्र के लोग इसका स्थायी समाधान चाहते हैं लेकिन राजनीतिक दल और उनके उम्मीदवार उदासीन हैं। क्षेत्र की अधिकांश सड़कें खराब हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। युवा बेरोजगार हैं लेकिन उम्मीदवार जातीय गणित में उलझे हैं। यहां मुस्लिम वोटों के लिए सपा, बसपा और कांग्रेस में खींचतान मची हुई है। वहीं अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के वोटों को अपने पक्ष में लाने के लिए सभी दलों में होड़ है। यह क्षेत्र अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग बहुल क्षेत्र है।
निघासन में भी मुस्लिम वोटों के लिए सपा और बसपा में खींचतान है। कुर्मी और मौर्य बिरादरी के वोटों में सेंधमारी की होड़ है। दलित वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश हो रही है। क्षेत्र में पचपेड़ी घाट शारदा नदी पर पुल का निर्माण, खराब सड़कें, आवागमन के संसाधनों की कमी, शैक्षिक पिछड़ापन और बेरोजगारी जैसी समस्याओं और बाढ़ कटान की समस्या के स्थायी समाधान की ओर किसी का ध्यान नहीं है। लावारिश पशुओं से फसलों को नुकसान, जंगली जानवरों के हमले से होने वाली मौतों पर उम्मीदवार खामोश हैं।
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गोलागोकर्णनाथ में मुस्लिम, कुर्मी और ब्राह्मण वोटों को अधिक से अधिक अपने पाले में करने के लिए उम्मीदवारों में होड़ लगी हुई है। जाति बिरादरी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए प्रत्याशी रात दिन एक कर रहे हैं। सबकी नजर निर्णायक रहने वाली जातियों पर है। यहां भी गोला को पर्यटन नगरी का दर्जा दिलाने, किसानों को गन्ना भुगतान समय पर दिलाने, सड़कों की दशा सुधारने, लचर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने, आवागमन के संसाधनों के विस्तार जैसी मूलभूत समस्याओं के प्रति उम्मीदवारों की उदासीनता से मतदाता मायूस हैं।
श्रीनगर में समस्याओं से लोग बेजार, उदासीन हैं उम्मीदवार
श्रीनगर सुरक्षित सीट पर मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के वोटों के लिए सपा, बसपा में खींचतान है। अनुसूचित जाति वोट बैंक में ज्यादा से ज्यादा सेंधमारी की होड़ है। सवर्ण मतदाताओं को रिझाने की पुरजोर कोशिश जारी है। जबकि हर साल बाढ़ कटान से होने वाली तबाही झेलने वाला मतदाता लाचार है। क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। शैक्षिक पिछड़ापन और युवाओं में बेरोजगारी यहां की पहचान है। आवागमन साधनों की कमी से भी यहां के लोग बेजार हैं। जबकि उम्मीदवार समस्याएं सुलझाने की बजाय जातीय समीकरण सुलझाने में उलझे हैं।
धौरहरा में मुस्लिम, ब्राह्मण वोट पर नजर
धौरहरा में मुस्लिम और ब्राह्मण वोट बैंक पर उम्मीदवारों की नजर है। यहां से दो ब्राह्मण उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। सपा और बसपा दोनों ही मुस्लिम वोटों पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं। ब्राह्मण वोटों के लिए भाजपा और कांग्रेस में सेंधमारी है। कुर्मी और अन्य पिछड़े वर्ग के वोटों को सपा समेटने की कोशिश में हैं। यहां बाढ़ और कटान प्रमुख मुद्दा है। इसका स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका है। लचर स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ापन और सड़कों की खराब हालत पर उम्मीदवार उदासीन हैं।
वोट बैंकों में सेंधमारी, मुद्दों की नहीं ले रहे जिम्मेदारी
लखीमपुर सदर भी मूलभूत समस्याओं से अछूता नहीं है। स्वास्थ्य सेवाएं, औद्योगिक पिछड़ापन, खराब सड़कें, शहरी क्षेत्र में गंदगी समेत कई बड़े मुद्दे हैं लेकिन यहां भी उम्मीदवार इन मुद्दों को हासिए पर रखकर जातीय समीकरण सुलझाने में लगे हैं। कुर्मी बहुल इस क्षेत्र में कुर्मी, मुस्लिम और ब्राह्मण वोटों को लेकर खींचतान है। कस्ता सुरक्षित सीट पर पासी वोटों के बटवारे, सवर्ण वोटों में सेंधमारी की कोशिश चल रही है। कस्ता में मितौली और मैगलगंज को नगर पंचायत को दर्जा देने का मुद्दा प्रमुख है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और शैक्षिक पिछड़ापन भी यहां की प्रमुख समस्या है लेकिन इन समस्याओं पर उम्मीदवारों का ध्यान नहीं है।
जाति बिरादरी के वोटों को पाले में करने की खींचतान
मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र भी शैक्षिक पिछड़ेपन और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव से जूझ रहा है। सड़कें खराब हैं, आवागमन के साधनों की कमी है। बावजूद इसके उम्मीदवारों को इसकी परवाह नहीं हैं। मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण को लेकर सपा बसपा में रस्साकशी चल रही है। ब्राह्मण, क्षत्रिय और दलित वोटों को अपने पाले में लाने के लिए भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस चारों ही जी जान से जुटे हुए हैं। राजनीतिक दलों के एजेंडे में तो स्थानीय मुद्दे गायब ही हैं। उम्मीदवार भी इन मुद्दों से बचते नजर आ रहे हैं।
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पलिया विधानसभा क्षेत्र के मतदाता दशकों से शारदा और सुहेली नदियों में हर साल आने वाली बाढ़ से तबाही झेल रहे हैं। क्षेत्र के लोग इसका स्थायी समाधान चाहते हैं लेकिन राजनीतिक दल और उनके उम्मीदवार उदासीन हैं। क्षेत्र की अधिकांश सड़कें खराब हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। युवा बेरोजगार हैं लेकिन उम्मीदवार जातीय गणित में उलझे हैं। यहां मुस्लिम वोटों के लिए सपा, बसपा और कांग्रेस में खींचतान मची हुई है। वहीं अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के वोटों को अपने पक्ष में लाने के लिए सभी दलों में होड़ है। यह क्षेत्र अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग बहुल क्षेत्र है।
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निघासन में भी मुस्लिम वोटों के लिए सपा और बसपा में खींचतान है। कुर्मी और मौर्य बिरादरी के वोटों में सेंधमारी की होड़ है। दलित वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश हो रही है। क्षेत्र में पचपेड़ी घाट शारदा नदी पर पुल का निर्माण, खराब सड़कें, आवागमन के संसाधनों की कमी, शैक्षिक पिछड़ापन और बेरोजगारी जैसी समस्याओं और बाढ़ कटान की समस्या के स्थायी समाधान की ओर किसी का ध्यान नहीं है। लावारिश पशुओं से फसलों को नुकसान, जंगली जानवरों के हमले से होने वाली मौतों पर उम्मीदवार खामोश हैं।
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गोलागोकर्णनाथ में मुस्लिम, कुर्मी और ब्राह्मण वोटों को अधिक से अधिक अपने पाले में करने के लिए उम्मीदवारों में होड़ लगी हुई है। जाति बिरादरी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए प्रत्याशी रात दिन एक कर रहे हैं। सबकी नजर निर्णायक रहने वाली जातियों पर है। यहां भी गोला को पर्यटन नगरी का दर्जा दिलाने, किसानों को गन्ना भुगतान समय पर दिलाने, सड़कों की दशा सुधारने, लचर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने, आवागमन के संसाधनों के विस्तार जैसी मूलभूत समस्याओं के प्रति उम्मीदवारों की उदासीनता से मतदाता मायूस हैं।
श्रीनगर में समस्याओं से लोग बेजार, उदासीन हैं उम्मीदवार
श्रीनगर सुरक्षित सीट पर मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के वोटों के लिए सपा, बसपा में खींचतान है। अनुसूचित जाति वोट बैंक में ज्यादा से ज्यादा सेंधमारी की होड़ है। सवर्ण मतदाताओं को रिझाने की पुरजोर कोशिश जारी है। जबकि हर साल बाढ़ कटान से होने वाली तबाही झेलने वाला मतदाता लाचार है। क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। शैक्षिक पिछड़ापन और युवाओं में बेरोजगारी यहां की पहचान है। आवागमन साधनों की कमी से भी यहां के लोग बेजार हैं। जबकि उम्मीदवार समस्याएं सुलझाने की बजाय जातीय समीकरण सुलझाने में उलझे हैं।
धौरहरा में मुस्लिम, ब्राह्मण वोट पर नजर
धौरहरा में मुस्लिम और ब्राह्मण वोट बैंक पर उम्मीदवारों की नजर है। यहां से दो ब्राह्मण उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। सपा और बसपा दोनों ही मुस्लिम वोटों पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं। ब्राह्मण वोटों के लिए भाजपा और कांग्रेस में सेंधमारी है। कुर्मी और अन्य पिछड़े वर्ग के वोटों को सपा समेटने की कोशिश में हैं। यहां बाढ़ और कटान प्रमुख मुद्दा है। इसका स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका है। लचर स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ापन और सड़कों की खराब हालत पर उम्मीदवार उदासीन हैं।
वोट बैंकों में सेंधमारी, मुद्दों की नहीं ले रहे जिम्मेदारी
लखीमपुर सदर भी मूलभूत समस्याओं से अछूता नहीं है। स्वास्थ्य सेवाएं, औद्योगिक पिछड़ापन, खराब सड़कें, शहरी क्षेत्र में गंदगी समेत कई बड़े मुद्दे हैं लेकिन यहां भी उम्मीदवार इन मुद्दों को हासिए पर रखकर जातीय समीकरण सुलझाने में लगे हैं। कुर्मी बहुल इस क्षेत्र में कुर्मी, मुस्लिम और ब्राह्मण वोटों को लेकर खींचतान है। कस्ता सुरक्षित सीट पर पासी वोटों के बटवारे, सवर्ण वोटों में सेंधमारी की कोशिश चल रही है। कस्ता में मितौली और मैगलगंज को नगर पंचायत को दर्जा देने का मुद्दा प्रमुख है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और शैक्षिक पिछड़ापन भी यहां की प्रमुख समस्या है लेकिन इन समस्याओं पर उम्मीदवारों का ध्यान नहीं है।
जाति बिरादरी के वोटों को पाले में करने की खींचतान
मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र भी शैक्षिक पिछड़ेपन और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव से जूझ रहा है। सड़कें खराब हैं, आवागमन के साधनों की कमी है। बावजूद इसके उम्मीदवारों को इसकी परवाह नहीं हैं। मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण को लेकर सपा बसपा में रस्साकशी चल रही है। ब्राह्मण, क्षत्रिय और दलित वोटों को अपने पाले में लाने के लिए भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस चारों ही जी जान से जुटे हुए हैं। राजनीतिक दलों के एजेंडे में तो स्थानीय मुद्दे गायब ही हैं। उम्मीदवार भी इन मुद्दों से बचते नजर आ रहे हैं।