{"_id":"574ae8b94f1c1b8228108c90","slug":"is-just-the-name-of-the-grp-police-station","type":"story","status":"publish","title_hn":"... तो सिर्फ नाम का है जीआरपी थाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
... तो सिर्फ नाम का है जीआरपी थाना
टीएन अवस्थी लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 29 May 2016 11:38 PM IST
विज्ञापन
थाना
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चौकी से थाना बनने के बाद नहीं बदला स्टाफ का नियतन
डेढ़ सौ किलोमीटर ट्रेनों की सुरक्षा की है जिम्मेदारी
लखीमपुर जीआरपी चौकी को महकमे ने थाने का दर्जा तो दे दिया, लेकिन एक दशक बाद भी थाने के स्टाफ का नियतन नहीं बदला गया। आज भी इस थाने के स्टाफ का नियतन चौकी के अनुरूप है, उसमें भी पदों के सापेक्ष जवानों की तैनाती नहीं है। जिससे यात्रियों और ट्रेनों की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है।
एक दशक पहले सीतापुर जीआरपी थाने की लखीमपुर चौकी हुआ करती थी। चौकी क्षेत्र में ओयल से लेकर बहराइच जिले की सीमा पर स्थित रेलवे स्टेशन मझरापूरब तक करीब 150 किलोमीटर की सुरक्षा का जिम्मा था। यहां पर एक एसआई, एक एचसी और 10 सिपाहियों के नियतन पद थे। इस रूट से लखनऊ से मैलानी, पीलीभीत, बरेली होते हुए मथुरा तक ट्रेनों का संचालन होता था। हालांकि उस समय ट्रेनों की संख्या काफी कम थीं, लेकिन बाद में यात्रियों की संख्या के साथ ट्रेनों की भी संख्या काफी बढ़ गई। लखीमपुर से पीलीभीत और मैलानी से गोंडा रेल प्रखंड पर घना जंगल होने के कारण ट्रेनों में लूटपाट की घटनाएं अधिक होती थीं। जिस पर जीआरपी महकमे ने वर्ष 2000 में लखीमपुर जीआरपी चौकी को सीतापुर से हटा दिया और इसे लखीमपुर जीआरपी थाना बनाया था। घने जंगलों से ट्रेनों और छोटी काशी से विख्यात गोला गोकर्णनाथ में होने वाली भीड़ को देखते हुए गोला और मैलानी में जीआरपी चौकी खोली गईं, लेकिन थाने के मुताबिक लखीमपुर में स्टाफ का नियतन नहीं बढ़ाया। आज भी थाना, चौकी के नियतन स्टॉफ पर चल रहा है। उसमें भी नियत पदों के मुताबिक जवान तैनात नहीं हैं।
22 रेलवे स्टेशन, पांच हैं हाल्ट
थाना जीआरपी लखीमपुर क्षेत्र में कुल 22 रेलवे स्टेशन और पांच हाल्ट हैं। ऐशबाग-सीतापुर के बीच अमान परिवर्तन का कार्य चालू होने के कारण एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया है। इसके बाद भी आठ जोड़ी ट्रेनें सीतापुर-पीलीभीत और पंाच जोड़ी मैलानी-गोंडा रूट पर संचालित होती हैं। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण जीआरपी को ट्रेनों की सुरक्षा को लेकर काफी दिक्कत होती हैं।
विज्ञापन
थाने के मुताबिक स्टाफ के पद नियत करने का प्रस्ताव जनवरी 2016 में भेजा जा चुका है। इससे पहले भी प्रस्ताव जा चुका है, लेकिन अब तक एसओ के पद को छोड़कर स्टॉफ के अन्य नियत पदों की बढ़ोतरी नहीं की गई है।
-राघवेंद्र प्रताप सिंह, एसओ जीआरपी
विज्ञापन
डेढ़ सौ किलोमीटर ट्रेनों की सुरक्षा की है जिम्मेदारी
लखीमपुर जीआरपी चौकी को महकमे ने थाने का दर्जा तो दे दिया, लेकिन एक दशक बाद भी थाने के स्टाफ का नियतन नहीं बदला गया। आज भी इस थाने के स्टाफ का नियतन चौकी के अनुरूप है, उसमें भी पदों के सापेक्ष जवानों की तैनाती नहीं है। जिससे यात्रियों और ट्रेनों की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है।
एक दशक पहले सीतापुर जीआरपी थाने की लखीमपुर चौकी हुआ करती थी। चौकी क्षेत्र में ओयल से लेकर बहराइच जिले की सीमा पर स्थित रेलवे स्टेशन मझरापूरब तक करीब 150 किलोमीटर की सुरक्षा का जिम्मा था। यहां पर एक एसआई, एक एचसी और 10 सिपाहियों के नियतन पद थे। इस रूट से लखनऊ से मैलानी, पीलीभीत, बरेली होते हुए मथुरा तक ट्रेनों का संचालन होता था। हालांकि उस समय ट्रेनों की संख्या काफी कम थीं, लेकिन बाद में यात्रियों की संख्या के साथ ट्रेनों की भी संख्या काफी बढ़ गई। लखीमपुर से पीलीभीत और मैलानी से गोंडा रेल प्रखंड पर घना जंगल होने के कारण ट्रेनों में लूटपाट की घटनाएं अधिक होती थीं। जिस पर जीआरपी महकमे ने वर्ष 2000 में लखीमपुर जीआरपी चौकी को सीतापुर से हटा दिया और इसे लखीमपुर जीआरपी थाना बनाया था। घने जंगलों से ट्रेनों और छोटी काशी से विख्यात गोला गोकर्णनाथ में होने वाली भीड़ को देखते हुए गोला और मैलानी में जीआरपी चौकी खोली गईं, लेकिन थाने के मुताबिक लखीमपुर में स्टाफ का नियतन नहीं बढ़ाया। आज भी थाना, चौकी के नियतन स्टॉफ पर चल रहा है। उसमें भी नियत पदों के मुताबिक जवान तैनात नहीं हैं।
विज्ञापन
22 रेलवे स्टेशन, पांच हैं हाल्ट
थाना जीआरपी लखीमपुर क्षेत्र में कुल 22 रेलवे स्टेशन और पांच हाल्ट हैं। ऐशबाग-सीतापुर के बीच अमान परिवर्तन का कार्य चालू होने के कारण एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया है। इसके बाद भी आठ जोड़ी ट्रेनें सीतापुर-पीलीभीत और पंाच जोड़ी मैलानी-गोंडा रूट पर संचालित होती हैं। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण जीआरपी को ट्रेनों की सुरक्षा को लेकर काफी दिक्कत होती हैं।
विज्ञापन
थाने के मुताबिक स्टाफ के पद नियत करने का प्रस्ताव जनवरी 2016 में भेजा जा चुका है। इससे पहले भी प्रस्ताव जा चुका है, लेकिन अब तक एसओ के पद को छोड़कर स्टॉफ के अन्य नियत पदों की बढ़ोतरी नहीं की गई है।
-राघवेंद्र प्रताप सिंह, एसओ जीआरपी