फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Increasing anger among people due to human-tiger conflict

Lakhimpur Kheri News: मानव-बाघ संघर्ष से लोगों में बढ़ रहा गुस्सा

Fri, 17 Nov 2023 12:23 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 17 Nov 2023 12:23 AM IST
विज्ञापन
Increasing anger among people due to human-tiger conflict
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में मानव-बाघ संघर्ष बड़ी चुनौती बन गई है। वन विभाग तमाम कोशिशों के बावजूद इसका समाधान नहीं निकाल पा रहा है। जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों की भी दिक्कतें बढ़ रही हैं। इससे जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है।
विज्ञापन

दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की ग्रंट नंबर तीन में बुधवार को बासुकपुर गांव आबादी से सटे गन्ने के खेत में छिपे बाघ ने नरेंद्र पर हमला कर उसे मार डाला। बाघ के हमलों से बचाव और रोकथाम के उपाय न करने पर वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। वन विभाग की टीम को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े ग्रामीणों ने युवक का शव नौ घंटे तक खेत से नहीं उठाने दिया।
विज्ञापन

12 सितंबर को भीरा रेंज की पल्हनापुर गांव निवासी जोखे को हमला कर बाघ ने मार डाला। 30 सितंबर को ग्रंट नंबर तीन में ही रोजी-रोटी कमाने निकले राममिलन पर हमला कर बाघ ने मार डाला। 17 अक्टूबर को निघासन-बेलरायां रेंज के गांव मझरा पूरब में खेत पर चारा लेने गए रामदुलारे की बाघ हमले में मौत हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

07 अक्तूबर को इसी रेंज के कठहुआ गांव में पशुओं के लिए चारा लेने गए ग्रामीण सुकई भार्गव पर बाघ ने हमला कर उसे मार दिया। एक साल के अंदर बाघ हमल में करीब 12 लोग अपनी जान गवां चुके हैं।
खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं लोग
जंगल के आसपास बसे लोग खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं। बाघ हमले के डर से लोग खेतों की ओर जाने से डर रहे हैं। जिससे उनकी खेती-बाड़ी चौपट हो रही है। बाघ जंगल से निकलकर इंसानी बस्तियों में घुसपैठ कर रहे हैं। इससे टकराव की स्थिति बढ़ रही है। विशेषज्ञों की मानें तो एक बाघ 15 से 20 वर्ग किलोमीटर में अपनी टेरीटरी बनाता है। दुधवा टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 2200 वर्ग किलोमीटर है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा विरल जंगल है। जहां बाघ अपनी टेरीटरी नहीं बना सकते, इसलिए उन्हें गन्ने के खेतों में ठिकाना बनाना पड़ रहा है।


मानव-बाघ संघर्ष की बढ़ रही घटनाएं वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती हैं। इस संघर्ष को रोकने के लिए लगातार चिंतन-मनन ही नहीं प्रयास भी हो रहे हैं। इसके कारणों का अध्ययन किया जा रहा है। वन विभाग इस समस्या के प्रति बेहद गंभीर है। इससे रोकने की हर संभव कोशिश की जा रही है। बाघ हमलों से बचाव के लिए जंगल से सटे गांव के लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
- ललित वर्मा, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed