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जंगल की आग से निपटने को इंतजाम नाकाफी
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 12 Mar 2015 06:04 PM IST
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जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले जंगलों में आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग के पास संसाधनों का टोटा है। जंगल में आग बुझाने के लिए वही पुराने और परंपरागत तरीके अपनाए जा रहे हैं जो अब से 50-60 साल पहले अपनाए जाते थे। आग से बचाव के लिए वन विभाग के पास अलग से न कोई स्टाफ है और न ही संसाधन। गर्मी की शुरुआत होते ही आग पर नियंत्रण के लिए वनविभाग एक कार्ययोजना बनाकर खानापूरी जरूर कर लेता है।
जिले में वन विभाग तीन प्रभागों उत्तर खीरी वन प्रभाग, दक्षिण खीरी वन प्रभाग और दुधवा नेशनल पार्क में विभक्त है। तीनों वन प्रभागों में कुल डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में घने जंगल हैं। जंगलों के बीच से निकलने वाले रास्तों पर आवाजाही के साथ जंगलों में इंसानों की दखलंदाजी के कारण गर्मी के मौसम में आग का खतरा बढ़ जाता है। वन विभाग आग से बचाव और आग लगने के बाद बुझाने के प्रबंध की योजना बनाता है।
डीएफओ, साउथ खीरी नीरज कुमार ने बताया कि गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। वन विभाग पहले से ही बचाव की तैयारी करता है। इस बार भी आग से निपटने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आग के खतरे से निपटने के लिए वनविभाग ने जंगल की निगरानी बढ़ा दी है।
जंगल में कैसे लगती है आग
-जंगल से गुजरने वाले रास्तों पर राहगीरों के बीड़ी, सिगरेट पीकर बिना बुझाए डालने से
-जंगल या जंगल के किनारे चरवाहों के आग जलाकर खाना बनाने से
-नई घास के लिए चरवाहों द्वारा सूखी घास और पत्तियों में आग लगाने से
-जंगल में अवैध कटान को छिपाने के लिए
-शिकार के उद्देश्य से शिकारी भी आग लगाते हैं
आग से बचाव को वनविभाग करता है यह इंतजाम
-फरवरी माह में फायर लाइन की कटाई का काम
-रोड साइड के दोनों ओर फायर लाइन की कटाई
-क्र्यू प्वांइट पर फायर वाचरों की तैनाती।
-जंगल के आस पास बसे गांव के लोगों को आग से बचाव के लिए जागरूक करना
कैसे बुझाते हैं जंगल की आग
-आग को झाड़ियों से पीट कर आग बुझाने का प्रयास
-आग फैलने की दिशा में सूखी पत्तियों को हटाकर आग फैलने से रोकना
-भीषण आग लगने पर नदियों और तालाबों से पानी डाल कर आग बुझाने का प्रयास
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जिले में वन विभाग तीन प्रभागों उत्तर खीरी वन प्रभाग, दक्षिण खीरी वन प्रभाग और दुधवा नेशनल पार्क में विभक्त है। तीनों वन प्रभागों में कुल डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में घने जंगल हैं। जंगलों के बीच से निकलने वाले रास्तों पर आवाजाही के साथ जंगलों में इंसानों की दखलंदाजी के कारण गर्मी के मौसम में आग का खतरा बढ़ जाता है। वन विभाग आग से बचाव और आग लगने के बाद बुझाने के प्रबंध की योजना बनाता है।
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डीएफओ, साउथ खीरी नीरज कुमार ने बताया कि गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। वन विभाग पहले से ही बचाव की तैयारी करता है। इस बार भी आग से निपटने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आग के खतरे से निपटने के लिए वनविभाग ने जंगल की निगरानी बढ़ा दी है।
जंगल में कैसे लगती है आग
-जंगल से गुजरने वाले रास्तों पर राहगीरों के बीड़ी, सिगरेट पीकर बिना बुझाए डालने से
-जंगल या जंगल के किनारे चरवाहों के आग जलाकर खाना बनाने से
-नई घास के लिए चरवाहों द्वारा सूखी घास और पत्तियों में आग लगाने से
-जंगल में अवैध कटान को छिपाने के लिए
-शिकार के उद्देश्य से शिकारी भी आग लगाते हैं
आग से बचाव को वनविभाग करता है यह इंतजाम
-फरवरी माह में फायर लाइन की कटाई का काम
-रोड साइड के दोनों ओर फायर लाइन की कटाई
-क्र्यू प्वांइट पर फायर वाचरों की तैनाती।
-जंगल के आस पास बसे गांव के लोगों को आग से बचाव के लिए जागरूक करना
कैसे बुझाते हैं जंगल की आग
-आग को झाड़ियों से पीट कर आग बुझाने का प्रयास
-आग फैलने की दिशा में सूखी पत्तियों को हटाकर आग फैलने से रोकना
-भीषण आग लगने पर नदियों और तालाबों से पानी डाल कर आग बुझाने का प्रयास