{"_id":"57e175334f1c1bd25ea82311","slug":"in-patients-suffering-from-health-workers-strike","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से मरीज हुए बेहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से मरीज हुए बेहाल
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 20 Sep 2016 11:49 PM IST
विज्ञापन
strike
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न बने पर्चे और न ही बंटीं दवाएं, वार्डों में तड़पते रहे मरीज
इमरजेंसी सेवाएं ठप रहने से जिला और महिला अस्पताल में हाहाकार
मांगें न माने जाने से नाराज स्वास्थ्य कर्मियों ने सोमवार तक सांकेतिक हड़ताल करने के बाद मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। इससे मंगलवार को जिला और महिला अस्पताल में पर्चा, दवा वितरण काउंटर और पैथॉलोजी में ताले लटकते रहे। फार्मासिस्ट, नर्स और लैब टेक्नीशियन की हड़ताल के कारण इमरजेंसी सेवाएं भी बंद रहीं। हालांकि डॉक्टरों ने वार्ड में भ्रमण कर मरीजों को देखा लेकिन दवाएं न मिलने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय आह्वान पर डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन, राजकीय नर्सेज संघ, राजकीय आप्टोमेट्रिस्ट संघ, राजकीय एलटी संघ, राजकीय शिक्षक संघ, राजकीय मलेरिया संघ और राजकीय फाइलेरिया संघ के बैनर तले तमाम कर्मचारियों ने मंगलवार को जिला अस्पताल में इकट्ठा होकर धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। इस दौरान संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष महंत सिंह ने इस हड़ताल के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया, उन्होंने कहा कि हम पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर सांकेतिक धरना प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन शासन ने कोई ध्यान न देकर हमें अनिश्चित कालीन हड़ताल करने के लिए मजबूर कर दिया है, जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक धरना चलता रहेगा। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की। धरने पर मोर्चा के मंत्री डॉ.आरके गुप्ता, एसके सिंह, आरके पांडे, रजनी मसीह, डॉ. एके कनौजिया, डॉ.अनिल कुुमार, डॉ.सज्जन गौड़, डॉ. प्रीति श्रीवास्तव, डॉ. सुनीता गुप्ता, डॉ. आरएस तिवारी सहित कई लोग मौजूद रहे।
ठुकरा दिया सीएमओ का आग्रह
हड़ताल के दौरान इमरजेंसी और पोस्टमार्टम भी बंद होने की सूचना पर सीएमओ डॉ.जावेद अहमद दोपहर 12.30 बजे प्रभारी सीएमएस आरके वर्मा के साथ कर्मचारी नेताओं से वार्ता करने के लिए धरना स्थल पर गए। सीएमओ ने धरना दे रहे लोगों को मानवता की दुहाई देकर इमरजेंसी और पोस्टमार्टम शुरू कराने का आग्रह किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने सीएमओ के आग्रह को ठुकरा दिया। हालांकि सीएमओ करीब आधा घंटे तक इमरजेंसी और पोस्टमार्टम शुरू कराने की कोशिश में लगे रहे, लेकिन पदाधिकारियों ने उनकी एक न सुनी
विज्ञापन
दवा न मिलने से वापस हुए मरीज
करीब पैंतीस किलोमीटर दूर कस्ता से महिला अस्पताल में दवा लेने आई गर्भवती रीमा देवी पत्नी सुरजीत कुमार ने बताया कि हड़ताल की जानकारी नहीं थी वरना इतनी दूर से नहीं आते। डॉक्टर को दिखाना था लेकिन पर्चा न बन पाने के कारण नहीं दिखवा सके।
धौरहरा तहसील के गांव खगियापुर निवासी अशोक शुक्ला ने बताया कि वह गर्भवती पत्नी रेनू शुक्ला को दिखाने के लिए महिला अस्पताल लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि दस बजे आ गए थे और जब पर्चा बनवाने पहुंचे तो मालूम हुआ कि हड़ताल चल रही है, जिससे वापस घर जाना पड़ा।
महिला डॉक्टरों ने देखे करीब दो सौ मरीज
हड़ताल के दौरान जिला अस्पताल में भले ही एक भी मरीज न देखा गया हो, लेकिन महिला अस्पताल में करीब दो सौ मरीज देखे गए। मंगलवार को डॉ.यामिनी बादल ने करीब 60, डॉ. नम्रता मिश्रा ने करीब 75 और डॉ. अंजली वर्मा ने करीब 60 मरीज देखे। वहीं स्टाफ नर्स के हड़ताल पर होने के बावजूद लेबर रूम में डॉ. मीनाक्षी ने प्रसव कराए।
इमरजेंसी के सामने तड़पता रहा बुखार पीड़ित युवक
शहर के मोहल्ला सरनापुरम में रह रहे गणेश तिवारी पुत्र राममपाल तिवारी को कुछ दिनों बुखार आ रहा था। मंगलवार की सुबह उसकी हालत बिगड़ जाने पर उसे 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया लेकिन यहां चल रही हड़ताल को देखकर एंबुलेंस कर्मी गणेश को इमरजेंसी कक्ष के सामने लिटा कर चले गए। इस दौरान गणेश की हालत और बिगड़ने लगी, जिस पर रामपाल और उसकी मां वहां मौजूद लोगों से अपने बेटे को बचा लेने की मिन्नते करने लगे लेकिन सभी ने हड़ताल बताकर कहीं और जाने का मशविरा देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। इस दौरान मेडिकल वार्ड में डॉ.आरएस मधौरिया मरीजों को देखते मिल गए। लोगों के बताने पर डॉ. मधौरिया ने पीड़ित को देखकर दवाएं दी, तब जाकर कहीं उसकी जान बच सकी।
जिले में ही नहीं पूर प्रदेश में हड़ताल चल रही है। हमने इमरजेंसी और पोस्टमार्टम सेवा को शुरू करने के लिए संगठन के लोगों से वार्ता की थी लेकिन बात नहीं मानी। शासन को इसकी सूचना देंगे।
-डॉ.जावेद अहमद, सीएमओ
विज्ञापन
इमरजेंसी सेवाएं ठप रहने से जिला और महिला अस्पताल में हाहाकार
मांगें न माने जाने से नाराज स्वास्थ्य कर्मियों ने सोमवार तक सांकेतिक हड़ताल करने के बाद मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। इससे मंगलवार को जिला और महिला अस्पताल में पर्चा, दवा वितरण काउंटर और पैथॉलोजी में ताले लटकते रहे। फार्मासिस्ट, नर्स और लैब टेक्नीशियन की हड़ताल के कारण इमरजेंसी सेवाएं भी बंद रहीं। हालांकि डॉक्टरों ने वार्ड में भ्रमण कर मरीजों को देखा लेकिन दवाएं न मिलने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय आह्वान पर डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन, राजकीय नर्सेज संघ, राजकीय आप्टोमेट्रिस्ट संघ, राजकीय एलटी संघ, राजकीय शिक्षक संघ, राजकीय मलेरिया संघ और राजकीय फाइलेरिया संघ के बैनर तले तमाम कर्मचारियों ने मंगलवार को जिला अस्पताल में इकट्ठा होकर धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। इस दौरान संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष महंत सिंह ने इस हड़ताल के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया, उन्होंने कहा कि हम पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर सांकेतिक धरना प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन शासन ने कोई ध्यान न देकर हमें अनिश्चित कालीन हड़ताल करने के लिए मजबूर कर दिया है, जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक धरना चलता रहेगा। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की। धरने पर मोर्चा के मंत्री डॉ.आरके गुप्ता, एसके सिंह, आरके पांडे, रजनी मसीह, डॉ. एके कनौजिया, डॉ.अनिल कुुमार, डॉ.सज्जन गौड़, डॉ. प्रीति श्रीवास्तव, डॉ. सुनीता गुप्ता, डॉ. आरएस तिवारी सहित कई लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
ठुकरा दिया सीएमओ का आग्रह
हड़ताल के दौरान इमरजेंसी और पोस्टमार्टम भी बंद होने की सूचना पर सीएमओ डॉ.जावेद अहमद दोपहर 12.30 बजे प्रभारी सीएमएस आरके वर्मा के साथ कर्मचारी नेताओं से वार्ता करने के लिए धरना स्थल पर गए। सीएमओ ने धरना दे रहे लोगों को मानवता की दुहाई देकर इमरजेंसी और पोस्टमार्टम शुरू कराने का आग्रह किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने सीएमओ के आग्रह को ठुकरा दिया। हालांकि सीएमओ करीब आधा घंटे तक इमरजेंसी और पोस्टमार्टम शुरू कराने की कोशिश में लगे रहे, लेकिन पदाधिकारियों ने उनकी एक न सुनी
विज्ञापन
दवा न मिलने से वापस हुए मरीज
करीब पैंतीस किलोमीटर दूर कस्ता से महिला अस्पताल में दवा लेने आई गर्भवती रीमा देवी पत्नी सुरजीत कुमार ने बताया कि हड़ताल की जानकारी नहीं थी वरना इतनी दूर से नहीं आते। डॉक्टर को दिखाना था लेकिन पर्चा न बन पाने के कारण नहीं दिखवा सके।
धौरहरा तहसील के गांव खगियापुर निवासी अशोक शुक्ला ने बताया कि वह गर्भवती पत्नी रेनू शुक्ला को दिखाने के लिए महिला अस्पताल लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि दस बजे आ गए थे और जब पर्चा बनवाने पहुंचे तो मालूम हुआ कि हड़ताल चल रही है, जिससे वापस घर जाना पड़ा।
महिला डॉक्टरों ने देखे करीब दो सौ मरीज
हड़ताल के दौरान जिला अस्पताल में भले ही एक भी मरीज न देखा गया हो, लेकिन महिला अस्पताल में करीब दो सौ मरीज देखे गए। मंगलवार को डॉ.यामिनी बादल ने करीब 60, डॉ. नम्रता मिश्रा ने करीब 75 और डॉ. अंजली वर्मा ने करीब 60 मरीज देखे। वहीं स्टाफ नर्स के हड़ताल पर होने के बावजूद लेबर रूम में डॉ. मीनाक्षी ने प्रसव कराए।
इमरजेंसी के सामने तड़पता रहा बुखार पीड़ित युवक
शहर के मोहल्ला सरनापुरम में रह रहे गणेश तिवारी पुत्र राममपाल तिवारी को कुछ दिनों बुखार आ रहा था। मंगलवार की सुबह उसकी हालत बिगड़ जाने पर उसे 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया लेकिन यहां चल रही हड़ताल को देखकर एंबुलेंस कर्मी गणेश को इमरजेंसी कक्ष के सामने लिटा कर चले गए। इस दौरान गणेश की हालत और बिगड़ने लगी, जिस पर रामपाल और उसकी मां वहां मौजूद लोगों से अपने बेटे को बचा लेने की मिन्नते करने लगे लेकिन सभी ने हड़ताल बताकर कहीं और जाने का मशविरा देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। इस दौरान मेडिकल वार्ड में डॉ.आरएस मधौरिया मरीजों को देखते मिल गए। लोगों के बताने पर डॉ. मधौरिया ने पीड़ित को देखकर दवाएं दी, तब जाकर कहीं उसकी जान बच सकी।
जिले में ही नहीं पूर प्रदेश में हड़ताल चल रही है। हमने इमरजेंसी और पोस्टमार्टम सेवा को शुरू करने के लिए संगठन के लोगों से वार्ता की थी लेकिन बात नहीं मानी। शासन को इसकी सूचना देंगे।
-डॉ.जावेद अहमद, सीएमओ