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मंझरी में एक घर और पेड़ नदी में समाया
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शारदा के उफनाने के बाद अपना घर तोड़ता एक ग्रामीण।
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आंखों के सामने आशियाना उजड़ते देख सहमे ग्रामीण
महेवागंज। बारिश में शारदा नदी उफना चली है। निघासन और सदर तहसील से जुड़े मंझरी अहिराना गांव के पश्चिम में नदी ने कटान शुरू कर दिया है। नदी की धार तेजी से आबादी की ओर बढ़ रही है। इससे भूमि और घरों का कटान शुरू हो गया है।
बुधवार को अहिराना (मंझरी) गांव निवासी राजेश कुमार का घर नदी में समा गया। लाल बच्चन के घर के बाहर लगा बड़ा पाकड़ का पेड़ भी नदी में समा गया है। श्रीकांत समेत कई लोगों के घर नदी के निशाने पर हैं। नदी की विनाशलीला देख ग्रामीणों में अफरातफरी है। कटान के डर से अधिकांश लोग गांव से पलायन करने को मजबूर हैं, तो कई खुद ही अपना घर तोड़कर मलबा, सरिया, दरवाजे, चौखट, खिड़की निकाल रहे हैं। यहां बता दें कि पिछले वर्ष भी नदी ने कहर बरपाया था। दो दर्जन से ज्यादा कच्चे-पक्के मकान नदी में समा गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि शासन-प्रशासन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाता।
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महेवागंज। बारिश में शारदा नदी उफना चली है। निघासन और सदर तहसील से जुड़े मंझरी अहिराना गांव के पश्चिम में नदी ने कटान शुरू कर दिया है। नदी की धार तेजी से आबादी की ओर बढ़ रही है। इससे भूमि और घरों का कटान शुरू हो गया है।
बुधवार को अहिराना (मंझरी) गांव निवासी राजेश कुमार का घर नदी में समा गया। लाल बच्चन के घर के बाहर लगा बड़ा पाकड़ का पेड़ भी नदी में समा गया है। श्रीकांत समेत कई लोगों के घर नदी के निशाने पर हैं। नदी की विनाशलीला देख ग्रामीणों में अफरातफरी है। कटान के डर से अधिकांश लोग गांव से पलायन करने को मजबूर हैं, तो कई खुद ही अपना घर तोड़कर मलबा, सरिया, दरवाजे, चौखट, खिड़की निकाल रहे हैं। यहां बता दें कि पिछले वर्ष भी नदी ने कहर बरपाया था। दो दर्जन से ज्यादा कच्चे-पक्के मकान नदी में समा गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि शासन-प्रशासन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाता।
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