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Lakhimpur Kheri News: महेशपुर क्षेत्र में बाघ के साथ अब हाथियों की भी दहशत

Wed, 04 Dec 2024 11:29 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 04 Dec 2024 11:29 AM IST
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In Maheshpur area, along with tigers, there is also fear of elephants
समूह में गन्ने की छिलाई करते किसान। संवाद
गोला गोकर्णनाथ/ममरी। मोहम्मदी महेशपुर रेंज में सैकड़ों गांव बाघ से प्रभावित हैं। अब हाथियों की आफत भी किसानों के सिर आ पड़ी है। दहशतजदा किसान पर्ची होते हुए भी खेतों में जाकर गन्ना छिलाई करने की हिम्मत नहीं उठा पा रहे हैं।
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मोहम्मदी महेशपुर रेंज में कठिना नदी के आसपास का क्षेत्र एवं देवीपुर, महेशपुर, अयोध्यापुर, छेदीपुर, भदैंया, अशर्फी गंज, सुंदरपुर, पसियापुर, साहिबगंज, बुंदेली नानकार, इमलिया मूडा जवाहर, मूडा अस्सी, बघमरा सहित सैकड़ों गांव बाघ से प्रभावित हैं। यहां के किसान बाघ की दहशत में खेतों की ओर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। हजारों एकड़ गन्ने की फसल छिलाई न होने सूखने के कगार पर है।
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मैलानी जंगल से कठिना नदी पार करके जंगली हाथियों का झुंड देवीपुर बीट जंगल में आ पहुंचा है। इन हाथियों ने क्षेत्र में शंकरपुर, परसेहरा और मुल्लापुर क्षेत्र के खेतों में उत्पात मचा कर गन्ने की फसल तहस-नहस कर डाली।
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इधर, वन विभाग महेशपुर रेंज में इको टूरिज्म पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है, वहीं वन्यजीवों से मानव संघर्ष की घटनाओं पर रोक नहीं लग रही है। पिछले कुछ वर्षों में एक दर्जन से अधिक लोग जान गवां चुके हैं या घायल हो चुके हैं। वन विभाग के अधिकारी महेशपुर रेंज में 10 से अधिक बाघ मौजूद होने की बात कह रहे हैं, वही जिस तरह से हमले हो रहे हैं उस दृष्टि से क्षेत्र के लोग इनकी संख्या दो दर्जन से अधिक बता रहे हैं।

बाघ कई लोगों की ले चुका है जान
ममरी। दक्षिणी खीरी वन प्रभाग की मोहम्मदी महेशपुर वन रेंज क्षेत्र में पिछले सात सालों से बाघों की दहशत है। इस अवधि में क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में 12 लोगों की बाघ के हमले में मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इतनी घटनाएं होने के बाद भी विभागीय अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।



बाघों को शीघ्र पकड़वाया जाए
महेशपुर वन रेंज देवीपुर बीट के गावों में हाथियों के आ जाने से गन्ना किसान परेशान हैं। गन्ने की फसल को हाथी बर्बाद कर रहे हैं। एक तो बाघ के डर से किसान अपने खेतों में काम नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी तरफ हाथियों का हमला जिससे गन्ने की फसल बर्बाद हो रही है। इससे किसान आक्रोशित हो रहे हैं। जब तक बाघ पकड़ा न जाए तब तक पकड़ने की कार्यवाही निरंतर जारी रहनी चाहिए। - अंजनी कुमार दीक्षित, जिला अध्यक्ष राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन




मजदूरी हो गई महंगी, मजदूर कर रहे पलायन
वन विभाग की उदासीनता और वनों के अंदर हो रहे वन कटान से बाघ जंगलों से निकलकर गन्ना के खेतों में छिप रहे हैं। जिससे पूरा क्षेत्र बाघों का ठिकाना बन चुका है। मजदूर जिले से बाहर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मेरठ, नोयडा, गाजियाबाद, हरिद्वार जैसे जिलों में काम करने चले जाते हैं इससे मजदूरी अधिक बढ़ गई है। - पटेल श्रीकृष्ण वर्मा





महेशपुर रेंज में 10 से अधिक बाघ मौजूद हैं। करीब पांच नेपाली हाथियों का झुंड भी आ गया है। मानव एवं वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं रोकने और बाघ पकड़वाने की कोशिश लगातार जारी है। हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। - संजय बिस्वाल, डीएफओ

समूह में गन्ने की छिलाई करते किसान। संवाद

समूह में गन्ने की छिलाई करते किसान। संवाद

समूह में गन्ने की छिलाई करते किसान। संवाद

समूह में गन्ने की छिलाई करते किसान। संवाद

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