Lakhimpur Kheri: सीएमओ बोले- शिशु को सुरक्षित रखने में आशा संगिनी की अहम भूमिका, ऐसे करें नवजातों की देखभाल
अमर उजाला और जॉनसन्स बेबी के संयुक्त कार्यक्रम में सीएमओ ने आशा संगिनियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिशु को सुरक्षित रखने में मां के बाद आशा संगिनी का अहम रोल होता है। जनपद में नवजात शिशु मृत्यु दर कम करने में आशाओं का विशेष योगदान है।
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लखीमपुर खीरी में अमर उजाला और जॉनसन्स बेबी के संयुक्त तत्वावधान में शहर के एक पैलेस में सोमवार को नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए 'जॉनसन्स बेबी बेस्ट पहले पल से' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता समेत अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
सीएमओ ने कार्यक्रम में आशा संगिनियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिशु को सुरक्षित रखने में मां के बाद आशा संगिनी का अहम रोल होता है। जनपद में नवजात शिशु मृत्यु दर कम करने में आशाओं का विशेष योगदान है। आशा वर्कर स्वास्थ्य विभाग अहम कड़ी हैं। बहनों की ही मेहनत का नतीजा है कि पिछले कई साल की अपेक्षा टीकाकरण में पांच प्रतिशत वृद्धि हुई है।
कार्यक्रम में मौजूद आशा कार्यकर्ता।
जिले में छह से 26 मई तक यानी 21 दिन सर्वे कर 30 प्रतिशत आभा आईडी बनाकर जनपद को प्रदेश में दूसरे नंबर पर लेकर आई हैं। इस मौके पर जॉनसन्स बेबी के प्रतिनिधि संदीप जायसवाल ने कहा कि नवजात शिशुओं की त्वचा नाजुक होती है। कंपनी ने बच्चों की फूल सी त्वचा के लिए तेल, साबुन, मॉइस्चराइजर क्रीम आदि उत्पाद बनाए हैं।
बच्चे की मालिश अन्य तेलों से करने पर त्वचा प्रभावित होने का डर रहता है, लेकिन जॉन्संस बेबी तेल बच्चे की त्वचा के अंदर तक जाकर हड्डियों को भी मजबूत करता है। संचालक डिंपल सिंह ने कहा कि मातृ शक्ति को ताकत देने में आशाएं मजबूत कड़ी हैं।
एलईडी स्क्रीन के माध्यम से कंपनी के उत्पादों की गुणवत्ता व फायदों के बारे में बताया। कार्यक्रम के दौरान आशाओं को जॉनसन्स बेबी किट दी गई। कार्यक्रम में एसीएमओ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता, एसीएमओ डॉ. प्रमोद कुमार वर्मा समेत करीब 300 से अधिक आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
हल्के हाथों से करनी चाहिए मालिश
जिला महिला अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा गुप्ता ने कहा कि बच्चों को मालिश हल्के हाथों से करनी चाहिए। बच्चों की त्वचा बहुत ही नाजुक होती है। ऐसे में अगर रगड़कर मालिश करते हैं तो बच्चों को दिक्कत हो सकती है। उन्होंने कहा कि जन्म के छह माह तक बच्चों को स्तनपान कराना जरूरी है। नवजात के लिए मां का दूध अमृत के समान होता है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुप्रिया मिश्रा ने कहा कि मालिश से बच्चे और मां के बीच जुड़ाव पैदा होता है। मालिश से बच्चों कि मांसपेशियां मजबूत होती हैं। बच्चा अच्छे से खेलता है और उसको अच्छी नींद आती है। मालिश हमेशा आराम से करनी चाहिए। कभी-कभी जोर से मालिश करने पर बच्चों को समस्या हो जाती है।