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Lakhimpur Kheri News: तेजी से घट-बढ़ रहा है वजन तो हो सकता है थायराइड
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अस्पताल में मरीज देखते डॉक्टर
लखीमपुर खीरी। थकान, अवसाद और सांस फूलने जैसे लक्षणों से संबंधित हर 10 मरीज में तीन को थायराइड की शिकायत है। लोगों को पता तक नहीं चलता और यह बीमारी शरीर में चुपके से दस्तक दे देती है। डॉक्टर इसे गर्दन के निचले हिस्से में स्थित ग्लैंड के जरिए निकलने वाले हार्मोन के असंतुलित होने को वजह मानते हैं। यह किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। गर्भवती महिलाओं को इससे सबसे ज्यादा खतरा रहता है। जिला व महिला अस्पताल में इस बीमारी की जांच के इंतजाम नहीं हैं।
जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. आईके राम चंदानी बताते हैं कि ओपीडी में आने वाले मरीजों की लक्षण के आधार पर जांच कराने पर तीन से चार मरीजों में थायराइड की बीमारी मिलती है। गर्दन की सांस नली के पास तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जिससे निकलने होने वाले हार्मोन के असंतुलन से थायराइड हो जाता है। इससे गर्दन पर सूजन, वजन बढ़ना, नींद ज्यादा आना, याददाश्त कमजोर होने के लक्षण मिलते हैं।
खासकर महिलाओं में इसकी समस्या ज्यादा मिलती है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से बचने के लिए 30 साल के बाद थायराइड की जांच कराना शुरू कर देना चाहिए और नियमित रूप से हर पांच साल बाद जांच कराते रहें।
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गर्भस्थ शिशु का विकास होता है प्रभावित
24 एलकेएच 15
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. ज्योति मेहरोत्रा ने बताया कि गर्भधारण के समय हार्मोंस की गड़बड़ी से थायराइड होने की आशंका बढ़ जाती है। इसका मुख्य कारण आयोडीन की कमी है। इसकी वजह से गर्भस्थ शिशु का विकास प्रभावित होने के साथ गर्भपात का खतरा रहता है।
दो प्रकार का होता है यह रोग
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरएस मधौरिया बताते हैं कि थायराइड रोग दो प्रकार का होता है। हायपर थायराइडिज्म और हाइपो थयराइडिज्म। हाइपर में थायराइड हार्मोन अधिक मात्रा में बनने लगता है। इसमें टी3 और टी 4 का स्तर बढ़ने एवं टीएसएच का स्तर घटने लगता है। जबकि थायराइड के दूसरे प्रकार हाइपो थायराइडिज्म में हार्मोन कम बनने लगता है और टी 3 एवं टी 4 का सीरम लेवल घटने और टीएसएच का स्तर बढ़ने लगता है।
लक्षण- वजन कम होना और बढ़ना, घबराहट, थकान, सांस फूलना, कम नींद आना, बालों का झड़ना, अवसाद, त्वचा का रूखा हो जाना।
बचाव
लंबाई के अनुसार वजन का संतुलन बनाए रखने के लिए फाइबर युक्त और कम बस वाला आहार लें।
शरीरिक श्रम अवश्य करते रहें।
तनाव थायराइड विकारों को बढ़ाता है। इसलिए तनाव से बचें।
तले हुए भोजन से परहेज करें। ऐसा भोजन करने से दवा का असर कम हो जाता है।
अधिक चीनी का सेवन करने से बचें।
कॉफी में मौजूद एपिनेफ्रीन और नोरेपिनेफ्रीन थायराइड को बढ़ावा देता है।
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जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. आईके राम चंदानी बताते हैं कि ओपीडी में आने वाले मरीजों की लक्षण के आधार पर जांच कराने पर तीन से चार मरीजों में थायराइड की बीमारी मिलती है। गर्दन की सांस नली के पास तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जिससे निकलने होने वाले हार्मोन के असंतुलन से थायराइड हो जाता है। इससे गर्दन पर सूजन, वजन बढ़ना, नींद ज्यादा आना, याददाश्त कमजोर होने के लक्षण मिलते हैं।
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खासकर महिलाओं में इसकी समस्या ज्यादा मिलती है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से बचने के लिए 30 साल के बाद थायराइड की जांच कराना शुरू कर देना चाहिए और नियमित रूप से हर पांच साल बाद जांच कराते रहें।
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गर्भस्थ शिशु का विकास होता है प्रभावित
24 एलकेएच 15
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. ज्योति मेहरोत्रा ने बताया कि गर्भधारण के समय हार्मोंस की गड़बड़ी से थायराइड होने की आशंका बढ़ जाती है। इसका मुख्य कारण आयोडीन की कमी है। इसकी वजह से गर्भस्थ शिशु का विकास प्रभावित होने के साथ गर्भपात का खतरा रहता है।
दो प्रकार का होता है यह रोग
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरएस मधौरिया बताते हैं कि थायराइड रोग दो प्रकार का होता है। हायपर थायराइडिज्म और हाइपो थयराइडिज्म। हाइपर में थायराइड हार्मोन अधिक मात्रा में बनने लगता है। इसमें टी3 और टी 4 का स्तर बढ़ने एवं टीएसएच का स्तर घटने लगता है। जबकि थायराइड के दूसरे प्रकार हाइपो थायराइडिज्म में हार्मोन कम बनने लगता है और टी 3 एवं टी 4 का सीरम लेवल घटने और टीएसएच का स्तर बढ़ने लगता है।
लक्षण- वजन कम होना और बढ़ना, घबराहट, थकान, सांस फूलना, कम नींद आना, बालों का झड़ना, अवसाद, त्वचा का रूखा हो जाना।
बचाव
लंबाई के अनुसार वजन का संतुलन बनाए रखने के लिए फाइबर युक्त और कम बस वाला आहार लें।
शरीरिक श्रम अवश्य करते रहें।
तनाव थायराइड विकारों को बढ़ाता है। इसलिए तनाव से बचें।
तले हुए भोजन से परहेज करें। ऐसा भोजन करने से दवा का असर कम हो जाता है।
अधिक चीनी का सेवन करने से बचें।
कॉफी में मौजूद एपिनेफ्रीन और नोरेपिनेफ्रीन थायराइड को बढ़ावा देता है।