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सिल्ट साफ हो तो पता चले सही स्तर
अमर उजाला ब्यूरो पलियाकलां (लखीमपुर)।
Updated Thu, 06 Jul 2017 11:45 PM IST
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बाढ़
- फोटो : अमर उजाला
खतरे के निशान से नीचे बह रही शारदा मापन बिंदु बता रह खतरे से ऊपर
सिल्ट सफाई में कभी नहीं दिखाई संबंधितों ने दिलचस्पी
शारदा नदी में जल स्तर मापने के लिए जिस मापन बिंदु से लोगों को बाढ़ के खतरे के प्रति आगाह कराया जाता है असल में वह सही नाप देता ही नहीं है। पुराने रेलवे पुल का एक स्पर के पिलर के पास दशकों से भयानक सिल्ट जमा होने के कारण ये हालत बने है। बृहस्पतिवार को यह मापन बिंदु नदी को खतरे के निशान से 1.4 मीटर ऊपर बहना दिखा रहा है जबकि यदि असलियत में यदि नदी इतना ऊपर बहने लगे तो त्राहि-त्राहि मच जाएगी। आश्चर्यजनक यह है कि विभाग सब जानते हुए भी सिल्ट साफ कराने को पुख्ता कार्रवाई नहीं कर रहा।
शारदा नदी पर बना मापन बिंदु अब सटीक नहीं रहा। इसके सटीक न होने के पीछे बाढ़ और कटान की जिम्मेदार सिल्ट की सबसे बड़ी भूमिका निभा रही है। मापने वाले पिलर के पास भयानक सिल्ट है और इसकी वजह से नाप सही नहीं हो पा रही है क्योंकि सिल्ट खतरे के निशान के पास आ पहुँची है और इस वजह से नदी खतरे के निशान खतरे का निशान 153.620 के आसपास बहती रहती है और ज्यादा पानी आने पर यह खतरे के निशान से एक एक मीटर ऊपर चली जाती है। बृहस्पतिवार को भी इस माप से 154. 660 है जो खतरे के निशान से करीब 1.4 मीटर ऊपर है जो काफी अधिक है। सिल्ट जमा होने से पहले इतने अधिक पानी पर इलाके में त्राहि त्राहि मच जाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। खास बात यह है कि इसी सारे अंदाज और राहत तय होने के बाद भी प्रशासन ने यहां सिल्ट सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की। दशकों से यहाँ सिल्ट जमा है और प्रशासन इसको साफ नहीं करा रहा है। जिसके चलते खतरे की सही माप पता नहीं चल पा रही है और सटीक माप पता न होने से आसपास के ग्रामीणों में जरा सा पानी बढ़ने पर आये दिन भय फैलता रहता है। सिल्ट सफाई से जहां सही माप हो सकती है वहीं बाढ़ और कटान के खतरे को भी टाला जा सकता है।
सिल्ट मापक स्थल सिल्ट जमा होने के कारण सही माप नहीं बता पा रहा है, उनकी माप के मुताबिक काफी खतरा है जबकि हकीकत में बाढ़ के हालात नहीं हैं। इसकी सफाई के लिए पत्राचार किया जा चुका है।
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- इन्द्रकांत द्विवेदी, एसडीएम पलियाकलां- लखीमपुर खीरी
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सिल्ट सफाई में कभी नहीं दिखाई संबंधितों ने दिलचस्पी
शारदा नदी में जल स्तर मापने के लिए जिस मापन बिंदु से लोगों को बाढ़ के खतरे के प्रति आगाह कराया जाता है असल में वह सही नाप देता ही नहीं है। पुराने रेलवे पुल का एक स्पर के पिलर के पास दशकों से भयानक सिल्ट जमा होने के कारण ये हालत बने है। बृहस्पतिवार को यह मापन बिंदु नदी को खतरे के निशान से 1.4 मीटर ऊपर बहना दिखा रहा है जबकि यदि असलियत में यदि नदी इतना ऊपर बहने लगे तो त्राहि-त्राहि मच जाएगी। आश्चर्यजनक यह है कि विभाग सब जानते हुए भी सिल्ट साफ कराने को पुख्ता कार्रवाई नहीं कर रहा।
शारदा नदी पर बना मापन बिंदु अब सटीक नहीं रहा। इसके सटीक न होने के पीछे बाढ़ और कटान की जिम्मेदार सिल्ट की सबसे बड़ी भूमिका निभा रही है। मापने वाले पिलर के पास भयानक सिल्ट है और इसकी वजह से नाप सही नहीं हो पा रही है क्योंकि सिल्ट खतरे के निशान के पास आ पहुँची है और इस वजह से नदी खतरे के निशान खतरे का निशान 153.620 के आसपास बहती रहती है और ज्यादा पानी आने पर यह खतरे के निशान से एक एक मीटर ऊपर चली जाती है। बृहस्पतिवार को भी इस माप से 154. 660 है जो खतरे के निशान से करीब 1.4 मीटर ऊपर है जो काफी अधिक है। सिल्ट जमा होने से पहले इतने अधिक पानी पर इलाके में त्राहि त्राहि मच जाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। खास बात यह है कि इसी सारे अंदाज और राहत तय होने के बाद भी प्रशासन ने यहां सिल्ट सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की। दशकों से यहाँ सिल्ट जमा है और प्रशासन इसको साफ नहीं करा रहा है। जिसके चलते खतरे की सही माप पता नहीं चल पा रही है और सटीक माप पता न होने से आसपास के ग्रामीणों में जरा सा पानी बढ़ने पर आये दिन भय फैलता रहता है। सिल्ट सफाई से जहां सही माप हो सकती है वहीं बाढ़ और कटान के खतरे को भी टाला जा सकता है।
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सिल्ट मापक स्थल सिल्ट जमा होने के कारण सही माप नहीं बता पा रहा है, उनकी माप के मुताबिक काफी खतरा है जबकि हकीकत में बाढ़ के हालात नहीं हैं। इसकी सफाई के लिए पत्राचार किया जा चुका है।
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- इन्द्रकांत द्विवेदी, एसडीएम पलियाकलां- लखीमपुर खीरी