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‘चरित्रवान व्यक्ति ही करता है उन्नति’
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 05 Feb 2015 06:53 PM IST
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पुरानी गल्ला मंडी स्थित श्री श्याम मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा गुरुवार को भी जारी रही। कथा व्यास स्नेह विहारी ने कहा कि चरित्रवान व्यक्ति जीवन में उन्नति के शिखर को प्राप्त करता है। सद्कर्मों और सद्विचारों का दान जीवन में अवश्य करना चाहिए। कथा के चौथे दिन उन्होंने श्रद्धालुओं से सद्कर्माें और सद्प्रवृत्तियों को अपनाने के लिए कहा।
कथा व्यास स्नेह विहारी ने कहा कि सत्यवादियों से जिनकी प्रीत होती है, जिनका चरित्र अच्छा है उनकी जीत होती है। उन्होंने श्रीराम-रावण युद्ध में श्रीराम की जीत को बुरे चरित्र पर अच्छे चरित्र की जीत बताया और श्रद्धालुओं से जीवन में सदा सन्मार्ग पर चलने की सलाह दी। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को सुख और दुख में समभाव बनाए रखने और हर हाल में प्रभु सुमिरन कर विपरीत परिस्थितियों में विचलित न होने का महामंत्र दिया। उन्होंने कहा कि प्रभु का सुमिरन बुरे वक्त को पलक झपकते ही अच्छे वक्त में बदल देता है।
उन्होंने सुख और दुख को जीवन के दो चक्र बताते हुए दुखों से प्रेरणा लेकर आत्मबल बढ़ाने और आत्मचिंतन कर अपनी कमियों को दूर करने का मार्ग दर्शाया। उन्होंने दान-पुण्य के महत्व को बताते हुए कहा कि राजा बलि ने दान से प्रभु का सदैव के लिए सानिध्य प्राप्त किया और अपने जीवन को धन्य बनाया।
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कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की झांकी भी प्रस्तुत की गई। जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने मंदिर को गुब्बारों और झालरों से सजाकर भव्य झांकी प्रस्तुत की। इस मौके पर मौजूद बच्चों और महिलाओं ने नृत्य उत्सव को जीवंत बनाया। इस मौके पर रजत साहनी, पप्पू शर्मा, मोहन अग्रवाल, संदीप अग्रवाल, विक्की अग्रवाल, महेश अग्रवाल, पंकज तायल आदि मौजूद रहे।
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कथा व्यास स्नेह विहारी ने कहा कि सत्यवादियों से जिनकी प्रीत होती है, जिनका चरित्र अच्छा है उनकी जीत होती है। उन्होंने श्रीराम-रावण युद्ध में श्रीराम की जीत को बुरे चरित्र पर अच्छे चरित्र की जीत बताया और श्रद्धालुओं से जीवन में सदा सन्मार्ग पर चलने की सलाह दी। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को सुख और दुख में समभाव बनाए रखने और हर हाल में प्रभु सुमिरन कर विपरीत परिस्थितियों में विचलित न होने का महामंत्र दिया। उन्होंने कहा कि प्रभु का सुमिरन बुरे वक्त को पलक झपकते ही अच्छे वक्त में बदल देता है।
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उन्होंने सुख और दुख को जीवन के दो चक्र बताते हुए दुखों से प्रेरणा लेकर आत्मबल बढ़ाने और आत्मचिंतन कर अपनी कमियों को दूर करने का मार्ग दर्शाया। उन्होंने दान-पुण्य के महत्व को बताते हुए कहा कि राजा बलि ने दान से प्रभु का सदैव के लिए सानिध्य प्राप्त किया और अपने जीवन को धन्य बनाया।
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कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की झांकी भी प्रस्तुत की गई। जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने मंदिर को गुब्बारों और झालरों से सजाकर भव्य झांकी प्रस्तुत की। इस मौके पर मौजूद बच्चों और महिलाओं ने नृत्य उत्सव को जीवंत बनाया। इस मौके पर रजत साहनी, पप्पू शर्मा, मोहन अग्रवाल, संदीप अग्रवाल, विक्की अग्रवाल, महेश अग्रवाल, पंकज तायल आदि मौजूद रहे।