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Lakhimpur Kheri News: पेश नहीं हुए सबूत तो जुर्म इकबाल पर निपटा मामला
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संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। सरकारी नौकरी के दौरान हजारों रुपये का घोटाला करने के मामले में 36 साल बाद आरोपी ने अदालत में गुनाह कबूल किया।पुलिस के सबूत न जुटा पाने और पैरवी न करने के कारण अदालत ने उसे दिन भर अदालती हिरासत में रहने और 21 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
36 साल पहले वर्ष 1988 में कोतवाली सदर के ग्राम हसनापुर निवासी अशोक कुमार वर्मा के खिलाफ गबन का मामला दर्ज किया गया था। जांच के बाद पुलिस ने धारा 409 के तहत उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन लापरवाही के चलते यह फाइल सबूत के अभाव में घिसटती रही। आरोपी धीरे-धीरे रिटायरमेंट की उम्र भी पार कर गए, लेकिन आरोपी के खिलाफ सरकारी अमले ने गवाही देना भी मुनासिब नहीं समझा।
पुरानी फाइलें एक अदालत से दूसरी अदालत तबादला होती रहीं। आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत और गवाह नहीं पेश हो सके। यह मामला मई 2024 में एसीजेएम एफटीसी अदालत से तबादला होकर सेंकेंड एसीजेएम प्रदीप कुशवाहा की अदालत में पहुंचा तो अभियोजन संयुक्त निदेशक दिलीप श्रीवास्तव ने लिखापढ़ी शुरू की।
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इसी बीच आरोपी अशोक वर्मा की ओर से पुरानी फाइल का हवाला देते हुए जुर्म इकबाल कर लिया गया। इस पर अदालत ने उसे दिन भर अदालती हिरासत में रहने और 21 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
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लखीमपुर खीरी। सरकारी नौकरी के दौरान हजारों रुपये का घोटाला करने के मामले में 36 साल बाद आरोपी ने अदालत में गुनाह कबूल किया।पुलिस के सबूत न जुटा पाने और पैरवी न करने के कारण अदालत ने उसे दिन भर अदालती हिरासत में रहने और 21 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
36 साल पहले वर्ष 1988 में कोतवाली सदर के ग्राम हसनापुर निवासी अशोक कुमार वर्मा के खिलाफ गबन का मामला दर्ज किया गया था। जांच के बाद पुलिस ने धारा 409 के तहत उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन लापरवाही के चलते यह फाइल सबूत के अभाव में घिसटती रही। आरोपी धीरे-धीरे रिटायरमेंट की उम्र भी पार कर गए, लेकिन आरोपी के खिलाफ सरकारी अमले ने गवाही देना भी मुनासिब नहीं समझा।
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पुरानी फाइलें एक अदालत से दूसरी अदालत तबादला होती रहीं। आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत और गवाह नहीं पेश हो सके। यह मामला मई 2024 में एसीजेएम एफटीसी अदालत से तबादला होकर सेंकेंड एसीजेएम प्रदीप कुशवाहा की अदालत में पहुंचा तो अभियोजन संयुक्त निदेशक दिलीप श्रीवास्तव ने लिखापढ़ी शुरू की।
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इसी बीच आरोपी अशोक वर्मा की ओर से पुरानी फाइल का हवाला देते हुए जुर्म इकबाल कर लिया गया। इस पर अदालत ने उसे दिन भर अदालती हिरासत में रहने और 21 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।