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Lakhimpur Kheri News: तीन दिन स्कूल नहीं गया छात्र तो घर पहुंचेगी बुलावा टोली
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लखीमपुर खीरी। परिषदीय स्कूलों में बच्चों की 75 प्रतिशत उपस्थिति बनाए रखने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग गंभीर हो गया है। अब तीन दिन लगातार अनुपस्थित रहने वाले बच्चाें को चिह्नित कर स्कूल की बुलावा टोली उनके घर जाएगी।
शासन स्तर से इस बार कक्षा एक में प्रवेश के लिए बच्चे की उम्र छह वर्ष निर्धारित की गई है। इससे स्कूलों में बच्चों के नामांकन की संख्या में कमी आई है। वहीं, विभाग का दावा है कि उम्र की सीमा तय होने से नामांकन पर किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। हाल ही में महानिदेशक स्कूल एवं शिक्षा कंचन वर्मा ने आदेश जारी किया है।
आदेश में स्पष्ट है कि पंजीकृत छात्र-छात्राएं यदि तीन से ज्यादा अनुपस्थित रहते हैं तो उनके घर बुलावा टोली जाए। टोली में स्कूल के शिक्षक शामिल होंगे। शिक्षक अभिभावक से मुलाकात कर बच्चे के स्कूल न आने का कारण जानेंगे। टोली के सदस्य अभिभावकों को जागरूक करते हुए बच्चे को रोज स्कूल भेजने को प्रेरित करेंगे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल करीब साढ़े पांच लाख बच्चे पंजीकृत थे, इस बार करीब दस फीसदी नामांकन बढ़ाने हैं।
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सरकारी में घटेगी संख्या, निजी स्कूल की बल्ले-बल्ले
उम्र की सीमा तय होने के बाद परिषदीय स्कूलों में नामांकन संख्या घटने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में निजी स्कूलों की मौज हो रही है। निजी संस्थान छह साल से कम उम्र वाले बच्चों को भी प्रवेश दे रहे हैं। ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवार के अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा। एक स्कूल प्रबंधक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह ढाई साल के बच्चे का भी प्ले ग्रुप में प्रवेश ले रहे हैं। जब तब बच्चा कक्षा एक में आएगा, स्कूली परिवेश से भलीभांति परिचित हो जाएगा।
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शासन के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। कक्षा एक में प्रवेश के लिए उम्र तय है। इससे किसी भी प्रकार से नामांकन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। दस प्रतिशत बच्चों के नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित है, इसे पूरा करने के लिए बीईओ सहित प्रधानाचार्य को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए
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शासन स्तर से इस बार कक्षा एक में प्रवेश के लिए बच्चे की उम्र छह वर्ष निर्धारित की गई है। इससे स्कूलों में बच्चों के नामांकन की संख्या में कमी आई है। वहीं, विभाग का दावा है कि उम्र की सीमा तय होने से नामांकन पर किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। हाल ही में महानिदेशक स्कूल एवं शिक्षा कंचन वर्मा ने आदेश जारी किया है।
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आदेश में स्पष्ट है कि पंजीकृत छात्र-छात्राएं यदि तीन से ज्यादा अनुपस्थित रहते हैं तो उनके घर बुलावा टोली जाए। टोली में स्कूल के शिक्षक शामिल होंगे। शिक्षक अभिभावक से मुलाकात कर बच्चे के स्कूल न आने का कारण जानेंगे। टोली के सदस्य अभिभावकों को जागरूक करते हुए बच्चे को रोज स्कूल भेजने को प्रेरित करेंगे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल करीब साढ़े पांच लाख बच्चे पंजीकृत थे, इस बार करीब दस फीसदी नामांकन बढ़ाने हैं।
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सरकारी में घटेगी संख्या, निजी स्कूल की बल्ले-बल्ले
उम्र की सीमा तय होने के बाद परिषदीय स्कूलों में नामांकन संख्या घटने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में निजी स्कूलों की मौज हो रही है। निजी संस्थान छह साल से कम उम्र वाले बच्चों को भी प्रवेश दे रहे हैं। ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवार के अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा। एक स्कूल प्रबंधक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह ढाई साल के बच्चे का भी प्ले ग्रुप में प्रवेश ले रहे हैं। जब तब बच्चा कक्षा एक में आएगा, स्कूली परिवेश से भलीभांति परिचित हो जाएगा।
शासन के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। कक्षा एक में प्रवेश के लिए उम्र तय है। इससे किसी भी प्रकार से नामांकन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। दस प्रतिशत बच्चों के नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित है, इसे पूरा करने के लिए बीईओ सहित प्रधानाचार्य को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए