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ऐसे कैसे लड़ेंगे जंग, पल्स ऑक्सीमीटर न थर्मामीटर
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2335 निगरानी समितियों के पास न जांच के सामान और न ही सुरक्षा के इंतजाम
लखीमपुर खीरी। कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए गांवों में 3500 निगरानी समितियां लगाई गई हैं, जिसमें से 2335 निगरानी समितियों के पास आवश्यक साजो-सामान जैसे पल्स ऑक्सीमीटर, इंफ्रारेड थर्मामीटर आदि उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में निहत्थे कोरोना योद्घा (निगरानी समितियां) सर्वे के काम में कितने सफल हो पाएंगे, इस पर सवाल उठने लगे हैं।
जनपद में 1165 निगरानी समितियों के पास पिछले साल 2020 में खरीदे गए उपकरण हैं, जिनसे वह काम चला रही हैं, जबकि बढ़ते संक्रमण पर लगाम लगाने के लिये डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने निगरानी समितियों की संख्या बढ़ाकर 3500 कर दी, लेकिन नवगठित 2335 निगरानी समितियों को डोर टू डोर सर्वे के दौरान आवश्यक उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं। अब बिना उपकरणों के निगरानी समितियां ग्रामीणों की जांच नहीं कर पा रही हैं, जिससे सर्वे की विश्वनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। बिना उपकरणों के ग्रामीणों का ऑक्सीजन लेवल और तापमान की जांच नहीं हो पा रही है, जिससे लोगों से उनके बीमारी के लक्षणों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
डीपीआरओ सौम्य शील सिंह ने बताया कि 2335 नई निगरानी समितियां कुछ दिन पहले गठित की गई हैं, जिससे इन्हें जरूरी उपकरण मुहैया कराए जाने शेष हैं। उपकरणों की खरीद की जिम्मेदारी संबंधित एमओआईसी को दी गई है, जो जेम पोर्टल से खरीददारी करेंगे, लेकिन अभी भी इसमें एक हफ्ते का समय लगना शेष है।
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केवल आशा बहू को ग्लव्स मास्क देने पर उठे सवाल
पसगवां। प्रशासन द्वारा गठित निगरानी समितियों में आशा बहू और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समेत गांव के कई अन्य जिम्मेदार शामिल हैं, जबकि घर घर जाकर जांच करने का काम आशा बहू और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का है। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ प्रशासन द्वारा सौतेला व्यवहार अपनाए जाने पर सीडीपीओ ने बीडीओ के सामने विरोध दर्ज कराया है।
विकास खंड पसगवां में 356 निगरानी समितियों को सक्रिय किया गया है, जिसमें ग्राम प्रधान, आशा बहू, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम रोजगार सेवक, ग्राम सचिव, लेखपाल, कोटेदार और चौकीदार शामिल हैं। आशा बहू और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को घर-घर जाकर बुखार, खांसी आदि का सर्वे करना होता है, जबकि बाकी का काम आशा बहू अथवा रैपिड रिस्पांस टीम को सूचना देना है।
सीडीपीओ सूरजकली का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी कोरोना योद्धा हैं, उन्हें सर्विलांस टीम में शामिल किया गया है। सर्वे के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को भी संक्रमण का खतरा बना रहता है। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को भी संक्रमण से बचाव के लिए मास्क और ग्लव्स प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराया जाने चाहिये।
निगरानी समिति ने जांचा तापमान और पल्स
रेहरिया। ग्राम पंचायत पोखनापुर में निगरानी समिति ने गांव में बाहर से आए लोगों के लिए क्वारंटाइन की व्यवस्था कराई है और उनका तापमान व पल्स की जांच की। साथ ही सर्वे का काम भी शुरू कर दिया है।
ग्राम प्रधान नरेंद्र कुमार ने बताया कि निगरानी समिति बाहर से किसी गांव मोहल्ले में आने वाले बीमार व्यक्ति की जानकारी जिला प्रशासन तक पहुंचाएगी, ताकि उसकी जांच कराई जा सके। साथ ही ऐसे लोगों पर भी नजर रखे जाएगी, जो दूसरी जगह से आए हैं और अपने मर्ज को छुपाने की कोशिश में लगे हैं। बताया कि पंचायत के गांव पोखनापुर, रेहरिया, मजरा नौगांवा और पिपरिया धनी में सैनिटाइज करवा रहे हैं। संवाद
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लखीमपुर खीरी। कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए गांवों में 3500 निगरानी समितियां लगाई गई हैं, जिसमें से 2335 निगरानी समितियों के पास आवश्यक साजो-सामान जैसे पल्स ऑक्सीमीटर, इंफ्रारेड थर्मामीटर आदि उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में निहत्थे कोरोना योद्घा (निगरानी समितियां) सर्वे के काम में कितने सफल हो पाएंगे, इस पर सवाल उठने लगे हैं।
जनपद में 1165 निगरानी समितियों के पास पिछले साल 2020 में खरीदे गए उपकरण हैं, जिनसे वह काम चला रही हैं, जबकि बढ़ते संक्रमण पर लगाम लगाने के लिये डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने निगरानी समितियों की संख्या बढ़ाकर 3500 कर दी, लेकिन नवगठित 2335 निगरानी समितियों को डोर टू डोर सर्वे के दौरान आवश्यक उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं। अब बिना उपकरणों के निगरानी समितियां ग्रामीणों की जांच नहीं कर पा रही हैं, जिससे सर्वे की विश्वनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। बिना उपकरणों के ग्रामीणों का ऑक्सीजन लेवल और तापमान की जांच नहीं हो पा रही है, जिससे लोगों से उनके बीमारी के लक्षणों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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डीपीआरओ सौम्य शील सिंह ने बताया कि 2335 नई निगरानी समितियां कुछ दिन पहले गठित की गई हैं, जिससे इन्हें जरूरी उपकरण मुहैया कराए जाने शेष हैं। उपकरणों की खरीद की जिम्मेदारी संबंधित एमओआईसी को दी गई है, जो जेम पोर्टल से खरीददारी करेंगे, लेकिन अभी भी इसमें एक हफ्ते का समय लगना शेष है।
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केवल आशा बहू को ग्लव्स मास्क देने पर उठे सवाल
पसगवां। प्रशासन द्वारा गठित निगरानी समितियों में आशा बहू और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समेत गांव के कई अन्य जिम्मेदार शामिल हैं, जबकि घर घर जाकर जांच करने का काम आशा बहू और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का है। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ प्रशासन द्वारा सौतेला व्यवहार अपनाए जाने पर सीडीपीओ ने बीडीओ के सामने विरोध दर्ज कराया है।
विकास खंड पसगवां में 356 निगरानी समितियों को सक्रिय किया गया है, जिसमें ग्राम प्रधान, आशा बहू, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम रोजगार सेवक, ग्राम सचिव, लेखपाल, कोटेदार और चौकीदार शामिल हैं। आशा बहू और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को घर-घर जाकर बुखार, खांसी आदि का सर्वे करना होता है, जबकि बाकी का काम आशा बहू अथवा रैपिड रिस्पांस टीम को सूचना देना है।
सीडीपीओ सूरजकली का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी कोरोना योद्धा हैं, उन्हें सर्विलांस टीम में शामिल किया गया है। सर्वे के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को भी संक्रमण का खतरा बना रहता है। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को भी संक्रमण से बचाव के लिए मास्क और ग्लव्स प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराया जाने चाहिये।
निगरानी समिति ने जांचा तापमान और पल्स
रेहरिया। ग्राम पंचायत पोखनापुर में निगरानी समिति ने गांव में बाहर से आए लोगों के लिए क्वारंटाइन की व्यवस्था कराई है और उनका तापमान व पल्स की जांच की। साथ ही सर्वे का काम भी शुरू कर दिया है।
ग्राम प्रधान नरेंद्र कुमार ने बताया कि निगरानी समिति बाहर से किसी गांव मोहल्ले में आने वाले बीमार व्यक्ति की जानकारी जिला प्रशासन तक पहुंचाएगी, ताकि उसकी जांच कराई जा सके। साथ ही ऐसे लोगों पर भी नजर रखे जाएगी, जो दूसरी जगह से आए हैं और अपने मर्ज को छुपाने की कोशिश में लगे हैं। बताया कि पंचायत के गांव पोखनापुर, रेहरिया, मजरा नौगांवा और पिपरिया धनी में सैनिटाइज करवा रहे हैं। संवाद