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चार घोडों में मिला ग्लेंडर्स फारसी रोग
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धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। पशु चिकित्सा विभाग की ओर से बीमारी से जूझ रहे 20 घोड़ों के रक्त की जांच राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार (हरियाणा) से कराई थी इसमें चार घोड़े ग्लैंडर्स फारसी संक्रमण से ग्रसित पाए गए। इनमें से धौरहरा के दो घोड़ों को शुक्रवार को सहज मृत्यु दे दी गई। डॉ. मुकेश गुप्ता ने बताया कि रमियाबेहड़ और नकहा के अश्व को भी सहज मृत्यु दी जाएगी, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
घोड़ों में पाए जाने वाले ग्लैंडस फारसी संक्रमण एक ऐसा घातक रोग है, जो घोड़े से इंसानों में फैल कर जिंदगी बर्बाद कर देता है। पशु चिकित्सा विभाग ने इस रोग के लक्षण देखकर जिले से बीस घोड़ों के रक्त के नमूने राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार (हरियाणा) भेजा था, जिसमें धौरहरा, रमियाबेहड़ और नकहा में चार घोड़े संक्रमित पाए गए हैं। इनमें धौरहरा के दो, रमियाबेहड़ व नकाहा में एक-एक अश्व में यह रोग पाया गया। जिन्हें सहज मृत्यु देने का निर्णय किया गया।
धौरहरा के उप पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश गुप्ता, पशु प्रसार अधिकारी वीरेंद्र कुमार, हरिओम मिथलेश सहित पशु विभाग की टीम ने धौरहरा के महराज नगर गांव के कमरुद्दीन के दो घोड़ों को सहज मृत्यु प्रदान की है। उनके खाते में प्रति पशु 25 हजार भेजा गया है। डॉ. मुकेश गुप्ता ने बताया कि रमियाबेहड़ और नकहा के घोड़ों को भी सहज मृत्यु दी जाएगी, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
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नहीं है कोई इलाज
डॉ. मुकेश गुप्ता ने बताया यह रोग इतना घातक संक्रमण है जो घोड़े से मनुष्य में भी फैल जाता है। इसका कोई इलाज भी नहीं है। इसलिए शासनादेश के अनुसार इस रोग से संक्रमित अश्व को संपूर्ण जैव सुरक्षा अपनाते हुए सहज मृत्यु दी जाती है।
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घोड़ों में पाए जाने वाले ग्लैंडस फारसी संक्रमण एक ऐसा घातक रोग है, जो घोड़े से इंसानों में फैल कर जिंदगी बर्बाद कर देता है। पशु चिकित्सा विभाग ने इस रोग के लक्षण देखकर जिले से बीस घोड़ों के रक्त के नमूने राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार (हरियाणा) भेजा था, जिसमें धौरहरा, रमियाबेहड़ और नकहा में चार घोड़े संक्रमित पाए गए हैं। इनमें धौरहरा के दो, रमियाबेहड़ व नकाहा में एक-एक अश्व में यह रोग पाया गया। जिन्हें सहज मृत्यु देने का निर्णय किया गया।
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धौरहरा के उप पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश गुप्ता, पशु प्रसार अधिकारी वीरेंद्र कुमार, हरिओम मिथलेश सहित पशु विभाग की टीम ने धौरहरा के महराज नगर गांव के कमरुद्दीन के दो घोड़ों को सहज मृत्यु प्रदान की है। उनके खाते में प्रति पशु 25 हजार भेजा गया है। डॉ. मुकेश गुप्ता ने बताया कि रमियाबेहड़ और नकहा के घोड़ों को भी सहज मृत्यु दी जाएगी, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
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नहीं है कोई इलाज
डॉ. मुकेश गुप्ता ने बताया यह रोग इतना घातक संक्रमण है जो घोड़े से मनुष्य में भी फैल जाता है। इसका कोई इलाज भी नहीं है। इसलिए शासनादेश के अनुसार इस रोग से संक्रमित अश्व को संपूर्ण जैव सुरक्षा अपनाते हुए सहज मृत्यु दी जाती है।