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काश! रोज आते रेलवे जीएम
मैलानी।
Updated Tue, 09 Feb 2016 10:38 PM IST
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एनई रेलवे के जीएम के दौरे के दिन चाकचौबंद इंतजाम देख लोग सहसा कह उठे कि काश जीएम यहां रोज आते। एनई रेलवे जीएम राजीव मिश्र ने सोमवार को यहां का निरीक्षण किया था। उस दिन रेलवे स्टेशन पर सब कुछ ओके था। मसलन अर्से से बंद चल रहा इलेक्ट्रानिक डिस्पले बोर्ड काम कर रहा था तो ध्वनि विस्तारक यंत्र से भी ट्रनों के आवागमन की सूचनाएं प्रसारित हो रहीं थीं। इससे यात्रियों को ट्रेनों की जानकारी के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ा। स्टेशन परिसर की साफ-सफाई चकाचक थी लेकिन निरीक्षण के दूसरे दिन का नजारा अलग ही था। यानी सब कुछ पहले जैसा। इलेक्ट्रॉनिक डिस्पले बोर्ड काम नहीं कर रहा था और न ही ट्रेनों के आवागमन की सूचना प्रसारित हो रही थी। जिससे यात्रियों को ट्रेनों की स्थिति मालूम करने में परेशानी हुई।
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प्लेटफार्म दो-तीन पर नहीं जा सके जीएम
एनईआर जीएम ने हालांकि मैलानी में करीब एक घंटे तक गहनता से निरीक्षण किया और तमाम खामियों पर नाराजगी जताई। प्लेटफार्म नंबर एक पर टूटा टिन शेड, रिटायरिंग रूम की दीवार पर नमी, मेन गेट का पुराना बोर्ड, बाजार से आने वाले मुख्य द्वार पर अतिक्रमण उनकी नजरों से नहीं बच सका लेकिन प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर वह नहीं जा सके। निरीक्षण के दौरान ही वह पुल से प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर जाने के लिए जैसे ही मुड़े, मौजूद अधिकारियों ने उन्हें दूसरी तरफ घुमा दिया। जबकि प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर तमाम खामियां थीं। पूरा टिन शेड जगह-जगह टूटा है। बरसात होने पर यात्रियों को सिर छुपाने की जगह तक नहीं मिलती है। इसके अलावा टिन शेड के नीचे एक भी बेंच नहीं है। जिससे यात्रियों को बेहद कठिनाई होती हैं। शायद इन्हीं खामियों को छिपाने की गरज से अधिकारियों ने जीएम को प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर ले जाना मुनासिब नहीं समझा और वे मुसीबत से बच गए।
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प्लेटफार्म दो-तीन पर नहीं जा सके जीएम
एनईआर जीएम ने हालांकि मैलानी में करीब एक घंटे तक गहनता से निरीक्षण किया और तमाम खामियों पर नाराजगी जताई। प्लेटफार्म नंबर एक पर टूटा टिन शेड, रिटायरिंग रूम की दीवार पर नमी, मेन गेट का पुराना बोर्ड, बाजार से आने वाले मुख्य द्वार पर अतिक्रमण उनकी नजरों से नहीं बच सका लेकिन प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर वह नहीं जा सके। निरीक्षण के दौरान ही वह पुल से प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर जाने के लिए जैसे ही मुड़े, मौजूद अधिकारियों ने उन्हें दूसरी तरफ घुमा दिया। जबकि प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर तमाम खामियां थीं। पूरा टिन शेड जगह-जगह टूटा है। बरसात होने पर यात्रियों को सिर छुपाने की जगह तक नहीं मिलती है। इसके अलावा टिन शेड के नीचे एक भी बेंच नहीं है। जिससे यात्रियों को बेहद कठिनाई होती हैं। शायद इन्हीं खामियों को छिपाने की गरज से अधिकारियों ने जीएम को प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर ले जाना मुनासिब नहीं समझा और वे मुसीबत से बच गए।
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