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होली से पहले ही खेतों से निपट गया गन्ना

Sun, 28 Feb 2016 07:50 PM IST
बांकेगंज।
बांकेगंज। Updated Sun, 28 Feb 2016 07:50 PM IST
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Holly was settled before the sugarcane fields
पिछले कई सालों से चल रही गन्ना मूल्य भुगतान की किल्लत को लेकर तराई के मेहनतकश किसान गन्ने से मुंह मोड़ रहे है। चालू सत्र में होली के पहले ही खेतों से गन्ना निपट गया। आलम यह है कि नो केन की स्थिति में गोला चीनी मिल के चार खरीद केंद्र बंद हो गए। इसके चलते चीनी मिल एक माह पहले ही बंद होने जा रही है। कई चीनी मिलें तो नो केन की स्थिति में बंदी की नोटिस चस्पा करने की तैयारी कर रहीं हैं। पिछले साल का बकाया अरबों रुपया चीनी मिलें इस सत्र के खत्म होने तक नहीं कर पाईं हैं। इस सत्र के बकाए का भुगतान इसी साल मिल पाएगा इसको लेकर किसानों में संशय हैं।
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पिछले साल भुगतान को लेकर हुई दिक्कत से इस साल किसानों ने गन्ने की कम बुवाई की थी। इस साल चीनी मिलें भी काफी देर से चालू हुईं। बावजूद इसके हालात यह हैं कि फरवरी के आखिरी सप्ताह में ही खेतों में गन्ना नहीं बचा। इसके चलते चीनी मिलें घिसट-घिसट कर चल रहीं हैं। एक दो साल पहले हालात यह थे कि तराई में अप्रैल के आखिरी हफ्ते तक खेतों में खड़ी गन्ने की फसल देखकर चीनी मिलों को पसीना छूटता था। भुगतान को लेकर हुई छीछालेदर से परेशान किसानों ने सीमित क्षेत्रफल में बुवाई करनी शुरू कर दी।
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क्षेत्रीय किसानों विश्वजीत सिंह, जुबेर अहमद, डॉ जहीर अहमद, अंजू सिंह, बजरंग अग्रवाल, सतीश गोयल, तरसेम सिंह आदि का कहना है कि नकदी फसल गन्ना उनकी आर्थिक रीढ़ होती थी। इसकी बिक्री से मिली धनराशि से वे पूरा साल चलाते थे। किसानों का कहना है कि होली कुछ ही समय बाकी है। पिछले सालों की तरह इस बार भी होली पर गन्ने का भुगतान नहीं हो पाया है। इस साल 22 नवंबर को चीनी मिल शुरू हुई थी। इसमें मात्र नौ दिसंबर तक बिक्री किए गए गन्ने का भुगतान किसानों के खातों में आया है। इसके बाद उन्हें एक फूटी कौड़ी नहीं मिल पाई है।
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गन्ना क्रय केंद्रों पर फरवरी में ही पसरा सन्नाटा
फरवरी माह में क्रय केंद्रों पर गन्ने की आवक बंद होने से गोला चीनी मिल के 75 फीसदी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। चीनी मिल ने नो केन के चलते इंदिरा नगर, वसलीपुर, निहालपुर और सेमरी क्रय केंद बंद कर दिए हैं। अन्य बाकी बचे 41 केंद्र गन्ने के अभाव में बंद होने के कगार पर हैं।
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