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खोखले साबित हो रहे स्वास्थ्य विभाग के दावे
लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 05 Sep 2015 10:48 PM IST
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बरसात के मौसम के साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने जिले में फैलने वाली बीमारियों पर नियंत्रण के लिए प्रयास शुरू कर दिए थे लेकिन इनका कोई असर नहीं हुआ। जेई, एईएस और वायरल जैसी बीमारियों का प्रकोप पूरे जिले में है। जिला अस्पताल में दिनों दिन बढ़ रही मरीजों की संख्या विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रही है।
बताते चलें अगस्त के पहले सप्ताह में ही वायरल बुुुखार का दौर शुरू हो गया था। एक पखवाड़े में ही इसने विकराल रूप ले लिया। लगभग दो दर्जन बच्चों में दिमागी बुुुखार के लक्षण मिले इन मरीजों की जांच के लिए सीरम लखनऊ भेजा गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग चौकन्ना हुआ प्रभावित गांवों के अलावा बाढ़ प्रभावित गांवों में छिड़काव तथा दवा वितरण और लोगों के रक्त के नमूने लेने के लिए टीमें बनाई गईं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सैकड़ों की संख्या में लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए और लोगों को दवाएं वितरित की गईं। बीमारियां न फैलें इसके लिए भी प्रयास किए गए लेकिन हालत यह है कि बीमारियों पर तनिक भी नियंत्रण नहीं हो पाया। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उसने पूरे जिले में छिड़काव आदि कराया है लेकिन तीमारदारों की बात मानें तो जिन गांवों से बीमार बच्चे आ रहे हैं उन गांवों में टीमें पहुंची ही नहीं और न ही छिड़काव आदि हुआ। स्वास्थ्य विभाग के दाव चाहे कुछ भी हों लेकिन मरीजों की बढ़ रही संख्या और जिला अस्पताल में हो रही मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशौली पर सवालिया निशान जरुर लगा दिया है।
सीएमओ डॉ. वीके साहू ने बताया कि ग्यारह बच्चों में सात में दिमागी बुखार की पुष्टि हुई है, इसमें अधिकांश बच्चे ठीक हो गए हैं कुछ का इलाज चल रहा है। एक सप्ताह से किसी भी बच्चे में दिमागी बुखार के लक्षण नहीं मिले हैं। सामान्य बुखार के पीड़ित बच्चे आ रहे हैं कई बच्चे ऐसे होते हैं जिनकी हालत बहुत गंभीर हो जाती है तब लोग लाते हैं। पूरा प्रयास किया जाता है कि किसी बच्चे की मौत न हो।
सात मरीजों में दिमागी बुखार की पुष्टि
स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती ऐसे ग्यारह बच्चे जिनमें दिमागी बुखार के लक्षण मिले थे। उनका सीरम जांच के लिए पीजीआई लखनऊ भेजा था इसमें सात बच्चों में दिमागी बुुुुखार की पुष्टि हो गई है। इसमें से कुछ बच्चे लखनऊ रेफर हो गए हैं और कुछ बच्चों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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बताते चलें अगस्त के पहले सप्ताह में ही वायरल बुुुखार का दौर शुरू हो गया था। एक पखवाड़े में ही इसने विकराल रूप ले लिया। लगभग दो दर्जन बच्चों में दिमागी बुुुखार के लक्षण मिले इन मरीजों की जांच के लिए सीरम लखनऊ भेजा गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग चौकन्ना हुआ प्रभावित गांवों के अलावा बाढ़ प्रभावित गांवों में छिड़काव तथा दवा वितरण और लोगों के रक्त के नमूने लेने के लिए टीमें बनाई गईं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सैकड़ों की संख्या में लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए और लोगों को दवाएं वितरित की गईं। बीमारियां न फैलें इसके लिए भी प्रयास किए गए लेकिन हालत यह है कि बीमारियों पर तनिक भी नियंत्रण नहीं हो पाया। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उसने पूरे जिले में छिड़काव आदि कराया है लेकिन तीमारदारों की बात मानें तो जिन गांवों से बीमार बच्चे आ रहे हैं उन गांवों में टीमें पहुंची ही नहीं और न ही छिड़काव आदि हुआ। स्वास्थ्य विभाग के दाव चाहे कुछ भी हों लेकिन मरीजों की बढ़ रही संख्या और जिला अस्पताल में हो रही मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशौली पर सवालिया निशान जरुर लगा दिया है।
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सीएमओ डॉ. वीके साहू ने बताया कि ग्यारह बच्चों में सात में दिमागी बुखार की पुष्टि हुई है, इसमें अधिकांश बच्चे ठीक हो गए हैं कुछ का इलाज चल रहा है। एक सप्ताह से किसी भी बच्चे में दिमागी बुखार के लक्षण नहीं मिले हैं। सामान्य बुखार के पीड़ित बच्चे आ रहे हैं कई बच्चे ऐसे होते हैं जिनकी हालत बहुत गंभीर हो जाती है तब लोग लाते हैं। पूरा प्रयास किया जाता है कि किसी बच्चे की मौत न हो।
सात मरीजों में दिमागी बुखार की पुष्टि
स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती ऐसे ग्यारह बच्चे जिनमें दिमागी बुखार के लक्षण मिले थे। उनका सीरम जांच के लिए पीजीआई लखनऊ भेजा था इसमें सात बच्चों में दिमागी बुुुुखार की पुष्टि हो गई है। इसमें से कुछ बच्चे लखनऊ रेफर हो गए हैं और कुछ बच्चों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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