{"_id":"7c861949291e6f9a81138c2c3b41151c","slug":"help-hindi-news-2","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुजुर्ग की मदद को बढ़े हाथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुजुर्ग की मदद को बढ़े हाथ
बिजुआ
Updated Fri, 25 Sep 2015 07:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी अस्पताल में बेड न. 25 पर भर्ती बुजुर्ग की जिम्मेदारी उठाने के लिए एक होटल के जीएम बिजुआ के रहने वाले राजन आगे आए हैं। शुक्रवार को अमर उजाला ने बिजुआ सीएचसी में भर्ती बुजुर्ग जेपी गुप्ता उर्फ सतीश की दास्तां बयां की थी। जालंधर के एक होटल में जनरल मैनेजर राजन गुप्ता बिजुआ के रहने वाले हैं, ई-एडिशन में इस खबर को पढ़कर उन्होंने रिपोर्टर को फोन कर मदद करने की बात कही।
अमर उजाला ई-एडिशन में ‘अपनों से दूर जिंदगी की जंग लड़ रहा वृद्ध’ खबर पढ़कर जालंधर में होटल रेजेंडेंसी में बतौर जनरल मैनेजर जॉब कर कर रहे शिवाषीस गुप्ता उर्फ राजन ने शाम को संवाददाता को फोन कर बुजुर्ग की खाने और दवा की जिम्मेदारी उठाने की इच्छा जताई। थोड़ी देर बाद अस्पताल के वार्डं न. 25 में भर्ती बुजुर्ग से मिलने राजन के छोटे भाई दीपक के अलावा अजय अवस्थी, दिनेश मिश्रा भी पहुंच गए। इस दौरान राजन की ओर से घर से खाना आया और चाय भी आ गई। वहीं दीपक के साथियों ने कहा कि उनके अपनों का पता लगते ही बस से बरेली तक भेजने की जिम्मेदारी भी वह उठाएंगे।
एक गुमनाम शख्स भी पहुंचा मदद करने
कल तक जिस बुजुर्ग की कोई पहचान नहीं थी आज उसे मिलने लखीमपुर से भी लोग पहुंच रहे हैं। बुजुर्ग ने बताया कि दिन में एक साहब लखीमपुर से आए थे, उन्होंने बताया कि अखबार में खबर पढ़ने के बाद सच्चाई का पता लगाने आए हैं। उन्होंने कुछ रुपये मदद के रूप में दिए और कल आने का वादा कर चले गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ई-एडिशन में ‘अपनों से दूर जिंदगी की जंग लड़ रहा वृद्ध’ खबर पढ़कर जालंधर में होटल रेजेंडेंसी में बतौर जनरल मैनेजर जॉब कर कर रहे शिवाषीस गुप्ता उर्फ राजन ने शाम को संवाददाता को फोन कर बुजुर्ग की खाने और दवा की जिम्मेदारी उठाने की इच्छा जताई। थोड़ी देर बाद अस्पताल के वार्डं न. 25 में भर्ती बुजुर्ग से मिलने राजन के छोटे भाई दीपक के अलावा अजय अवस्थी, दिनेश मिश्रा भी पहुंच गए। इस दौरान राजन की ओर से घर से खाना आया और चाय भी आ गई। वहीं दीपक के साथियों ने कहा कि उनके अपनों का पता लगते ही बस से बरेली तक भेजने की जिम्मेदारी भी वह उठाएंगे।
विज्ञापन
एक गुमनाम शख्स भी पहुंचा मदद करने
कल तक जिस बुजुर्ग की कोई पहचान नहीं थी आज उसे मिलने लखीमपुर से भी लोग पहुंच रहे हैं। बुजुर्ग ने बताया कि दिन में एक साहब लखीमपुर से आए थे, उन्होंने बताया कि अखबार में खबर पढ़ने के बाद सच्चाई का पता लगाने आए हैं। उन्होंने कुछ रुपये मदद के रूप में दिए और कल आने का वादा कर चले गए।
विज्ञापन