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अवैध वसूली पर नियंत्रण बड़ी चुनौती, बगैर कमीशन नहीं होता भुगतान
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सीएमओ कार्यालय
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। सीएमओ कार्यालय हो या फिर जिला कार्यक्रम प्रबंधक इकाई कार्यालय (डीपीएमयू)। हर जगह अवैध वसूली की गहरी होती जड़ों को उखाड़ फेंकना स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
अवैध वसूली की आग में सिर्फ आशाएं ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड अधिकारी और संविदा कर्मी भी झुलस रहे हैं। आशा वर्करों के प्रोत्साहन राशि का भुगतान हो या फिर डॉक्टर व अन्य स्टाफ को बढ़े हुए मानदेय का। सभी की दर निर्धारित है, जिन्होंने 10 से 15 प्रतिशत चढ़ावा नहीं दिया, वह आज भी सीएमओ कार्यालय और डीपीएमयू के चक्कर काट रहे हैं।
भले ही प्रधानमंत्री मोदी न खाऊंगा, न खाने दूंगा की बात करते हों और सीएम योगी भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश की। मगर, जिले के स्वास्थ्य महकमे में खाने कमाने की परंपरा पिछले कई साल से अनवरत जारी है। इसकी हकीकत पिछले दिनों रमियाबेहड़ की आशा वर्कर डीएम को बता चुकी हैं। दिन रात गांव की खाक छानने वाली आशा वर्कर ही नहीं, जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक, रिटायर्ड जिला मलेरिया अधिकारी से लेकर तमाम संविदा कर्मी भ्रष्टाचार की आग में जल रहे हैं। कमीशन का आलम यह है कि शासनादेश होने के बाद भी मनोचिकित्सक को न तो निर्धारित वेतन दिया जा रहा है और न ही प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के फॉर्म फीड करने वाले डाटा एंट्री ऑपरेटरों को मेहनताना मिल रहा है। मनोचिकित्सक बताते हैं कि बढ़ी हुई सैलरी के मामले में कई बार जिला लेखा प्रबंधक से मिला, लेकिन हर बार कोरा आश्वासन ही मिला।
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केस एक : अगस्त 2020 में जिला मलेरिया अधिकारी के पद से रिटायर हुए स्वतंत्र मिश्रा पिछले 13 माह से देयकों को लेकर सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। हर बार आश्वासन तो मिला, लेकिन भुगतान आज तक नहीं हुआ।
केस दो : जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक को पिछले दो साल से कम सैलरी का भुगतान हो रहा है। जबकि शासन पिछले दो साल से बढ़ी हुई सैलरी के अनुसार बजट मुहैया करा रहा है। मनोचिकित्सक का कहना है कि इस संबंध में जिला लेखा प्रबंधक से मिले और शासनादेश भी दिया। मगर, पता नहीं किस वजह से भुगतान नहीं कर रहे हैं।
केस तीन : जिला अस्पताल में कर्मचारियों ने नाम न छापने पर बताया कि 2020 में करीब दो हजार रुपये मानदेय में बढ़ोतरी का आदेश हुआ था, लेकिन अभी तक वह नहीं मिला। मिलने पर हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, लेकिन बढ़ा हुआ मानदेय नहीं।
केस चार : प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के तहत लाभार्थियों के फार्म ऑनलाइन भरने के लिए प्रोत्साहन राशि देने का प्राविधान है। बताया जाता है कि करीब चार लाख का भुगतान प्रदेश स्तर से होना है। इसके लिए सीएमओ कार्यालय से डिटेल भेजी जानी है। मगर, आपसी खींचतान के चलते डाटा एंट्री ऑपरेटर भुगतान पाने का इंतजार कर रहे हैं।
इन सभी प्रकरणों की फिलहाल जानकारी नहीं है। यदि ऐसा कुछ मामला है भी तो उसकी पड़ताल कराकर सभी का नियमानुुसार भुगतान कराया जाएगा।
- डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ
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अवैध वसूली की आग में सिर्फ आशाएं ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड अधिकारी और संविदा कर्मी भी झुलस रहे हैं। आशा वर्करों के प्रोत्साहन राशि का भुगतान हो या फिर डॉक्टर व अन्य स्टाफ को बढ़े हुए मानदेय का। सभी की दर निर्धारित है, जिन्होंने 10 से 15 प्रतिशत चढ़ावा नहीं दिया, वह आज भी सीएमओ कार्यालय और डीपीएमयू के चक्कर काट रहे हैं।
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भले ही प्रधानमंत्री मोदी न खाऊंगा, न खाने दूंगा की बात करते हों और सीएम योगी भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश की। मगर, जिले के स्वास्थ्य महकमे में खाने कमाने की परंपरा पिछले कई साल से अनवरत जारी है। इसकी हकीकत पिछले दिनों रमियाबेहड़ की आशा वर्कर डीएम को बता चुकी हैं। दिन रात गांव की खाक छानने वाली आशा वर्कर ही नहीं, जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक, रिटायर्ड जिला मलेरिया अधिकारी से लेकर तमाम संविदा कर्मी भ्रष्टाचार की आग में जल रहे हैं। कमीशन का आलम यह है कि शासनादेश होने के बाद भी मनोचिकित्सक को न तो निर्धारित वेतन दिया जा रहा है और न ही प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के फॉर्म फीड करने वाले डाटा एंट्री ऑपरेटरों को मेहनताना मिल रहा है। मनोचिकित्सक बताते हैं कि बढ़ी हुई सैलरी के मामले में कई बार जिला लेखा प्रबंधक से मिला, लेकिन हर बार कोरा आश्वासन ही मिला।
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केस एक : अगस्त 2020 में जिला मलेरिया अधिकारी के पद से रिटायर हुए स्वतंत्र मिश्रा पिछले 13 माह से देयकों को लेकर सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। हर बार आश्वासन तो मिला, लेकिन भुगतान आज तक नहीं हुआ।
केस दो : जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक को पिछले दो साल से कम सैलरी का भुगतान हो रहा है। जबकि शासन पिछले दो साल से बढ़ी हुई सैलरी के अनुसार बजट मुहैया करा रहा है। मनोचिकित्सक का कहना है कि इस संबंध में जिला लेखा प्रबंधक से मिले और शासनादेश भी दिया। मगर, पता नहीं किस वजह से भुगतान नहीं कर रहे हैं।
केस तीन : जिला अस्पताल में कर्मचारियों ने नाम न छापने पर बताया कि 2020 में करीब दो हजार रुपये मानदेय में बढ़ोतरी का आदेश हुआ था, लेकिन अभी तक वह नहीं मिला। मिलने पर हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, लेकिन बढ़ा हुआ मानदेय नहीं।
केस चार : प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के तहत लाभार्थियों के फार्म ऑनलाइन भरने के लिए प्रोत्साहन राशि देने का प्राविधान है। बताया जाता है कि करीब चार लाख का भुगतान प्रदेश स्तर से होना है। इसके लिए सीएमओ कार्यालय से डिटेल भेजी जानी है। मगर, आपसी खींचतान के चलते डाटा एंट्री ऑपरेटर भुगतान पाने का इंतजार कर रहे हैं।
इन सभी प्रकरणों की फिलहाल जानकारी नहीं है। यदि ऐसा कुछ मामला है भी तो उसकी पड़ताल कराकर सभी का नियमानुुसार भुगतान कराया जाएगा।
- डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ