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चार दवाओं के नमूने जांच में फेल
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लखीमपुर खीरी। जीवनरक्षक दवाओं के मानकों में हेरफेर कर लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ करने के मामले में तीन दवा निर्माता कंपनियों और एक डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ सिविल कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया है। तीनों कंपनियां हिमाचल प्रदेश में स्थित हैं। इसके अलावा फूलबेहड़ सीएचसी के सामने बिना लाइसेंस के संचालित हर्ष मेडिकल स्टोर के दवा विक्रेता के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है। इस कार्रवाई से दवा विक्रेताओं में खलबली मच गई है। वहीं दवा निर्माता कंपनियां भी सवालों के घेरे में हैं, क्योंकि इससे पहले भी हिमाचल प्रदेश की कई दवा कंपनियों के नमूने फेल हो चुके हैं।
ड्रग इंस्पेक्टर सुनील कुमार रावत ने कुछ माह पहले दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए सरकारी लैब भेजे थे, जहां राज्य विश्लेषक ने चार दवाओं के नमूनों को अधोमानक (निर्धारित सॉल्ट की मात्रा कम पाया जाना) घोषित किया है। इसके बाद खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन के आयुक्त के निर्देश पर ड्रग इंस्पेक्टर ने इन मामलों में कार्रवाई करते हुए तीन दवा निर्माता कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दायर करने के साथ ही बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर चलाने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई की है।
बताया जाता है कि बच्चों को दी जाने वाली लिवफ्लॉन ओजेड सीरप का नमूना बरवर स्थित गुप्ता मेडिकोज से लिया गया था, जिसमें निर्धारित मानकों से कम गुणवत्ता पाई गई है। इसके निर्माता सीवी हेल्थकेयर सोलन हिमाचल प्रदेश के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है।
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एंटीबायोटिक के तौर पर प्रयोग की जाने वाली टेबलेट पॉवरमाक्स सीवी 625 एमजी का नमूना मोहम्मदी के राजेश मेडिकल एजेंसी से लिया गया था, जो लैब जांच में अधोमानक पाया गया है। मेडिकल एजेंसी संचालक ने यह दवा हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित आटी फार्मा से खरीदी थी, जबकि इसकी निर्माता जीएनबी मेडिकल लैब भी सोलन हिमाचल प्रदेश में स्थित है। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि आरटी फार्मा को नोटिस देकर जवाब मांगा गया था कि यह दवा कहां से खरीदी है, जिस पर आरटी फार्मा ने कोई जवाब नहीं दिया है। लिहाजा निर्माता जीएनबी मेडिकल लैब के साथ ही आरटी फार्मा के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया गया है।
इसी तरह फंगल इंफेक्शन में प्रयोग किए जाने वाले आइंटमेंट क्लोमेक एस का नमूना जिला अस्पताल रोड स्थित नरायन मेडिकल एजेंसी से लिया गया था, जो लैब जांच में अधोमानक निकला है। इसकी निर्माता विन क्योर फार्मा बद्दी हिमाचल प्रदेश के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया गया है।
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बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर चलाने वाले पर मुकदमा
फूलबेहड़ सीएचसी के सामने संचालित हर्ष मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर सुनील कुमार रावत ने तीन दवाओं के नमूने भरे थे, जिसमें एक दवा का नमूना अधोमानक पाया गया है। इस मामले में ड्रग इंस्पेक्टर ने संचालक रामू के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। मेडिकल स्टोर से बरामद दवाओं के मामले की विवेचना अभी जारी है। संवाद
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ड्रग इंस्पेक्टर सुनील कुमार रावत ने कुछ माह पहले दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए सरकारी लैब भेजे थे, जहां राज्य विश्लेषक ने चार दवाओं के नमूनों को अधोमानक (निर्धारित सॉल्ट की मात्रा कम पाया जाना) घोषित किया है। इसके बाद खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन के आयुक्त के निर्देश पर ड्रग इंस्पेक्टर ने इन मामलों में कार्रवाई करते हुए तीन दवा निर्माता कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दायर करने के साथ ही बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर चलाने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई की है।
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बताया जाता है कि बच्चों को दी जाने वाली लिवफ्लॉन ओजेड सीरप का नमूना बरवर स्थित गुप्ता मेडिकोज से लिया गया था, जिसमें निर्धारित मानकों से कम गुणवत्ता पाई गई है। इसके निर्माता सीवी हेल्थकेयर सोलन हिमाचल प्रदेश के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है।
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एंटीबायोटिक के तौर पर प्रयोग की जाने वाली टेबलेट पॉवरमाक्स सीवी 625 एमजी का नमूना मोहम्मदी के राजेश मेडिकल एजेंसी से लिया गया था, जो लैब जांच में अधोमानक पाया गया है। मेडिकल एजेंसी संचालक ने यह दवा हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित आटी फार्मा से खरीदी थी, जबकि इसकी निर्माता जीएनबी मेडिकल लैब भी सोलन हिमाचल प्रदेश में स्थित है। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि आरटी फार्मा को नोटिस देकर जवाब मांगा गया था कि यह दवा कहां से खरीदी है, जिस पर आरटी फार्मा ने कोई जवाब नहीं दिया है। लिहाजा निर्माता जीएनबी मेडिकल लैब के साथ ही आरटी फार्मा के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया गया है।
इसी तरह फंगल इंफेक्शन में प्रयोग किए जाने वाले आइंटमेंट क्लोमेक एस का नमूना जिला अस्पताल रोड स्थित नरायन मेडिकल एजेंसी से लिया गया था, जो लैब जांच में अधोमानक निकला है। इसकी निर्माता विन क्योर फार्मा बद्दी हिमाचल प्रदेश के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया गया है।
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बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर चलाने वाले पर मुकदमा
फूलबेहड़ सीएचसी के सामने संचालित हर्ष मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर सुनील कुमार रावत ने तीन दवाओं के नमूने भरे थे, जिसमें एक दवा का नमूना अधोमानक पाया गया है। इस मामले में ड्रग इंस्पेक्टर ने संचालक रामू के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। मेडिकल स्टोर से बरामद दवाओं के मामले की विवेचना अभी जारी है। संवाद