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ब्लड बैंक में खून की कमी, मरीज भगवान भरोसे
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लखीमपुर जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त न होने का संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि अब गिनती की ही ब्लड ग्रुप की यूनिट शेष बची हैं। कुछ ग्रुप तो ऐसे हैं, जिनकी एक या दो यूनिट ही बची हैं। जबकि कुछ ऐसे भी ग्रुप हैं, जो समाप्त हो चुके हैं। कुल मिलाकर ब्लड बैंक में करीब 25 यूनिट ही रक्त बचा है। इसमें सबसे ज्यादा ओ-पॉजिटिव की 11 यूनिट हैं। ऐसे में यदि जिले में कोई बड़ी समस्या खड़ी हो गई तो पीड़ितों की जान बचाना मुश्किल होगा।
कोरोना काल ने ब्लड बैंक के सामने खून का संकट खड़ा कर दिया है। लॉकडान के तीन माह कैंप न लगने और जरूरत मंदों को ब्लड दिए जाने से ब्लड बैंक में खून का अभाव हो गया है। कोरोना काल से पहले ब्लड बैंक में जहां रक्त की 200 से 300 यूनिट उपलब्ध रहती थीं। वहीं अब सिर्फ 20 से 25 यूनिट ही रक्त बचा है। ऐसे में जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों में भर्ती जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराने पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. केपी सिंह बताते हैं कि खून बाजार में तो बनता नहीं। इसके मिलने का सहारा केवल रक्तदाता ही हैं, लेकिन कोरोना काल में न तो कैंप लग सके और न ही जागरूकता शिविर ही लगे। इस कारण ब्लड बैंक में खून का अभाव हो गया। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पताल में भर्ती जरूरतमंदों के साथ हर माह 10 से 12 बच्चे थैलीसीमिया पीड़ित आ रहे हैं।
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ब्लड बैंक की क्षमता-300 यूनिट
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रक्तदान से फायदे
- दिल को तंदुरुस्त रखता है।
- लाल रक्त कोशिकाओं में वृद्धि होती है।
- वजन नियंत्रित रहता है।
- कैंसर के खतरे को कम करता है।
- ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
- शरीर की नि:शुल्क जांच हो जाती है।
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इन ग्रुप का खत्म हो चुका ब्लड
ए एवं ओ निगेटिव, एबी निगेटिव, ए एवं बी पॉजिटिव
==
रक्तदान महादान है। इससे लोगों को जीवनदान मिलता है। रक्तदान न केवल किसी का जीवन बचाता है, बल्कि रक्त करने वाले को भी स्वस्थ रखता है। इस तरह यह दोनो के लिए लाभकारी है। इसलिए 18 से 50 साल तक के लोगों को नियमित रूप से हर तीन माह पर या फिर साल में एक बार रक्त का दान अवश्य करना चाहिए।
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-डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
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कोरोना काल ने ब्लड बैंक के सामने खून का संकट खड़ा कर दिया है। लॉकडान के तीन माह कैंप न लगने और जरूरत मंदों को ब्लड दिए जाने से ब्लड बैंक में खून का अभाव हो गया है। कोरोना काल से पहले ब्लड बैंक में जहां रक्त की 200 से 300 यूनिट उपलब्ध रहती थीं। वहीं अब सिर्फ 20 से 25 यूनिट ही रक्त बचा है। ऐसे में जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों में भर्ती जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराने पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. केपी सिंह बताते हैं कि खून बाजार में तो बनता नहीं। इसके मिलने का सहारा केवल रक्तदाता ही हैं, लेकिन कोरोना काल में न तो कैंप लग सके और न ही जागरूकता शिविर ही लगे। इस कारण ब्लड बैंक में खून का अभाव हो गया। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पताल में भर्ती जरूरतमंदों के साथ हर माह 10 से 12 बच्चे थैलीसीमिया पीड़ित आ रहे हैं।
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ब्लड बैंक की क्षमता-300 यूनिट
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रक्तदान से फायदे
- दिल को तंदुरुस्त रखता है।
- लाल रक्त कोशिकाओं में वृद्धि होती है।
- वजन नियंत्रित रहता है।
- कैंसर के खतरे को कम करता है।
- ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
- शरीर की नि:शुल्क जांच हो जाती है।
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इन ग्रुप का खत्म हो चुका ब्लड
ए एवं ओ निगेटिव, एबी निगेटिव, ए एवं बी पॉजिटिव
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रक्तदान महादान है। इससे लोगों को जीवनदान मिलता है। रक्तदान न केवल किसी का जीवन बचाता है, बल्कि रक्त करने वाले को भी स्वस्थ रखता है। इस तरह यह दोनो के लिए लाभकारी है। इसलिए 18 से 50 साल तक के लोगों को नियमित रूप से हर तीन माह पर या फिर साल में एक बार रक्त का दान अवश्य करना चाहिए।
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-डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल