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कूड़े के ढेर में पड़ी मिलीं तीन लाख की एक्सपायर्ड दवाएं
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लखीमपुर खीरी। देवकली रोड पर शनिवार सुबह कूड़े के ढेर में अंग्रेेेजी दवाओं का जखीरा पड़ा मिलने से सनसनी फैल गई। दवाएं नौ कंपनियों की हैं, जिनकी कीमत तीन लाख रुपये बताई गई है। दवाएं 2018 की एक्सपायर्ड हैं। संकटा देवी चौकी पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे एसीएमओ ने दवाओं को स्टोर में रखवा दिया है। उधर ड्रग इंस्पेक्टर ने दवा फेंकने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है।
एसीएमओ डॉ. अश्वनि कुमार ने बताया कि शनिवार सुबह देवकली रोड पर भंसडिया क्रॉसिंग के निकट दवाएं पड़ी होने की सूचना मिली। एसीएमओ ने फार्मासिस्ट परमानंद एवं सत्यप्रकाश के साथ दवाओं को छह बोरियों में भरवाकर स्टोर में रखवा दिया। उन्होंने बताया कि दवाएं 2018 में एक्सायर हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि एक्सपायर्ड दवाओं को इस तरह खुले में फेंकना गलत है। इससे संक्रमण फैलने के साथ खाने से पशुओं की जान भी जा सकती है। दवाएं किस मेडिकल स्टोर या फिर अस्पताल से लाकर फेंकी गई है, इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
एक्सपायर्ड दवाओं को खत्म करने का यह है नियम
ड्रग इंस्पेकटर सुनील रावत बताते हैं कि दवाओं को इस तरह खुले में नहीं फेंकना चाहिए। इससे प्रदूषण तो होता ही है जानवरों के खाने का भी अंदेशा रहता है। इसलिए एक्सपायर्ड दवाओं को नष्ट करने के लिए जमीन में चार फुट का गड्ढा खोदकर दबा देना चाहिए, जिससे इन दवाओं से किसी को नुकसान न पहुंच सके।
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कूड़े में नौ कंपनियों की करीब तीन लाख की एक्सपायर्ड दवाएं पड़ी मिली हैं। इनके निर्माताओं को नोटिस भेजकर शहर के स्टॉकिस्ट का पता लगाया जाएगा, जिससे दवाएं फेंकने वाले की जानकारी कर रिपोर्ट लिखाई जा सके।
-सुनील रावत, ड्रग इंस्पेक्टर
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एसीएमओ डॉ. अश्वनि कुमार ने बताया कि शनिवार सुबह देवकली रोड पर भंसडिया क्रॉसिंग के निकट दवाएं पड़ी होने की सूचना मिली। एसीएमओ ने फार्मासिस्ट परमानंद एवं सत्यप्रकाश के साथ दवाओं को छह बोरियों में भरवाकर स्टोर में रखवा दिया। उन्होंने बताया कि दवाएं 2018 में एक्सायर हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि एक्सपायर्ड दवाओं को इस तरह खुले में फेंकना गलत है। इससे संक्रमण फैलने के साथ खाने से पशुओं की जान भी जा सकती है। दवाएं किस मेडिकल स्टोर या फिर अस्पताल से लाकर फेंकी गई है, इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
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एक्सपायर्ड दवाओं को खत्म करने का यह है नियम
ड्रग इंस्पेकटर सुनील रावत बताते हैं कि दवाओं को इस तरह खुले में नहीं फेंकना चाहिए। इससे प्रदूषण तो होता ही है जानवरों के खाने का भी अंदेशा रहता है। इसलिए एक्सपायर्ड दवाओं को नष्ट करने के लिए जमीन में चार फुट का गड्ढा खोदकर दबा देना चाहिए, जिससे इन दवाओं से किसी को नुकसान न पहुंच सके।
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कूड़े में नौ कंपनियों की करीब तीन लाख की एक्सपायर्ड दवाएं पड़ी मिली हैं। इनके निर्माताओं को नोटिस भेजकर शहर के स्टॉकिस्ट का पता लगाया जाएगा, जिससे दवाएं फेंकने वाले की जानकारी कर रिपोर्ट लिखाई जा सके।
-सुनील रावत, ड्रग इंस्पेक्टर