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अब स्क्रबटाइफस बुखार का कहर, चूहों ने फैलाई बीमारी
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लखीमपुर खीरी। जिले में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान धड़ाम होने से गंदगी का अंबार है। यही वजह है कि बुखार के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। बुखार पीड़ितों के रक्त की हुई जांच रिपोर्ट चौंकाने वाली आई है। अभी तक सिर्फ मच्छरजनित बीमारियां चिकनगुनियां, मलेरिया, जापानी इंफेलाइटिस और डेंगू ही कहर बरपा रही थीं, मगर घर के चूहों ने भी कई लोगों को एक गंभीर बीमारी का मरीज बना दिया है। यह बीमारी है- स्क्रब टाइफस बुखार। चूहों की त्वचा पर रहने वाले पिस्सू के काटने से इस बीमारी ने 11 लोगों को अपनी गिरफ्त में लिया है। जांच रिपोर्ट में उन्हें स्क्रब टाइफस की पष्टि हुई है। इससे स्वास्थ्य विभाग भी सकते में है। हालांकि विभागीय अफसरों का दावा है कि अब ये सभी लोग पूरी तरह से स्वस्थ है।
ऐसे फैलता है स्क्रबटाइफस
पिस्सू के काटते ही उसकी लार में मौजूद जीवाणु रिक्टशिया सुसुगामुशी मानव रक्त में फैल जाता है। सुसुगामुशी दो शब्दों से मिलकर बना है। सुसुगा का मतलब छोटा एवं खतरनाक और मुशी का मतलब माइट वायरस। इससे लिवर, दिमाग एवं फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है।
स्क्रबटाइफस के लक्षण
पिस्सू काटने से तेज बुखार आता है। सिरदर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द के साथ कमजोरी आने लगती है। जिस जगह पर पिस्सू काटता है वहां पर फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान बन जाता है। समय पर इलाज न होने से यह रोग निमोनिया का रूप ले सकता है। गंभीर स्थिति में पीड़ित बेहोशी की हालत में चला जाता है और प्लेटलेट्स की कमी होने लगती है।
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जिले में मिले रोगी
डेंगू-29
चिकनगुनियां- 11
जेई- आठ
स्क्रबटाइफस- 11
घरों में न रहें नंगे पैर
स्क्रब टाइफस रोग का वाहक पिस्सू है, जो चूहे, बिल्ली, छछुंदर, गिलहरी आदि के शरीर पर रहते हैं। पिस्सू के काटने से इसकी लार में मौजूद जीवाणु मानव शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिसके बाद तेज बुखार आने लगता है। इसलिए न तो घर में नंगे पैर रहें और न ही नंगे पैरों खेतों में जाएं। घरों में चूहों को न पनपने दें। बुखार आदि आने पर सरकारी अस्पताल में दिखाएं। -डॉ. आरपी दीक्षित, एसीएमओ
बुखार आने पर लापरवाही न करें। नजदीकी सरकारी अस्पताल जाकर इलाज कराएं। सीएचसी अधीक्षकों को निर्देशित किया गया कि लोगों को इस बीमारी के होने का कारण और बचाव के बारे में जागरूक करें। -डॉ. रविंद्र शर्मा, एसीएमओ एवं प्रभारी सीएमओ
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ऐसे फैलता है स्क्रबटाइफस
पिस्सू के काटते ही उसकी लार में मौजूद जीवाणु रिक्टशिया सुसुगामुशी मानव रक्त में फैल जाता है। सुसुगामुशी दो शब्दों से मिलकर बना है। सुसुगा का मतलब छोटा एवं खतरनाक और मुशी का मतलब माइट वायरस। इससे लिवर, दिमाग एवं फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है।
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स्क्रबटाइफस के लक्षण
पिस्सू काटने से तेज बुखार आता है। सिरदर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द के साथ कमजोरी आने लगती है। जिस जगह पर पिस्सू काटता है वहां पर फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान बन जाता है। समय पर इलाज न होने से यह रोग निमोनिया का रूप ले सकता है। गंभीर स्थिति में पीड़ित बेहोशी की हालत में चला जाता है और प्लेटलेट्स की कमी होने लगती है।
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जिले में मिले रोगी
डेंगू-29
चिकनगुनियां- 11
जेई- आठ
स्क्रबटाइफस- 11
घरों में न रहें नंगे पैर
स्क्रब टाइफस रोग का वाहक पिस्सू है, जो चूहे, बिल्ली, छछुंदर, गिलहरी आदि के शरीर पर रहते हैं। पिस्सू के काटने से इसकी लार में मौजूद जीवाणु मानव शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिसके बाद तेज बुखार आने लगता है। इसलिए न तो घर में नंगे पैर रहें और न ही नंगे पैरों खेतों में जाएं। घरों में चूहों को न पनपने दें। बुखार आदि आने पर सरकारी अस्पताल में दिखाएं। -डॉ. आरपी दीक्षित, एसीएमओ
बुखार आने पर लापरवाही न करें। नजदीकी सरकारी अस्पताल जाकर इलाज कराएं। सीएचसी अधीक्षकों को निर्देशित किया गया कि लोगों को इस बीमारी के होने का कारण और बचाव के बारे में जागरूक करें। -डॉ. रविंद्र शर्मा, एसीएमओ एवं प्रभारी सीएमओ