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निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना से जोड़ने में सिस्टम फेल
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लखीमपुर खीरी। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को लेकर जिले का सिस्टम कितना संजीदा है। इसका इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक साल बीतने को है, लेकिन जिले के अधिकारी सिर्फ दस अस्पतालों को ही योजना से जोड़ पाए हैं। जबकि इसमें चार सरकारी अस्पताल शामिल हैं। हालांकि जिम्मेदारों का कहना है कि कई अन्य निजी अस्पताल संपर्क में हैं, जल्द ही इन्हें भी योजना में शामिल किया जाएगा।
गरीबों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मोदी ने आयुष्मान योजना शुरू की। इसमें गरीबों को पांच लाख रुपये तक का इलाज कराने की सुविधा दी। इसमें उन परिवारों को शामिल किया गया, जिनका 2011 की आर्थिक जनगणना सूची में नाम था। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के लोगों को निजी अस्पतालों को इससे जोड़ने के निर्देश दिए, जिससे गरीब निजी अस्पताल में भी पांच लाख रुपये तक इलाज करा सके, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता का आलम यह है कि एक साल में सिर्फ दस अस्पतालों को ही योजना में शामिल कर सके। जबकि इसमें चार सरकारी अस्पताल हैं। सीएमओ से लेकर आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी एक साल में सिर्फ छह अस्पतालों को ही योजना से जोड़ पाए। जबकि जिले में 70 से अधिक निजी अस्पताल उनके कार्यालय में पंजीकृत हैं।
योजना में शामिल सरकारी अस्पताल
जिला अस्पताल
महिला अस्पताल
सीएचसी गोला
सीएचसी पलिया
निजी अस्पताल
डॉ. श्राफ चैरिटेबिल अस्पताल, सहदेवा मोहम्मदी
मोहन आई हॉस्पिटल राजापुर लखीमपुर
एसएस हॉस्पिटल, राजापुर लखीमपुर
सृजन हॉस्पिटल, लखीमपुर
सलूजा नर्सिंग होम, लखीमपुर
वनबीट अस्पताल, भीरा
जिले में सीएचसी- 15
पंजीकृत निजी अस्पताल- 70 से अधिक
निजी अस्पतालों केे जोड़ने का हो रहा प्रयास
आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी और एसीएमओ डॉ. बीसी पंत का कहना है कि कई बार निजी अस्पताल संचालकों के साथ बैठक कर उन्हें योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इसमें कुछ तैयार भी हुए हैं। जिन्हें शामिल कर लिया गया है। कुछ संचालक सहमत हैं। जल्द ही इन्हें भी योजना में शामिल किया जाएगा।
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आयुष्मान योजना से निजी अस्पतालों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों से भी बात हुई है। कई अस्पताल संचालकों ने योजना से जुड़ने की इच्छा जताई है। जल्द ही इन्हें शामिल कर लिया जाएगा।
- डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ
आयुष्मान योजना के तहत 31 अगस्त तक 91 मरीजों का उपचार किया गया। इसमें कुछ गर्भवती महिलाएं तो कुछ अन्य बीमारियों के मरीज हैं।
- डॉ. गरिमा अखिलेश वर्मा, सजृन हॉस्पिटल
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गरीबों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मोदी ने आयुष्मान योजना शुरू की। इसमें गरीबों को पांच लाख रुपये तक का इलाज कराने की सुविधा दी। इसमें उन परिवारों को शामिल किया गया, जिनका 2011 की आर्थिक जनगणना सूची में नाम था। प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के लोगों को निजी अस्पतालों को इससे जोड़ने के निर्देश दिए, जिससे गरीब निजी अस्पताल में भी पांच लाख रुपये तक इलाज करा सके, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता का आलम यह है कि एक साल में सिर्फ दस अस्पतालों को ही योजना में शामिल कर सके। जबकि इसमें चार सरकारी अस्पताल हैं। सीएमओ से लेकर आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी एक साल में सिर्फ छह अस्पतालों को ही योजना से जोड़ पाए। जबकि जिले में 70 से अधिक निजी अस्पताल उनके कार्यालय में पंजीकृत हैं।
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योजना में शामिल सरकारी अस्पताल
जिला अस्पताल
महिला अस्पताल
सीएचसी गोला
सीएचसी पलिया
निजी अस्पताल
डॉ. श्राफ चैरिटेबिल अस्पताल, सहदेवा मोहम्मदी
मोहन आई हॉस्पिटल राजापुर लखीमपुर
एसएस हॉस्पिटल, राजापुर लखीमपुर
सृजन हॉस्पिटल, लखीमपुर
सलूजा नर्सिंग होम, लखीमपुर
वनबीट अस्पताल, भीरा
जिले में सीएचसी- 15
पंजीकृत निजी अस्पताल- 70 से अधिक
निजी अस्पतालों केे जोड़ने का हो रहा प्रयास
आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी और एसीएमओ डॉ. बीसी पंत का कहना है कि कई बार निजी अस्पताल संचालकों के साथ बैठक कर उन्हें योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इसमें कुछ तैयार भी हुए हैं। जिन्हें शामिल कर लिया गया है। कुछ संचालक सहमत हैं। जल्द ही इन्हें भी योजना में शामिल किया जाएगा।
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आयुष्मान योजना से निजी अस्पतालों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों से भी बात हुई है। कई अस्पताल संचालकों ने योजना से जुड़ने की इच्छा जताई है। जल्द ही इन्हें शामिल कर लिया जाएगा।
- डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ
आयुष्मान योजना के तहत 31 अगस्त तक 91 मरीजों का उपचार किया गया। इसमें कुछ गर्भवती महिलाएं तो कुछ अन्य बीमारियों के मरीज हैं।
- डॉ. गरिमा अखिलेश वर्मा, सजृन हॉस्पिटल