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मिटता जा रहा है रैनागंज गांव का वजूद
बिजुआ।
Updated Fri, 31 Jul 2015 06:12 PM IST
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रैनागंज... कभी इस गांव से शारदा सात किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में बहा करती थी। गांव से उत्तर दिशा में ही रामनगर कलां गांव बसा था। बीते 25 साल में शारदा साल दर साल अपना वजूद बढ़ाती चली गई। सात किलोमीटर का दायरा भी खत्म हो गया। अब पिछले 15 दिनों में शारदा ने कटान कर रैनागंज गांव की करीब 70 एकड़ जमीन और चार घरों को लील लिया। गांव का स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र महज 60 कदम की दूरी पर रह गए हैं।
शुक्रवार को शारदा नदी में पानी बढ़ने के साथ ही रैनागंज गांव के पास कटान में तेजी आ गई। नदी कटान की जद में आने वाले करीब दो दर्जन परिवार नए ठिकाने की तलाश में जुट गए है, अब तक चार घर नदी में समा चुके हैं। जबकि एक दर्जन नदी में समाने के कगार पर हैं।
गोला तहसील के गांव रैनागंज में शारदा नदी का कटान जारी है। गांव के सुरेश, रामलाल, जसकरन, लल्लन का घर नदी में समा चुका है। वहीं नदी कटान की जद में आए लालाराम, विपिन, नेकीराम, सुरेश, महेश, बंशी, गयाप्रसाद, विष्णु, रहमत अली, मुशर्रफ, रामस्वरूप, हरद्वारी, भग्गा, सतीश, सेवाराम अपने-अपने घरों को तोड़कर नई जगह की तलाश में जुटे हैं।
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पांचवी बार नदी के निशाने पर आए लोग
बिजुआ। रैनागंज गांव में कटान की जद में आए लल्लन, मुर्शरफ, रहमत अली के घर पांचवी बार शारदा के निशाने पर हैं। यहां रह रहे अधिकतर लोग मूल रूप से रामगनर कलां के निवासी हैं, लेकिन शारदा ने रामनगर कला गांव का वजूद मिटा दिया, ये लोग भी हर बार कटान में घर कट जाने के बाद नए ठिकाने पर बस जाते हैं। करीब 15 साल पहले ये लोग रैनागंज गांव को महफूज समझ कर यहां आ बसे थे। पिछले पखवाड़े से रैनागंज में कटान शुरू होते ही एक बार फिर से ये लोग पांचवी बार अपना घर उजाड़ रहे हैं।
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सरकारी इमारतों की ओर बढ़ रही शारदा
रैनागंज गांव में बना प्राइमरी और पूर्व माध्यमिक स्कूल और इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र, सड़क भी कटान की जद में आ रहे हैं।
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शुक्रवार को शारदा नदी में पानी बढ़ने के साथ ही रैनागंज गांव के पास कटान में तेजी आ गई। नदी कटान की जद में आने वाले करीब दो दर्जन परिवार नए ठिकाने की तलाश में जुट गए है, अब तक चार घर नदी में समा चुके हैं। जबकि एक दर्जन नदी में समाने के कगार पर हैं।
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गोला तहसील के गांव रैनागंज में शारदा नदी का कटान जारी है। गांव के सुरेश, रामलाल, जसकरन, लल्लन का घर नदी में समा चुका है। वहीं नदी कटान की जद में आए लालाराम, विपिन, नेकीराम, सुरेश, महेश, बंशी, गयाप्रसाद, विष्णु, रहमत अली, मुशर्रफ, रामस्वरूप, हरद्वारी, भग्गा, सतीश, सेवाराम अपने-अपने घरों को तोड़कर नई जगह की तलाश में जुटे हैं।
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पांचवी बार नदी के निशाने पर आए लोग
बिजुआ। रैनागंज गांव में कटान की जद में आए लल्लन, मुर्शरफ, रहमत अली के घर पांचवी बार शारदा के निशाने पर हैं। यहां रह रहे अधिकतर लोग मूल रूप से रामगनर कलां के निवासी हैं, लेकिन शारदा ने रामनगर कला गांव का वजूद मिटा दिया, ये लोग भी हर बार कटान में घर कट जाने के बाद नए ठिकाने पर बस जाते हैं। करीब 15 साल पहले ये लोग रैनागंज गांव को महफूज समझ कर यहां आ बसे थे। पिछले पखवाड़े से रैनागंज में कटान शुरू होते ही एक बार फिर से ये लोग पांचवी बार अपना घर उजाड़ रहे हैं।
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सरकारी इमारतों की ओर बढ़ रही शारदा
रैनागंज गांव में बना प्राइमरी और पूर्व माध्यमिक स्कूल और इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र, सड़क भी कटान की जद में आ रहे हैं।