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Lakhimpur Kheri News: बिना बजट और इंतजामों के बीच 31 से होंगी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं
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लखीमपुर खीरी। जिले में संचालित हो रहे 3106 परिषदीय स्कूलों में 31 अक्तूबर से अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं होनी है। विभागीय अधिकारियों ने परीक्षा को लेकर कमर कस ली है। सूत्रों के अनुसार, परीक्षा को लेकर तैयारियां अधूरी होने के साथ ही आधा कोर्स भी पूरा नहीं कराया जा सका है। परीक्षा का सारा बोझ स्कूल के प्रधानाचार्यों पर डाल दिया गया है।
परिषदीय विद्यालयों में वार्षिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं कराने को लेकर विभाग की तरफ से बजट जारी होता था। लेकिन बीते दो सालों से शासन स्तर से बजट ही नहीं मिल रहा है। इस बार भी 31 अक्तूबर को विद्यालयों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं होनी हैं। विभागीय आदेश मिलने के बाद प्रधानाचार्यों में आक्रोश देखा जा रहा है। अध्यापकों का कहना है कि जब विभाग बजट ही मुहैया नहीं करा रहा है, तो परीक्षाएं क्यों करा रहा है।
विभागीय कर्मचारियों का कहना था कि पहले परिषदीय स्कूलों में परीक्षाओं के लिए पांच रुपये प्रति बच्चा प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल में पंजीकृत बच्चों के लिए 15 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से बजट दिया जाता था। लेकिन इस बार शासन की ओर से आए पत्र में प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर से प्रश्नपत्र तैयार कराकर परीक्षाएं कराएं। 31 अक्टूबर से शुरू होने वाली अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 10 नवंबर तक चलेंगी। परीक्षाओं को लेकर शिक्षक असमंजस में हैं।
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न कॉपी न पेपर, कैसे होंगी परीक्षाएं
परिषदीय विद्यालयों में होने वाली परीक्षाओं को लेकर प्रधानाचार्यों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। विद्यालयों में न तो परीक्षा के लिए कॉपियां उपलब्ध हैं और न ही पेपर बनाए गए हैं। ऐसे में परीक्षाएं किस तरह से होंगी यह भगवान भरोसे है। जिले में 5,52,927 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। विभागीय अधिकारी भी अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं को लेकर सजग नहीं दिखाई दे रहे हैं।
छात्रहित में अध्यापक अपनी जेब से कराते हैं परीक्षाएं
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजीव त्रिपाठी ने बताया कि परीक्षाओं में खर्च होने वाली धनराशि का इंतजाम करना विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर प्रधानाचार्य अपनी जेब से रुपये खर्च करने को मजबूर हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर मंगलवार को बीएसए से मुलाकात करते हुए समाधान कराया जाएगा।
परीक्षाओं को लेकर शासन से बजट के लिए डिमांड भेजी गई है। वैसे भी विभागीय कार्य करने वाली फर्म क्रेडिट पर कार्य करती है। बजट आने पर भुगतान कर दिया जाता है।
प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए
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परिषदीय विद्यालयों में वार्षिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं कराने को लेकर विभाग की तरफ से बजट जारी होता था। लेकिन बीते दो सालों से शासन स्तर से बजट ही नहीं मिल रहा है। इस बार भी 31 अक्तूबर को विद्यालयों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं होनी हैं। विभागीय आदेश मिलने के बाद प्रधानाचार्यों में आक्रोश देखा जा रहा है। अध्यापकों का कहना है कि जब विभाग बजट ही मुहैया नहीं करा रहा है, तो परीक्षाएं क्यों करा रहा है।
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विभागीय कर्मचारियों का कहना था कि पहले परिषदीय स्कूलों में परीक्षाओं के लिए पांच रुपये प्रति बच्चा प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल में पंजीकृत बच्चों के लिए 15 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से बजट दिया जाता था। लेकिन इस बार शासन की ओर से आए पत्र में प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर से प्रश्नपत्र तैयार कराकर परीक्षाएं कराएं। 31 अक्टूबर से शुरू होने वाली अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 10 नवंबर तक चलेंगी। परीक्षाओं को लेकर शिक्षक असमंजस में हैं।
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न कॉपी न पेपर, कैसे होंगी परीक्षाएं
परिषदीय विद्यालयों में होने वाली परीक्षाओं को लेकर प्रधानाचार्यों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। विद्यालयों में न तो परीक्षा के लिए कॉपियां उपलब्ध हैं और न ही पेपर बनाए गए हैं। ऐसे में परीक्षाएं किस तरह से होंगी यह भगवान भरोसे है। जिले में 5,52,927 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। विभागीय अधिकारी भी अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं को लेकर सजग नहीं दिखाई दे रहे हैं।
छात्रहित में अध्यापक अपनी जेब से कराते हैं परीक्षाएं
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजीव त्रिपाठी ने बताया कि परीक्षाओं में खर्च होने वाली धनराशि का इंतजाम करना विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर प्रधानाचार्य अपनी जेब से रुपये खर्च करने को मजबूर हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर मंगलवार को बीएसए से मुलाकात करते हुए समाधान कराया जाएगा।
परीक्षाओं को लेकर शासन से बजट के लिए डिमांड भेजी गई है। वैसे भी विभागीय कार्य करने वाली फर्म क्रेडिट पर कार्य करती है। बजट आने पर भुगतान कर दिया जाता है।
प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए