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आधी पंचायतों में घूंघट की ओट से ही चलेगी प्रधानी
लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 20 Dec 2015 11:26 PM IST
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पंचायत चुनाव में इस बार महिलाओं ने अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है। घर की दहलीज लांघ कर महिलाओं ने अपने लिए आरक्षित 33 प्रतिशत सीटों के सापेक्ष करीब 47 फीसदी सीटों पर कब्जा जमाया है। इसके बावजूद चुनाव प्रचार से लेकर शपथ लेने तक जो सबसे अखरने वाली बात सामने आई है वह यह है कि पहले प्रत्याशी और प्रधान बनने के बाद भी वे पर्दे के पीछे ही नजर आईं।
चुनाव के दौरान महिला प्रत्याशियों के प्रचार में जो पोस्टर आदि छापे गए उनपर नाम जरूर महिला उम्मीदवारों के थे लेकिन उनके फोटो की जगह उनके पति, पिता या पुत्र का फोटो छापा था। चुनाव जनसंपर्क के दौरान भी महिलाएं अपने घर में चूल्हा चौका ही संभालती रहीं। जबकि उनके पति, पिता या पुत्र चुनाव प्रचार करते नजर आए। महिला उम्मीदवारों की जगह उनके घर के पुरुष मुखिया ने ही चुनाव लड़ा था।
पंचायतों का गठन और महिलाओं के प्रधान पद की शपथ लेने के बाद जिले में मुश्किल से पांच फीसदी ऐसी महिला प्रधान हैं जो पंचायत की कमान अपने हाथों में रखने वाली हैं। बाकी 95 फीसदी महिला प्रधानों की कमान उनके घर के मुखिया के पास रहना निश्चित है। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान इसकी झलक साफ दिखाई दी। महिला प्रधानों ने पद की शपथ जरूर ली लेकिन उनके पति पिता या पुत्र ही सारी गतिविधियों में आगे-आगे नजर आए। महिलाएं कोने में गुमसुम बैठी या बतियाती नजर आईं।
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जिले के 15 ब्लाकों की 1167 सीटों में से 393 सीटें महिलाओं के आरक्षित थीं। जबकि यहां कुल 507 महिलाओं ने अपनी जीत दर्ज कराई है। सबसे ज्यादा महिलाएं लखीमपुर ब्लाक में चुनाव जीती हैं। लखीमपुर ब्लाक में कुल 109 सीटे थीं। इनमें 36 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं। इनमें 52 महिलाएं चुनाव जीत कर प्रधान बनी हैं। आशंका यह है कि घूंघट की ओट से प्रधानी करने वाली महिलाओं के ग्राम पंचायत की कमान उनके घर के पुरुष मुखिया के हाथों में ही रहने वाली है।
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चुनाव के दौरान महिला प्रत्याशियों के प्रचार में जो पोस्टर आदि छापे गए उनपर नाम जरूर महिला उम्मीदवारों के थे लेकिन उनके फोटो की जगह उनके पति, पिता या पुत्र का फोटो छापा था। चुनाव जनसंपर्क के दौरान भी महिलाएं अपने घर में चूल्हा चौका ही संभालती रहीं। जबकि उनके पति, पिता या पुत्र चुनाव प्रचार करते नजर आए। महिला उम्मीदवारों की जगह उनके घर के पुरुष मुखिया ने ही चुनाव लड़ा था।
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पंचायतों का गठन और महिलाओं के प्रधान पद की शपथ लेने के बाद जिले में मुश्किल से पांच फीसदी ऐसी महिला प्रधान हैं जो पंचायत की कमान अपने हाथों में रखने वाली हैं। बाकी 95 फीसदी महिला प्रधानों की कमान उनके घर के मुखिया के पास रहना निश्चित है। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान इसकी झलक साफ दिखाई दी। महिला प्रधानों ने पद की शपथ जरूर ली लेकिन उनके पति पिता या पुत्र ही सारी गतिविधियों में आगे-आगे नजर आए। महिलाएं कोने में गुमसुम बैठी या बतियाती नजर आईं।
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जिले के 15 ब्लाकों की 1167 सीटों में से 393 सीटें महिलाओं के आरक्षित थीं। जबकि यहां कुल 507 महिलाओं ने अपनी जीत दर्ज कराई है। सबसे ज्यादा महिलाएं लखीमपुर ब्लाक में चुनाव जीती हैं। लखीमपुर ब्लाक में कुल 109 सीटे थीं। इनमें 36 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं। इनमें 52 महिलाएं चुनाव जीत कर प्रधान बनी हैं। आशंका यह है कि घूंघट की ओट से प्रधानी करने वाली महिलाओं के ग्राम पंचायत की कमान उनके घर के पुरुष मुखिया के हाथों में ही रहने वाली है।