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अलविदा छोटी लाइन

Fri, 14 Oct 2016 10:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। Updated Fri, 14 Oct 2016 10:53 PM IST
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Goodbye little line
रेल - फोटो : अमर उजाला
जून 2017 तक बड़ी लाइन बनाने का लक्ष्य
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शुक्रवार बना मीटर गेज के लिए इतिहास, सीतापुर-मैलानी रूट पर शुक्रवार को अंतिम दिन चली ट्रेनें 

1887 से लखीमपुर को सीतापुर और गोला से जोड़ने वाली छोटी रेल लाइन के लिए शुक्रवार का दिन अंतिम रहा। आने वाले दिनों में यहां बड़ी लाइन की ट्रेेनें चला करेंगी। जून 2017 तक बड़ी रेल लाइन बनाकर पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया। इसी के चलते मेगा ब्लाग लिया जा रहा है। 
129 साल और छह माह तक जिले के लोगों को यात्रा कराने वाली छोटी लाइन की ट्रेनें शुक्रवार को अपने आखिरी सफर पिर निकलीं तो तो गायत्री परिवार के लोगों ने चालकों और गार्डों का तिलक करके रवाना किया। छोटी लाइन की ट्रेनों को विदाई देने के लिए शुक्रवार को स्टेशन पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कुछ लोग मीटरगेज की ट्रेनों से सफर करने के लिए स्टेशन पर पहुंचे तो कुछ लोग इतिहास बनने जा रहीं ट्रेनों को देखने के लिए। शहरवासियों के साथ-साथ यात्रियों में इतिहास बनने जा रही मीटर गेज की ट्रेनों को अपने कैमरों में कैद करने,  सेल्फी लेने के लिए होड़ लगी रही। वहीं अनुराग मौर्या के नेतृत्व में गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ के लोगों ने मैलानी-सीतापुर रेलखंड पर सीतापुर जा रही 52241 के चालक अतुल कुमार, सुंदर लाल, गार्ड अरविंद कुमार तथा सीतापुर से आ रही 52242 के चालक आरएन शाह, शंकर लाल मीना एवं गार्ड नन्हे लाल का तिलक करके रवाना किया।
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स्कूली बच्चे बोले, अब होगी मुसीबत
गोला निवासी अनुष्किा यादव भगवानदीन आर्य कन्या डिग्री कॉलेज की छात्रा है। वह बताती हैं कि कम किराए में लखीमपुर से वापसी हो जाती थी, लेकिन शनिवार से बस या टैक्सी से आने के लिए ज्यादा पैसे खर्च होंगे।
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आर्यकन्या डिग्री कॉलेज की छात्रा रागिनी का कहना है कि ट्रेनों के बंद हो जाने से बस और टैक्सियों में भीड़ भी बढ़ेगी, जिससे खास तौर पर महिला यात्रियों को दिक्कत होगी और ज्यादा पैसे देने के बाद भी सफर कठिनाई भरा होगा।

गोला निवासी भगवानदीन आर्य कन्या डिग्री कॉलेज की छात्रा शालिनी मिश्रा का कहना है कि अब पढ़ाई और महंगी हो जाएगी। अब तक कम पैसों में आराम से लखीमपुर आते-जाते थे, लेकिन अब पैसे भी ज्यादा खर्च होंगे और मुसीबत भी होगी।

रोजी रोटी के संकट से परेशान हैं साजिद और भारत
ट्रेन यात्रियों का माल ढोने वाले भारत और वेंडर साजिद के सामने रोजी रोटी का संकट है। दोनों बताते हैं कि छोटी लाइन की ट्रेनें हमारी रोजी रोटी का साधन थीं, लेकिन शुक्रवार को ट्रेनों के बंद हो जाने से वह भी चली गई। बच्चों का पेट तो पालना ही है, अब कहीं बाहर मजदूरी करनी होगी। 

छोटी लाइन से सीखा, बड़ी लाइन का मिलेगा अनुभव
छोटी लाइन से नौकरी शुरू करने वाले स्टेशन अधीक्षक आनंद स्वरूप श्रीवास्तव की सर्विस दो साल बची है। वह बेहद खुश हैं कि उन्होंने करीब 30 साल तक मीटर गेज पर ट्रेन चलाकर सीखा और अब बड़ी लाइन का अनुभव लेंगे। इसी तरह स्टेशन पर तैनात टोकन मैन जयप्रकाश नरायण शर्मा और मुख्य टिकट संग्राहक बलवीर शर्मा का कहना है कि छोटी लाइन से कुछ दिक्कतें थीं तो आराम भी था। छोटी लाइन को इतिहास बनते देखकर दु:ख तो हुआ, साथ ही इस बात की खुशी भी हुई कि अब अपना जिला भी ब्राड़गेज से जुड़ने जा रहा है।

मैलानी से 52243 पैसेंजर रही सीतापुर की आखिरी ट्रेन
मैलानी।  मेगा ब्लाक लिए जाने से पहले मैलानी-सीतापुर के बीच 52243 अप पैसेंजर  मीटर गेज की आखिरी ट्रेन साबित हुई। इस ट्रेन की तमाम लोगों ने अपने मोबाइल  से फोटो भी खींची, ताकि इस आखिरी ट्रेन की फोटो को वे सहेजकर रख सकें और  भावी पीढ़ी को सीतापुर जाने वाली आखिरी ट्रेन की फोटो को दिखा सकें। कई लोग  सीतापुर खंड की मीटर गेज की ट्रेनों की विदाई को देखकर भावुक भी हो गए और  हों भी क्यों न क्योंकि बरसों तक इसी मीटर गेज ने सबको उनके गंतव्य तक  पहुंचाया था।

तब भी तारीख 15 थी...और अब भी
लखीमपुर खीरी। इसे संयोग कहें या फिर कोई वजह...फिलहाल जब छोटी लाइन की शुरुआत हुई तो टुकड़ों में थी और हर जंक्शन से चली पहली ट्रेन का वर्ष चाहे जो रहा हो, तारीख 15 ही रही। अब मेगा ब्लाक भी 15 तारीख को ही लिया गया।
सबसे पहले सूबे की राजधानी लखनऊ से छोटी लाइन की शुरुआत चारबाग से सीतापुर की बीच 15 नवंबर 1886 को हुई। तब भाप के इंजन वाली ट्रेन चली थी, जिसमें चंद बोगियां ही थीं, जो बाद में बढ़ती रहीं। इसके बाद सीतापुर से लखीमपुर के बीच 15 अप्रैल 1887 को पहली ट्रेन चली। फिर लखीमपुर से गोला के बीच 15 दिसंबर 1887 के बीच ट्रेन चली। इतने साल तक छोटी लाइन पर दौड़ी ट्रेन बंद हुई तो वह तारीख 15 अक्तूबर रही।


सीतापुर-मैलानी के बीच शुक्रवार की आधी रात से मीटरगेज की लाइन का संचालन बंद कर दिया गया है। कार्यदायी संस्था को जून  2017 तक ब्राडगेज पूरा किए जाने का लक्ष्य दिया गया है। इसके बाद कई ट्रॉयल होंगे, तब ब्राडगेज की ट्रेनों का सफर शुरू कराया जाएगा।
-आलोक श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे, लखनऊ
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