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लखीमपुर खीरी: सैलानियों के लिए सोमवार से खुलेगा दुधवा नेशनल पार्क, सुबह आठ बजे होगा उद्घाटन

Sun, 14 Nov 2021 07:09 PM IST
सुशील कुमार कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Sun, 14 Nov 2021 07:09 PM IST
सार

कोरोना की गाइडलाइन्स का पालन करते हुए आज से सैलानी दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में प्रकृति के सौंदर्य का दीदार कर सकेंगे। 

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gate of Dudhwa National Park will open for tourists from 15 november completed remaining work before inauguration
दुधवा नेशनल पार्क - फोटो : self

विस्तार

15 नवंबर सोमवार को दुधवा नेशनल पार्क के द्वार सैलानियों के लिए खुल जाएंगे। सोमवार को सुबह आठ बजे प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव की मौजूदगी में उद्घाटन का कार्य किया जाएगा। इससे पहले एफडी, डीडी समेत पार्क के आला अधिकारियों ने रविवार को पूरे दिन तैयारियां का जायजा लिया और उद्घाटन से पहले बचे हुए कार्यों को पूरा कराया। कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए आज से सैलानी दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में में प्रकृति के सौंदर्य का दीदार कर सकेंगे। 

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एक नवंबर से खुलने वाला दुधवा नेशनल पार्क बाढ़ के कारण इस बार 15 नवंबर से सैलानियों के लिए खोला जा रहा है। सोमवार को पार्क में आठ बजे पूजा अर्चना के बाद फीता काटकर नए पर्यटन सत्र का उद्घाटन होगा। इसके बाद सैलानियों को जंगल का भ्रमण कराया जाएगा। उद्घाटन के समय प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव पवन कुमार शर्मा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर कमलेश कुमार, वन निगम के महाप्रबंधक केके सिंह की मौजूदगी में उद्घाटन किया जाएगा। इससे पहले एफडी संजय पाठक, डीडी कैलाश प्रकाश ने अधीनस्थों के साथ रविवार को पूरे दिन व्यवस्थाओं का जायजा लिया और उद्घाटन के लिए होने वाली तैयारियों को अंतिम रूप दिलाया। एफडी ने बताया कि सुबह आठ बजे का समय निर्धारित किया गया है, आगे कार्यक्रम के अनुसार ही कार्य होंगे।
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14 थारू हट और डारमेट्री होगी रुकने का साधन
दुधवा नेशनल पार्क में आने वाले सैलानियों के लिए 14 थारूहट तथा डारमेट्री के साथ ही छह रूम का गेस्ट हाउस रुकने के लिए है। इसके अलावा सठियाना, सोनारीपुर, किशनपुर में भी रुकने का साधन है। हटों की ऑनलाइन बुकिंग होगी।
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किशनपुर में इस बार भी हो सकते हैं बाघ के दीदार
बीते पर्यटन सत्रों में सैलानियों को किशनपुर में बाघ के दीदार होना आम बात था। यहां अक्सर सैलानियों को बाघ के दीदार हो जाते थे। इसमें एक पांच शावकों के साथ घूमती बाघिन को भी बीते वर्षों में सैलानियों ने कैमरे में कैद किया था। उम्मीद है कि इस बार भी सैलानियों को किशनपुर में बाघों के दर्शन होंगे।

सैलानियों के लिए इस प्रकार होगी फीस
भारतीय के लिए एक कॉटेज डबल- 3600 रुपये  
सिंगल के लिए- 2400 रुपये   
विदेशी के लिए डबल- 4800 रुपये  
विदेशी सिंगल- 3000 रुपये  
(ड्रिंक और ब्रेकफास्ट सहित)

डारमेट्री भारतीयों के लिए 10 बेड 11000 रुपये   
डारमेट्री विदेशी के लिए 10 बेड 18500 रुपये  

एंट्री फीस पर ट्रिप - 100 रुपये  
विदेशियों के लिए - 300 रुपये  

गाइड और जिप्सी शुल्क
प्रति गाइड लगभग 400 रुपये प्रति जिप्सी का लेते हैं। बाकी जिप्सी रेट वन निगम की तरफ से 2000 रुपये बुक होता है।

कैसे पहुंचें दुधवा
लखनऊ से वाया सड़क मार्ग से सीतापुर, लखीमपुर, पलिया होते हुए दुधवा जाया जा सकता है, जबकि शाहजहांपुर से खुटार, मैलानी, पलिया होते हुए सैलानी दुधवा पार्क तक पहुंच सकते हैं।
हवाई यात्रा - अगर फ्लाइट से दुधवा टाइगर रिजर्व जाने का प्लान है तो यहां का नजदीकी एयरपोर्ट लखनऊ है जोकि पार्क से 238 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

होटलों में हो सकती है सैलानियों की भीड़
दुधवा के नवीन पर्यटन सत्र में कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए ही हटों में सैलानियों को ठहराया जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि पलिया के होटलों में भी सैलानियों की भीड़ लग सकती है। इसको लेकर होटलों में भी सैलानियों के लिए बेहतर से बेहतर व्यवस्था करने का इंतजाम शुरू कर दिया गया है।

आदिवासी थारू महिलाओं के उत्पादों का लगता है काउंटर
दुधवा नेशनल पार्क में पर्यटन के अलावा यहां पर आदिवासी थारू महिलाओं को भी काफी लाभ होता है। पार्क प्रशासन इनको स्वावलंबी बनाने के लिए इनके हाथों से निर्मित उत्पादों का प्रदर्शन करता है, जो यहां पर आने वाले सैलानी देखते हैं तथा उनकी खरीददारी भी करते हैं। इससे इन थारू महिलाओं को रोजगार का नया अवसर प्रदान तो होता ही है साथ ही थारू संस्कृति का प्रचार-प्रसार भी पार्क प्रशासन के माध्यम से दूर-दूर तक होता है, जिससे महिलाओं के साथ ही पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलता है। आदिवासी थारू महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके उत्पादों को रूप देने के साथ उनकी बिक्री का शिविर भी पर्यटन सत्र शुरू होते ही लगाया जाता है। जिसपर भारी मात्रा में सैलानियों की भीड़ का तांता लगा रहता है। बाहर से आने वाले सैलानी यहां की थारू संस्कृति से परिचित होते हैं। इनके उत्पादों में सबसे ज्यादा अगरबत्ती, मसाले, जूट से बने बैग, डलिया, टोपी, कैप, मोबाइल बैग, पर्स आदि सबसे चर्चित हैं जिनपर सैलानियों का तांता लगा रहता है।


दुधवा नेशनल पार्क 15 नवंबर को सुबह आठ बजे सैलानियों के लिए उद्घाटन और पूजा अर्चना के बाद खोला जाएगा। इसके लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक समेत अन्य अधिकारी पहुंच गए हैं। कोविड गाइडलाइन का पालन करके ही पार्क में सैलानियों को प्रवेश दिया जाएगा। - संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क

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