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खेल प्रतिभाएं तमाम, आड़े आ रही संसाधनों की कमी 

Mon, 28 Aug 2017 10:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो     लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो     लखीमपुर खीरी। Updated Mon, 28 Aug 2017 10:59 PM IST
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Game talent is lacking, lack of resources
Sports - फोटो : अमर उजाला
खेल दिवस पर विशेष            
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संसाधनों, मार्गदर्शन के अभाव में छिपकर रह जाती हैं खेल प्रतिभाएं        
खेल प्रतिभाओं से धनी है नगर व क्षेत्र
      
 29 अगस्त यानी हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्म दिवस को खेल दिवस के रूप में मनाते हैं, लेकिन इस दिन महज कुछ प्रतियोगिताएं होने के बाद इतिश्री कर ली जाती हैं और रह जाती है खेल प्रतिभाओं की हसरतें। वजह है, जिले में खेल मैदान, स्टेडियम और खेल अधिकारियों के होने के बाद भी प्रतिभाएं निखर नहीं पा रही हैं। इसका प्रमाण है जिले में पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राष्ट्रीय स्तर पर कोई खिलाड़ी परचम नहीं लहरा सका।  
नगर और क्षेत्र की गली, मोहल्लों में खेल प्रतिभाएं भरी पड़ी हैं, जिन्हें निखारने की जरूरत है। कभी अव्यवस्थाओं, तो कभी मार्गदर्शन, तो कभी खेल मैदान के अभाव में प्रतिभाएं निखर नहीं पाती हैं। नगर में फुटबाल, बालीबाल और हॉकी जैसे खेल में प्रतिभाओं का धनी रहा है। किंतु इन प्रतिभाओं को उड़ान के लिए उनके सपनों को खुला आसमान नहीं मिल पाया। स्कूल, कॉलेजों में खेल एवं शारीरिक शिक्षा महज किताबों तक ही सिमट कर रह गई हैं।       गोला गोकर्णनाथ। प्रदेश के इलाहाबाद में 29 अगस्त 1905 में जन्में हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की स्मृति में उनके जन्मदिन को वर्ष 1995 में सरकार ने राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में घोषित किया। इससे छुपी खेल प्रतिभाएं अंगड़ाई लेने लगी और उनके अंदर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर चमकने की हसरतें पलने लगीं। किंतु तमाम अव्यवस्थाओं के चलते खेल प्रतिभाएं निखरने की बजाए छुपकर ही रह गईं।       
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गोला में 86 लाख खर्च होने के बाद भी अधूरा है स्टेडियम       
गोला गोकर्णनाथ। नगर में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए पब्लिक इंटर कॉलेज के मैदान में वर्ष 2003 में एक करोड़ 10 लाख के प्रोजेक्ट से स्वर्गीय राजेंद्र गिरि स्टेडियम का निर्माण शुरू हुआ था। जो 86.20 लाख रुपये खर्च होने के बाद आज भी अधूरा पड़ा है। जिसकी महीनों सफाई तक नहीं होती। सीढ़ियों पर घास उगी है और स्टेडियम के अंदर कई स्थानों पर नशेड़ियों, जुआरियों, अराजकतत्वों का जमावड़ा रहता है। स्टेडियम में पशु विचरण करते रहते हैं। वहीं मैदान में खेल प्रतिभाएं ईंटों के विकेट बनाकर क्रिकेट में हाथ आजमाते हैं। नगर व क्षेत्र के लोग कभी कभार टूर्नामेंट कराकर खेल प्रेमियों और खेल प्रतिभाओं को अवसर देते हैं। खेल दिवस पर यह स्टेडियम भी खेल प्रतिभाओं की बाट जोह रहा है।       
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बालीबाल, फुटबाल, हाकी के क्षेत्र में जाना जाता है नगर       
गोला गोकर्णनाथ। नगर का कृषक समाज इंटर कॉलेज हाकी के क्षेत्र में और पब्लिक इंटर कॉलेज फुटबाल के क्षेत्र में आज भी जाना जाता है। खेल प्रेमी बताते हैं कि दो दशक पूर्व गांधी स्मारक बालीबाल के क्षेत्र में जाना जाता था। नगर में रामनाथ अग्निहोत्री, अस्करुल्ला खां, राजेंद्र प्रसाद डींगरा, ईश्वरचंद तिवारी, मधुसूदन गिरि, राजेश गिरि एडवोकेट नोटरी, बिजेंद्र गिरि, विधायक अरविंद गिरि, श्याममूर्ति शुक्ल, रामकुमार सक्सेना, बहीदुल्ला खां, सतीशचंद बाजपेयी जैसे दर्जनों प्रतिभाशाली खिलाड़ी रहे हैं।        
 
युवा खिलाड़ियों ने भी गाड़े हैं झंडे       
गोला गोकर्णनाथ। नगर के युवा खिलाड़ियों ने सीनियर स्कूल चैंपियनशिप में नगर के राजर्षि शुक्ल, महफूज अली, तनवीर नियामत, जहीरुद्दीन, आलोक कुमार, राष्ट्रीय स्तर के हाकी खिलाड़ी देवेश चौहान के साथ ओपेन प्रदेश स्तर पर खेल चुके हैं। वहीं चंदनचौकी के संतोष कुमार राना, नगर के शिवम भारद्वाज जूनियर वर्ग में प्रदेश स्तर पर अपनी चमक बिखेर चुके हैं। लेकिन समय के साथ साथ अभावग्रस्त व्यवस्था में इन खिलाड़ियों की प्रतिभा भी छुपकर रह गई।       
  
प्रोत्साहन की कमी       
गोला गोकर्णनाथ। वर्ष 2000 से पूर्व जनपद स्तर पर बेस्ट प्लेयर और खेल के क्षेत्र में बेस्ट कॉलेज को प्रोत्साहन राशि मिलती थी। जिसे वर्ष 2000 के बाद बंद कर दिया गया। प्रोत्साहन की कमी के चलते खेल प्रतिभाएं उभर नहीं पा रही हैं। खेल शिक्षकों ने खेल प्रतिभाओं को तराशने में प्रोत्साहन को जरूरी बताया है।       
 
क्या कहते हैं खेल शिक्षक
स्कूल, कॉलेजों में खेल को वरीयता दी जानी चाहिए। वर्तमान में प्रतिस्पर्धावादी शिक्षण व्यवस्था में खेल प्रतिभाएं दबकर रह जाती हैं। अभिभावक और विद्यार्थी में खेलों के प्रति लगाव की कमी दिखाई देती है। आज खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की जरूरत है।       
श्याममूर्ति शुक्ल, खेल एवं शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता, कृषक समाज इंटर कॉलेज-गोला।       

खेल, शारीरिक स्वास्थ्य के साथ नेतृत्व क्षमता, प्रेम और एकता, सहन शक्ति, धैर्य का भी परिचायक हैं। नगर व क्षेत्र में हैंडबाल, फुटबाल, हॉकी, बैडमिंटन, ताइक्वांडो आदि की खेल प्रतिभाएं भरी पड़ी हैं। इन प्रतिभाओं को तराशने की जरूरत है।       
डॉ. श्रवण कुमार मौर्य, एथलेटिक्स कोच, पब्लिक इंटर कॉलेज-गोला
 
क्या कहते हैं खिलाड़ी
प्रशिक्षण का अभाव 
गोला गोकर्णनाथ। नगर के कुम्हारन टोला निवासी राजर्षि शुक्ल जो प्रदेश स्तर पर हाकी टूर्नामेंट खेल चुके हैं। उन्होंने कहा कि नगर, क्षेत्र, जिले से राष्ट्रीय स्तर तक के खिलाड़ी निकल सकते हैं, किंतु जानकारी और प्रशिक्षण के अभाव में इन खिलाड़ियों को अवसर नहीं मिल पाता है।      


नहीं मिल पाते मौके 
गोला गोकर्णनाथ। नगर में हैंडबाल के युवा खिलाड़ी मोहम्मद आसिक, इरफान, अमन कुमार, मोबीन का कहना है कि आर्थिक सहयोग, मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और पारिवारिक स्थित ठीक न होने के कारण खिलाड़ियों को मन माफिक मौके नहीं मिल पाते।
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