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दो व्यापारियों समेत तीन लोगों पर छह लाख का जुर्माना
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लखीमपुर खीरी। खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा दायर किए गए मुकदमों की तीन साल तक सुनवाई के बाद एडीएम कोर्ट ने दो व्यापारियों समेत तीन लोगों पर छह लाख रुपये जुर्माना लगाया है। एक मामला पानी पाउच की बिक्री से संबंधित है, जिसे जांच में मिसब्रांड (मिथ्या छाप) पाया गया था। जबकि दूसरा मामला दूध के अधोमानक पाए जाने का है।
एफएसडीए टीम ने जून 2016 में राजापुर क्रॉसिंग के पास एक मकान में संचालित पानी पाउच बनाने वाली फैक्ट्री से सैंपल भरे थे। लैब जांच में पानी पाउच को मिसब्रांड यानी मिथ्याछाप करार दिया गया। इसके बाद तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने नौ अगस्त 2016 को एडीएम कोर्ट में फैक्टरी मालिक ऊषा देवी वर्मा पत्नी अशोक कुमार के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। करीब साढ़े तीन साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद एडीएम कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुना दिया, जिसमें एडीएम ने आरोपी ऊषा देवी को 15 दिन के अंदर 2.50 लाख रुपये जुर्माना जमा करने के आदेश दिए हैं। इसी तरह दूसरे मामले में एफएसडीए टीम ने जुलाई 2017 में पांच पीली कोठी मोहल्ला ईदगाह (मातृछाया मंडप) कोतवाली सदर में ज्ञानेश चंद्र पांडेय की दुकान से दूध का नमूना भरा था, उस समय पर दुकान पर नौकर बांकेलाल निवासी बिचुली चौकी ढखेरवा थाना निघासन मौजूद था। लैब जांच में दूध का नमूना फेल हो गया, जिसमें दूध अधोमानक (सब स्टैंडर्ड) पाया गया। इस मामले में भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने चार सितंबर 2017 को एडीएम कोर्ट में आरोपी व्यापारी और उसके नौकर के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। करीब ढाई साल तक चली सुनवाई के बाद एडीएम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुना दिया है, जिसमें दुकान मालिक ज्ञानेश चंद्र पांडेय पर 2.50 लाख और उनके नौकर बांकेलाल पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। दोनों आरोपियों को जुर्माने की रकम जमा करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
शासन ने मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। इसी क्रम में पहले से दायर मुकदमों की सुनवाई तेज करते हुए एडीएम कोर्ट ने मिलावटखोरों पर शिकंजा कसते हुए तगड़ा जुर्माना लगाया है।
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-कौशलेंद्र शर्मा, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए
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एफएसडीए टीम ने जून 2016 में राजापुर क्रॉसिंग के पास एक मकान में संचालित पानी पाउच बनाने वाली फैक्ट्री से सैंपल भरे थे। लैब जांच में पानी पाउच को मिसब्रांड यानी मिथ्याछाप करार दिया गया। इसके बाद तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने नौ अगस्त 2016 को एडीएम कोर्ट में फैक्टरी मालिक ऊषा देवी वर्मा पत्नी अशोक कुमार के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। करीब साढ़े तीन साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद एडीएम कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुना दिया, जिसमें एडीएम ने आरोपी ऊषा देवी को 15 दिन के अंदर 2.50 लाख रुपये जुर्माना जमा करने के आदेश दिए हैं। इसी तरह दूसरे मामले में एफएसडीए टीम ने जुलाई 2017 में पांच पीली कोठी मोहल्ला ईदगाह (मातृछाया मंडप) कोतवाली सदर में ज्ञानेश चंद्र पांडेय की दुकान से दूध का नमूना भरा था, उस समय पर दुकान पर नौकर बांकेलाल निवासी बिचुली चौकी ढखेरवा थाना निघासन मौजूद था। लैब जांच में दूध का नमूना फेल हो गया, जिसमें दूध अधोमानक (सब स्टैंडर्ड) पाया गया। इस मामले में भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने चार सितंबर 2017 को एडीएम कोर्ट में आरोपी व्यापारी और उसके नौकर के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। करीब ढाई साल तक चली सुनवाई के बाद एडीएम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुना दिया है, जिसमें दुकान मालिक ज्ञानेश चंद्र पांडेय पर 2.50 लाख और उनके नौकर बांकेलाल पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। दोनों आरोपियों को जुर्माने की रकम जमा करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
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शासन ने मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। इसी क्रम में पहले से दायर मुकदमों की सुनवाई तेज करते हुए एडीएम कोर्ट ने मिलावटखोरों पर शिकंजा कसते हुए तगड़ा जुर्माना लगाया है।
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-कौशलेंद्र शर्मा, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए