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Lakhimpur Kheri News: गन्ने के खेतों से पिंजरे तक, फिर खत्म हो गई कहानी
Wed, 24 Jun 2026 11:30 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 24 Jun 2026 11:30 PM IST
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फाइल फोटो बाघिन। स्रोत : वन विभाग।
लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। बिजुआ और मझगईं रेंज क्षेत्र में शारदा नदी की तलहटी किनारे गन्ने के खेतों में पली-बढ़ी चार साल की बाघिन की कहानी मंगलवार शाम 6:30 बजे पिंजरे में खत्म हो गई।
दो लोगों को मारने के बाद वन विभाग ने उसे बेहोश कर पकड़ लिया था, लेकिन कुछ घंटों बाद उसकी मौत हो गई। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि उमस भरी गर्मी और शरीर में पानी की कमी इसकी वजह हो सकती है।
गन्ने के खेतों में पली-बढ़ी इस बाघिन ने इन्हीं खेतों को अपना ठिकाना बना लिया था। इंसानों की बढ़ती मौजूदगी के बीच वह रह रही थी। दो दिन के अंतराल में उसने दो लोगों पर हमला कर उनकी जान ले ली। लगातार दो मौतों के बाद वन विभाग हरकत में आया और चार साल की इस बाघिन को ट्रैंक्युलाइज कर पिंजरे में कैद कर लिया।
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विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रैंक्युलाइज होने के तुरंत बाद बाघिन ने उल्टी की थी। बताया जाता है कि इसके बाद उसे लगातार 15 बार उल्टियां हुईं, जिससे उसके शरीर में पानी की कमी हो गई। उल्टी में खाया हुआ मांस निकल जाने और पेट खाली होने से उसे डिहाइड्रेशन हुआ।
पशु चिकित्सकों ने शरीर में पानी की कमी पूरी करने का प्रयास किया, लेकिन तिरपाल से ढंके पिंजरे की उमस वह बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसकी मौत हो गई। बाघिन की अचानक मौत के बाद वन विभाग भी सकते में है।
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चार साल की उम्र में बन गई शिकारी
मंगलवार सुबह बेहोश किए जाने के बाद पिंजरे की सलाखों के पीछे पहुंची मझगईं की बाघिन की उम्र सिर्फ चार साल थी। विभागीय जिम्मेदार अभियान के दौरान उसे शुगरकेन टाइगर और शर्मीले स्वभाव की बता रहे थे। मौत से पहले उसके जीवन में डर, संघर्ष, कैद और फिर मौत का क्रम जुड़ गया।
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दो डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमॉर्टम
दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बृहस्पतिवार भोर में मझगईं रेंज परिसर से बाघिन का शव पोस्टमॉर्टम के लिए इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई), बरेली भेजा। वहां वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. एम. करिकरन और डॉ. अभिजीत पांवड़े के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया। इस दौरान डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी रोहित रवी और डब्ल्यूटीआई के अरुण मौजूद रहे।
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बाघिन के शव का आईवीआरआई बरेली में पोस्टमॉर्टम कराया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मौत के कारणों का पता चल सकेगा।
- डॉ. एच. राजामोहन, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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बाघिन की मौत की जांच की मांग
मझगईं। वन्यजीव प्रेमी व गन्ना समिति पलिया के अध्यक्ष अभिषेक अवस्थी ने बाघिन की मौत का जिम्मेदार वनकर्मियों को ठहराया है। उन्होंने कहा कि बाघिन की अचानक मझगईं रेंज परिसर में हुई मौत से गहरा सदमा पहुंचा है। बाघिन की मृत्यु वन विभाग की घोर लापरवाही दर्शाती है। पहले बाघिन को ट्रेस कर पकड़ने में विलंब और ट्रैंक्युलाइज करने में लापरवाही से उसकी हालत बिगड़ी। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। संवाद
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पिछले साल धौरहरा में रेस्क्यू किए गए दो तेंदुओं की हुई थी मौत
पिछले वर्ष 24 जून को धौरहरा क्षेत्र में जटपुरवा सेंटर और बबुरी भट्ठा के पास दो तेंदुओं को वन विभाग ने रेस्क्यू किया था। दोनों को उसी दिन रेंज कार्यालय लाया गया था। उन्हें कहां छोड़ा जाना है, इस पर फैसला होने से पहले ही 25 जून को दोनों की मौत हो गई थी।
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दो लोगों को मारने के बाद वन विभाग ने उसे बेहोश कर पकड़ लिया था, लेकिन कुछ घंटों बाद उसकी मौत हो गई। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि उमस भरी गर्मी और शरीर में पानी की कमी इसकी वजह हो सकती है।
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गन्ने के खेतों में पली-बढ़ी इस बाघिन ने इन्हीं खेतों को अपना ठिकाना बना लिया था। इंसानों की बढ़ती मौजूदगी के बीच वह रह रही थी। दो दिन के अंतराल में उसने दो लोगों पर हमला कर उनकी जान ले ली। लगातार दो मौतों के बाद वन विभाग हरकत में आया और चार साल की इस बाघिन को ट्रैंक्युलाइज कर पिंजरे में कैद कर लिया।
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विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रैंक्युलाइज होने के तुरंत बाद बाघिन ने उल्टी की थी। बताया जाता है कि इसके बाद उसे लगातार 15 बार उल्टियां हुईं, जिससे उसके शरीर में पानी की कमी हो गई। उल्टी में खाया हुआ मांस निकल जाने और पेट खाली होने से उसे डिहाइड्रेशन हुआ।
पशु चिकित्सकों ने शरीर में पानी की कमी पूरी करने का प्रयास किया, लेकिन तिरपाल से ढंके पिंजरे की उमस वह बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसकी मौत हो गई। बाघिन की अचानक मौत के बाद वन विभाग भी सकते में है।
चार साल की उम्र में बन गई शिकारी
मंगलवार सुबह बेहोश किए जाने के बाद पिंजरे की सलाखों के पीछे पहुंची मझगईं की बाघिन की उम्र सिर्फ चार साल थी। विभागीय जिम्मेदार अभियान के दौरान उसे शुगरकेन टाइगर और शर्मीले स्वभाव की बता रहे थे। मौत से पहले उसके जीवन में डर, संघर्ष, कैद और फिर मौत का क्रम जुड़ गया।
दो डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमॉर्टम
दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बृहस्पतिवार भोर में मझगईं रेंज परिसर से बाघिन का शव पोस्टमॉर्टम के लिए इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई), बरेली भेजा। वहां वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. एम. करिकरन और डॉ. अभिजीत पांवड़े के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया। इस दौरान डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी रोहित रवी और डब्ल्यूटीआई के अरुण मौजूद रहे।
बाघिन के शव का आईवीआरआई बरेली में पोस्टमॉर्टम कराया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मौत के कारणों का पता चल सकेगा।
- डॉ. एच. राजामोहन, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
बाघिन की मौत की जांच की मांग
मझगईं। वन्यजीव प्रेमी व गन्ना समिति पलिया के अध्यक्ष अभिषेक अवस्थी ने बाघिन की मौत का जिम्मेदार वनकर्मियों को ठहराया है। उन्होंने कहा कि बाघिन की अचानक मझगईं रेंज परिसर में हुई मौत से गहरा सदमा पहुंचा है। बाघिन की मृत्यु वन विभाग की घोर लापरवाही दर्शाती है। पहले बाघिन को ट्रेस कर पकड़ने में विलंब और ट्रैंक्युलाइज करने में लापरवाही से उसकी हालत बिगड़ी। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। संवाद
पिछले साल धौरहरा में रेस्क्यू किए गए दो तेंदुओं की हुई थी मौत
पिछले वर्ष 24 जून को धौरहरा क्षेत्र में जटपुरवा सेंटर और बबुरी भट्ठा के पास दो तेंदुओं को वन विभाग ने रेस्क्यू किया था। दोनों को उसी दिन रेंज कार्यालय लाया गया था। उन्हें कहां छोड़ा जाना है, इस पर फैसला होने से पहले ही 25 जून को दोनों की मौत हो गई थी।