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Lakhimpur Kheri News: दुधवा के रास्ते निदेशक से विभागाध्यक्ष के पद तक पहुंचे चार आईएफएस
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प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी। संवाद।
बांकेगंज। दुधवा नेशनल पार्क में निदेशक और फील्ड डायरेक्टर के पद से विभागाध्यक्ष तक का सफर पूरा करने वाले सुनील चौधरी चाैथे आईएफएस अधिकारी हैं।
इनसे पहले दुधवा नेशनल पार्क के संस्थापक-निदेशक रहे डॉ. राम लखन सिंह विभागाध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने में कामयाब रहे थे। उनके बाद डॉ. रूपक डे ने दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर से विभागाध्यक्ष तक का सफर तय किया। डीएनएस सुमन भी ऐसे आईएफएस अधिकारी थे, जो दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी रहने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विभागाध्यक्ष) बने। अब सुनील चौधरी चौथे ऐसे आईएफएस अधिकारी हैं जिन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक बनने का मौका मिला है।
दुधवा के एफडी के रूप में सुनील चौधरी के नाम रहीं कई उपलब्धियां
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी रहते हुए सुनील चौधरी के कार्यकाल में ही (एसटीपीएफ) स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स की स्थापना हुई और दुधवा को करीब 200 जवान मिले। उन्हीं के कार्यकाल में उत्तर खीरी वन प्रभाग का विलय बफरजोन के रूप में दुधवा टाइगर रिजर्व में हुआ। उनके कार्यकाल 2016-2018 में ही गैंडा पुनर्वास योजना के विस्तार के लिए असम से और गैंडे लाने की योजना शुरू हुई, लेकिन इस बीच उनका तबादला हो जाने के कारण यह मुहिम रुक गई।
दुधवा टाइगर रिजर्व में चारों आईएफएस अफसरों का कार्यकाल
1- डॉ रामलखन सिंह- 01.02. 1977 से 8.02.1982
2- डॉ रूपक डे- 02.09.1995 से 27.03.2001
3- डीएनएस सुमन-16.03.1993 से 15.08.1995
4-सुनील चौधरी-12.03.2016 से 04.06.2018
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इनसे पहले दुधवा नेशनल पार्क के संस्थापक-निदेशक रहे डॉ. राम लखन सिंह विभागाध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने में कामयाब रहे थे। उनके बाद डॉ. रूपक डे ने दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर से विभागाध्यक्ष तक का सफर तय किया। डीएनएस सुमन भी ऐसे आईएफएस अधिकारी थे, जो दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी रहने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विभागाध्यक्ष) बने। अब सुनील चौधरी चौथे ऐसे आईएफएस अधिकारी हैं जिन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक बनने का मौका मिला है।
दुधवा के एफडी के रूप में सुनील चौधरी के नाम रहीं कई उपलब्धियां
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी रहते हुए सुनील चौधरी के कार्यकाल में ही (एसटीपीएफ) स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स की स्थापना हुई और दुधवा को करीब 200 जवान मिले। उन्हीं के कार्यकाल में उत्तर खीरी वन प्रभाग का विलय बफरजोन के रूप में दुधवा टाइगर रिजर्व में हुआ। उनके कार्यकाल 2016-2018 में ही गैंडा पुनर्वास योजना के विस्तार के लिए असम से और गैंडे लाने की योजना शुरू हुई, लेकिन इस बीच उनका तबादला हो जाने के कारण यह मुहिम रुक गई।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में चारों आईएफएस अफसरों का कार्यकाल
1- डॉ रामलखन सिंह- 01.02. 1977 से 8.02.1982
2- डॉ रूपक डे- 02.09.1995 से 27.03.2001
3- डीएनएस सुमन-16.03.1993 से 15.08.1995
4-सुनील चौधरी-12.03.2016 से 04.06.2018