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अनमोल सांस्कृतिक विरासत है किला मेला
अमर उजाला ब्यूरो/सिंगाही।
Updated Sat, 16 Apr 2016 11:46 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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घने जंगल में रात को लगता है मेला, सभी समुदाय की आस्था का है केंद्र
17 अप्रैल को किले पर लगेगा ऐतिहासिक मेला, तैयारियां पूरी
कस्बे से 15 किलोमीटर दूर दुधवा टाइगर रिजर्व के किला रेंज जंगल में लगने वाला किला मेला जिले की अनमोल सांस्कृतिक विरासत है। साल सागौन के घने जंगल के बीच किला परिसर में स्थित नौगजा पीर की मजार पर यह मेला रात में लगता है। इस मेले में सभी समुदायों के लोग आते हैं। दुधवा नेशनल पार्क क्षेत्र का यह जंगल अपने में अनेक ऐतिहासिक धरोहर समेटे हुए है। मुगल कालीन इस किले के कुछ अवशेष आज भी शेष हैं। इस बार यह मेला 17 अप्रैल लगेगा।
किला गौरी शाह के नाम से प्रसिद्ध इस क्षेत्र में लखौरी ईटों से बनी दो सौ मीटर लंबी दीवार के अवशेष किले की सुदृढ़ता को प्रदर्शित करते हैं। इसका कुछ हिस्सा जमींदोज हो चुका है। इस किले का जिक्र अबुल फजल ने अपने ग्रंथ आइने अकबरी में भी किया है। यह किला मुगल साम्राज्य की सुरक्षा पंक्ति का महत्वपूर्ण किला था।
पुरातत्व विभाग की खुदाई में इस स्थान पर गुप्त कालीन शिलालेख और अश्व प्रतिमा मिलने से यह तय है कि यह क्षेत्र गुप्त साम्राज्य का एक हिस्सा रहा होगा। यहां मिली अश्व की प्रस्तर प्रतिमा लखनऊ के राज्य संग्रहालय में सुरक्षित है। अंग्रेजी शासनकाल तक यह किला पूरी तरह ध्वस्त हो चुका था लेकिन यह जगह ब्रिटिश हुक्मरानों की पसंदीदा जगह बन गई। उन्होंने यहां विश्रामगृह बनाया और इस क्षेत्र को शिकारगाह में बदल दिया। जब यह वन क्षेत्र संरक्षित हुआ तो यहां एक वन चौकी स्थापित की गई। जिसका नाम किला चौकी रखा गया। आज भी इस संरक्षित क्षेत्र में अनेक देवी देवताओं के मंदिर है जो यहां के निवासियों के लिए आस्था के केंद्र हैं। यहां हमेशा कोई न कोई धार्मिक अनुष्ठान होता रहता है। बताते हैं कि यहां पर रुक्मणी जी का सरोवर, उनके पूजा करने का मंदिर, रामदास बाबा समेत कई संतों की मजारें भी मौजूद हैं।
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किला मेले की तैयारियां पूरी
मझगईं। दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में किले मेले का आयोजन रविवार को होगा। एक दिवसीय इस मेले में शनिवार को दुकानदार पहुंच गए। अकीदतमंद रविवार को मजारे पाक पर अकीदत के साथ फूल और चादरें चढ़ाकर मुरादें मांगेंगे। पार्क के जंगल में हर वर्ष किले का मेला लगता है। इस मेले में दूर दूर तथा नेपाल देश से हजारों लोग आते हैं। मेले को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और दुकानदार भी शनिवार को यहां पहुंच गए। यहां स्थित हजरत मोहम्मद गौरी की मजार पर अकीदतमंद अकीदत के फूल और चादरें चढ़ाकर मुरादें मांगते हैं।
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17 अप्रैल को किले पर लगेगा ऐतिहासिक मेला, तैयारियां पूरी
कस्बे से 15 किलोमीटर दूर दुधवा टाइगर रिजर्व के किला रेंज जंगल में लगने वाला किला मेला जिले की अनमोल सांस्कृतिक विरासत है। साल सागौन के घने जंगल के बीच किला परिसर में स्थित नौगजा पीर की मजार पर यह मेला रात में लगता है। इस मेले में सभी समुदायों के लोग आते हैं। दुधवा नेशनल पार्क क्षेत्र का यह जंगल अपने में अनेक ऐतिहासिक धरोहर समेटे हुए है। मुगल कालीन इस किले के कुछ अवशेष आज भी शेष हैं। इस बार यह मेला 17 अप्रैल लगेगा।
किला गौरी शाह के नाम से प्रसिद्ध इस क्षेत्र में लखौरी ईटों से बनी दो सौ मीटर लंबी दीवार के अवशेष किले की सुदृढ़ता को प्रदर्शित करते हैं। इसका कुछ हिस्सा जमींदोज हो चुका है। इस किले का जिक्र अबुल फजल ने अपने ग्रंथ आइने अकबरी में भी किया है। यह किला मुगल साम्राज्य की सुरक्षा पंक्ति का महत्वपूर्ण किला था।
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पुरातत्व विभाग की खुदाई में इस स्थान पर गुप्त कालीन शिलालेख और अश्व प्रतिमा मिलने से यह तय है कि यह क्षेत्र गुप्त साम्राज्य का एक हिस्सा रहा होगा। यहां मिली अश्व की प्रस्तर प्रतिमा लखनऊ के राज्य संग्रहालय में सुरक्षित है। अंग्रेजी शासनकाल तक यह किला पूरी तरह ध्वस्त हो चुका था लेकिन यह जगह ब्रिटिश हुक्मरानों की पसंदीदा जगह बन गई। उन्होंने यहां विश्रामगृह बनाया और इस क्षेत्र को शिकारगाह में बदल दिया। जब यह वन क्षेत्र संरक्षित हुआ तो यहां एक वन चौकी स्थापित की गई। जिसका नाम किला चौकी रखा गया। आज भी इस संरक्षित क्षेत्र में अनेक देवी देवताओं के मंदिर है जो यहां के निवासियों के लिए आस्था के केंद्र हैं। यहां हमेशा कोई न कोई धार्मिक अनुष्ठान होता रहता है। बताते हैं कि यहां पर रुक्मणी जी का सरोवर, उनके पूजा करने का मंदिर, रामदास बाबा समेत कई संतों की मजारें भी मौजूद हैं।
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किला मेले की तैयारियां पूरी
मझगईं। दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में किले मेले का आयोजन रविवार को होगा। एक दिवसीय इस मेले में शनिवार को दुकानदार पहुंच गए। अकीदतमंद रविवार को मजारे पाक पर अकीदत के साथ फूल और चादरें चढ़ाकर मुरादें मांगेंगे। पार्क के जंगल में हर वर्ष किले का मेला लगता है। इस मेले में दूर दूर तथा नेपाल देश से हजारों लोग आते हैं। मेले को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और दुकानदार भी शनिवार को यहां पहुंच गए। यहां स्थित हजरत मोहम्मद गौरी की मजार पर अकीदतमंद अकीदत के फूल और चादरें चढ़ाकर मुरादें मांगते हैं।