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धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार पांच आरोपी भेजे गए जेल
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मोहम्मदी विधायक की पैरवी के बाद पुलिस ने पिता की तहरीर पर दर्ज किया मुकदमा
मोहम्मदी (लखीमपुर खीरी)। धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद रविवार को जेल भेज दिया। रविवार को दिन भर उनसे पूछताछ चलती रही। मामले में छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें पांच लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ हुई और बाद में पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
क्षेत्र के ग्राम गरवापुर निवासी दामोदर ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि उसका पुत्र अनुज बरबर कस्बे में एक भट्टे पर ईंट पथाई का काम करता था। करीब पांच माह पहले भट्ठे पर ही काम करने वाले मोहल्ला सरैया के राशिद और सहवान पुत्र यूनुस और 2 -3 अन्य लोग इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए दबाव बनाते थे। यह लोग अनुज को दिल्ली में काम कराने के बहाने बहलाकर अपने साथ लेकर चले गए।
पिता दामोदर ने बताया कि उसने अपने पुत्र से मोबाइल पर कई बार बात करने की कोशिश की। कई जगह तलाश भी किया, लेकिन उसका कुछ भी पता नहीं चला।
29 अक्टूबर को उसे पता चला कि उसके लड़के को नगर के एक मदरसे में जबरन धर्मांतरण करने के लिए दो लोग अपने अन्य साथियों के साथ बंधक बनाए हुए हैं। दामोदर अपने लड़के से मिलने के लिए वहां गया तो उसके लड़के ने बताया कि सभी लोग उसको जबरन दूसरा धर्म स्वीकार कराने का दबाव बना रहे हैं। जब उसने अपने पुत्र को छुड़ाने की बात कही तो उन्होंने धमकी देकर भगा दिया। यह बात उसने पुलिस और क्षेत्रीय विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह को बताई। इस पर विधायक ने मामले की जानकारी एसपी को दी थी। तब जाकर पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया।
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पुलिस ने पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पांच लोगों को हिरासत में लिया, जिसमें पांच आरोपियों शहवान रजा पुत्र मो. युनुस निवासी मोहम्मदपुर थाना मोहम्मदी, मो मुकीम पुत्र इरशाद निवाीस चक पिहानी थाना पसगवां, अकलीम रजा पुत्र तकसीम रजा निवासी अमरदोभा थाना बखिरा जनपद संतकबीरनगर, अफसर अली पुत्र मुसर्रफ अली निवासी मोहल्ला सरैया कस्बा व थाना मोहम्मदी व इशहाक पुत्र मो अली निवासी प्रतापपुर थाना नीमगांव को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया।
घटनास्थल का निरीक्षण किया गया है। सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि इन लोगों के तार कहां से जुड़े हैं। पुलिस ने पांच लोगों को जेल भेजा है। मौलाना युनुस फरार चल रहा है। - राजेश कुमार सिंह, सीओ मोहम्मदी
पुलिस-प्रशासन की लापरवाही से पनप रहे धर्मांतरण गिरोह
लखीमपुर खीरी। जनपद में धर्मांतरण गिरोह के सक्रिय होने का मोहम्मदी में खुलासा होने के बाद पुलिस-प्रशासन पर कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है। इससे कुछ माह पहले भी थारु जनजाति के लोगों का धर्मांतरण कर ईसाई बनाने का मामला सामने आ चुका है। बावजूद इसके पुलिस-प्रशासन लापरवाही बरतता रहा तो वहीं राज्य और केंद्र सरकार की खुफिया एजेंसियों के प्रतिनिधि भी धर्मांतरण जैसे गंभीर मामले में ढिलाई बरत रहे हैं या फिर उन्हें ऐसे मामलों की भनक ही नहीं लगती। नतीजतन मोहम्मदी में धर्मांतरण गिरोह ने बाकायदा नेटवर्क फैलाकर काम शुरू कर दिया है।
तराई बेल्ट के नाम से जाने वाले इस जनपद की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार 44 लाख थी, जो अब बढ़कर करीब 50 लाख से अधिक होने का अनुमान है। दुधवा नेशनल पार्क के अलावा काफी बड़े भू-भाग में जंगल है, जिस पर अवैध कब्जा करके खेती करने के मामले भी सामने आते रहे हैं। यहां तक वन विभाग अपनी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए अतिक्रमणकारियों से मुकदमे लड़ रहा है।
सूत्र बताते हैं कि दूसरे जनपदों या राज्यों से यहां आकर बसने वालों की भी संख्या लाखों मेें पहुंच चुकी है। जनपद की करीब 120 किलोमीटर सीमा (पलिया, निघासन व रमियाबेहड़ ब्लॉक) नेपाल से मिलती है, जिससे बार्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसबी व कस्टम विभाग को मिली हुई है। सीमा के अंदर अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी पुलिस-प्रशासन की है। बावजूद इसके नेपाल बार्डर पर पलिया ब्लॉक क्षेत्र में बसे थारू गांवों में ईसाई मिशनरियों द्वारा थारु जनजाति के लोगों का धर्मांतरण किए जाने का मामला सामने आ चुका है, जो थारू जनजाति के परिवारों को लालच देकर ईसाई बना रहे हैं। इन कारगुजारियों की खबर पुलिस-प्रशासन को नहीं लगती और न ही एलआईयू समेत खुफिया एजेंसियां इन्हें पकड़ पा रही है। लॉकडाउन का फायदा उठाते हुए ईसाई मिशनरियों ने दस नए चर्चों की स्थापना भी कर दी है, जिसके लिए प्रशासन से अनुमति भी नहीं ली गई, जबकि थारु क्षेत्र में इतने मंदिर भी अब तक नहीं हैं। थारु जनजाति के लोगों को ईसाई बनाने में भीरा के एक चर्च, पलिया का एक स्कूल व मिशनरी के लोग शामिल हैं, जिसकी कई बार शिकायत पुलिस से भी लोग कर चुके हैं।
थारु क्षेत्र के इन गांवों में दस चर्चों की हुई स्थापना
थारु बाहुल्य ग्राम कीरतपुर, सेड़ाबेड़ा, बजाही, पिपरौला, नझोटा, सूंडा, बिरिया, सौनहा, छिदिया पश्चिम में चर्च बनाए गए हैं, जिसमें सौनहा गांव में दो चर्च बने हैं। ईसाई बने थारुओं को बताया गया है कि अपने नाम के सामने राना या चौधरी ही लिखते रहिए। यदि नाम के सामने पीटर, जॉन आदि लिखा तो उनकी अनुसूचित जनजाति की सुविधाओं को सरकार वापस ले सकती है।
धर्मांतरण के लिए मदरसे का इस्तेमाल
मोहम्मदी में हिंदू युवक का धर्मांतरण कराने के लिए अब तक आधा दर्जन आरोपियों की भूमिका की जांच शुरू हो गई है, जिसमें एक मदरसा संचालक मौलाना की गर्दन फंसी है। युवक को मदरसा में बंधक बनाकर रखा गया था, जहां से युवक को पुलिस ने छुड़ाया था। वह भी तब जब विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने मामले को संज्ञान में लेकर पुलिस को कार्रवाई करने के लिए कहा था। मुख्य आरोपी मौलाना युनुस अभी भी पुलिस की पकड़ में नहीं आया है। धर्मांतरण की इस घटना के खुलासे के बाद पुलिस-प्रशासन की भूमिका फिर सवालों के घेरे में आ गई है, क्योंकि ऐसे संवेदनशील मामलों पर अधिकारी आंखें बंद कर चुप्पी साध लेते हैं।
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मोहम्मदी (लखीमपुर खीरी)। धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद रविवार को जेल भेज दिया। रविवार को दिन भर उनसे पूछताछ चलती रही। मामले में छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें पांच लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ हुई और बाद में पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
क्षेत्र के ग्राम गरवापुर निवासी दामोदर ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि उसका पुत्र अनुज बरबर कस्बे में एक भट्टे पर ईंट पथाई का काम करता था। करीब पांच माह पहले भट्ठे पर ही काम करने वाले मोहल्ला सरैया के राशिद और सहवान पुत्र यूनुस और 2 -3 अन्य लोग इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए दबाव बनाते थे। यह लोग अनुज को दिल्ली में काम कराने के बहाने बहलाकर अपने साथ लेकर चले गए।
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पिता दामोदर ने बताया कि उसने अपने पुत्र से मोबाइल पर कई बार बात करने की कोशिश की। कई जगह तलाश भी किया, लेकिन उसका कुछ भी पता नहीं चला।
29 अक्टूबर को उसे पता चला कि उसके लड़के को नगर के एक मदरसे में जबरन धर्मांतरण करने के लिए दो लोग अपने अन्य साथियों के साथ बंधक बनाए हुए हैं। दामोदर अपने लड़के से मिलने के लिए वहां गया तो उसके लड़के ने बताया कि सभी लोग उसको जबरन दूसरा धर्म स्वीकार कराने का दबाव बना रहे हैं। जब उसने अपने पुत्र को छुड़ाने की बात कही तो उन्होंने धमकी देकर भगा दिया। यह बात उसने पुलिस और क्षेत्रीय विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह को बताई। इस पर विधायक ने मामले की जानकारी एसपी को दी थी। तब जाकर पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया।
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पुलिस ने पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पांच लोगों को हिरासत में लिया, जिसमें पांच आरोपियों शहवान रजा पुत्र मो. युनुस निवासी मोहम्मदपुर थाना मोहम्मदी, मो मुकीम पुत्र इरशाद निवाीस चक पिहानी थाना पसगवां, अकलीम रजा पुत्र तकसीम रजा निवासी अमरदोभा थाना बखिरा जनपद संतकबीरनगर, अफसर अली पुत्र मुसर्रफ अली निवासी मोहल्ला सरैया कस्बा व थाना मोहम्मदी व इशहाक पुत्र मो अली निवासी प्रतापपुर थाना नीमगांव को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया।
घटनास्थल का निरीक्षण किया गया है। सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि इन लोगों के तार कहां से जुड़े हैं। पुलिस ने पांच लोगों को जेल भेजा है। मौलाना युनुस फरार चल रहा है। - राजेश कुमार सिंह, सीओ मोहम्मदी
पुलिस-प्रशासन की लापरवाही से पनप रहे धर्मांतरण गिरोह
लखीमपुर खीरी। जनपद में धर्मांतरण गिरोह के सक्रिय होने का मोहम्मदी में खुलासा होने के बाद पुलिस-प्रशासन पर कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है। इससे कुछ माह पहले भी थारु जनजाति के लोगों का धर्मांतरण कर ईसाई बनाने का मामला सामने आ चुका है। बावजूद इसके पुलिस-प्रशासन लापरवाही बरतता रहा तो वहीं राज्य और केंद्र सरकार की खुफिया एजेंसियों के प्रतिनिधि भी धर्मांतरण जैसे गंभीर मामले में ढिलाई बरत रहे हैं या फिर उन्हें ऐसे मामलों की भनक ही नहीं लगती। नतीजतन मोहम्मदी में धर्मांतरण गिरोह ने बाकायदा नेटवर्क फैलाकर काम शुरू कर दिया है।
तराई बेल्ट के नाम से जाने वाले इस जनपद की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार 44 लाख थी, जो अब बढ़कर करीब 50 लाख से अधिक होने का अनुमान है। दुधवा नेशनल पार्क के अलावा काफी बड़े भू-भाग में जंगल है, जिस पर अवैध कब्जा करके खेती करने के मामले भी सामने आते रहे हैं। यहां तक वन विभाग अपनी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए अतिक्रमणकारियों से मुकदमे लड़ रहा है।
सूत्र बताते हैं कि दूसरे जनपदों या राज्यों से यहां आकर बसने वालों की भी संख्या लाखों मेें पहुंच चुकी है। जनपद की करीब 120 किलोमीटर सीमा (पलिया, निघासन व रमियाबेहड़ ब्लॉक) नेपाल से मिलती है, जिससे बार्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसबी व कस्टम विभाग को मिली हुई है। सीमा के अंदर अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी पुलिस-प्रशासन की है। बावजूद इसके नेपाल बार्डर पर पलिया ब्लॉक क्षेत्र में बसे थारू गांवों में ईसाई मिशनरियों द्वारा थारु जनजाति के लोगों का धर्मांतरण किए जाने का मामला सामने आ चुका है, जो थारू जनजाति के परिवारों को लालच देकर ईसाई बना रहे हैं। इन कारगुजारियों की खबर पुलिस-प्रशासन को नहीं लगती और न ही एलआईयू समेत खुफिया एजेंसियां इन्हें पकड़ पा रही है। लॉकडाउन का फायदा उठाते हुए ईसाई मिशनरियों ने दस नए चर्चों की स्थापना भी कर दी है, जिसके लिए प्रशासन से अनुमति भी नहीं ली गई, जबकि थारु क्षेत्र में इतने मंदिर भी अब तक नहीं हैं। थारु जनजाति के लोगों को ईसाई बनाने में भीरा के एक चर्च, पलिया का एक स्कूल व मिशनरी के लोग शामिल हैं, जिसकी कई बार शिकायत पुलिस से भी लोग कर चुके हैं।
थारु क्षेत्र के इन गांवों में दस चर्चों की हुई स्थापना
थारु बाहुल्य ग्राम कीरतपुर, सेड़ाबेड़ा, बजाही, पिपरौला, नझोटा, सूंडा, बिरिया, सौनहा, छिदिया पश्चिम में चर्च बनाए गए हैं, जिसमें सौनहा गांव में दो चर्च बने हैं। ईसाई बने थारुओं को बताया गया है कि अपने नाम के सामने राना या चौधरी ही लिखते रहिए। यदि नाम के सामने पीटर, जॉन आदि लिखा तो उनकी अनुसूचित जनजाति की सुविधाओं को सरकार वापस ले सकती है।
धर्मांतरण के लिए मदरसे का इस्तेमाल
मोहम्मदी में हिंदू युवक का धर्मांतरण कराने के लिए अब तक आधा दर्जन आरोपियों की भूमिका की जांच शुरू हो गई है, जिसमें एक मदरसा संचालक मौलाना की गर्दन फंसी है। युवक को मदरसा में बंधक बनाकर रखा गया था, जहां से युवक को पुलिस ने छुड़ाया था। वह भी तब जब विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने मामले को संज्ञान में लेकर पुलिस को कार्रवाई करने के लिए कहा था। मुख्य आरोपी मौलाना युनुस अभी भी पुलिस की पकड़ में नहीं आया है। धर्मांतरण की इस घटना के खुलासे के बाद पुलिस-प्रशासन की भूमिका फिर सवालों के घेरे में आ गई है, क्योंकि ऐसे संवेदनशील मामलों पर अधिकारी आंखें बंद कर चुप्पी साध लेते हैं।