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पहली बार गर्भवती हुईं महिलाओं को कर रहे रेफर
अमर उजाला ब्यूरो-बिजुआ (खीरी)।
Updated Thu, 16 Jun 2016 11:51 PM IST
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अाशा
- फोटो : अमर उजाला
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सीएचसी में जच्चा-बच्चा की मौत के आंकड़े कम करने का नया फार्मूला
डॉक्टर बोले, पहले बच्चे में जटिलता अधिक होने के कारण महिला डॉक्टर का रहना जरूरी
बीते तीन दिन में एक दर्जन प्रसूताएं हुईं रेफर, कम हो रहे प्रसव के आंकड़े
सीएचसी में लगातार हो रहीं जच्चा-बच्चा की मौत के आंकड़े कम करने के लिए महकमे ने अनूठा फार्मूला निकाला है। अब बिजुआ सीएचसी में पहली बार मां बनने वाली प्रसूताओं की डिलीवरी करानी बंद कर दी गई है? ऐसे में पिछले तीन दिन में करीब 12 गर्भवती महिलाओं को रेफर कर दिया गया, यह वे प्रसूताएं थीं जिनका पहला बच्चा होना था। ऐसे में सीएचसी में डिलीवरी संख्या में कमी तो आई ही, साथ में उन प्रसूताओं की जिंदगी भी खतरे में पड़ रही है जो शहर जाकर डिलीवरी कराने के बजाय घर वापस जा रही हैं, क्योंकि इन लोगों में गरीब तबके की महिलाएं ज्यादा हैं जो प्राइवेट इलाज नही करा सकतीं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि इनमें अधिकतर मामले जटिल थे, महिला डॉक्टर के न होने तथा संसाधनों की कमी के कारण वे महिलाओं की जान जोखिम में नहीं डाल सकते।
पिछले माह सीएचसी में कई नवजात एवं प्रसूताओं की मौत होने से सीएचसी प्रबंधन इन आंकड़ों को कम करने में जुटा है। सीएचसी में पहली बार प्रसव के लिए लाई जाने वाली गर्भवती महिलाओं को अब यहां से रेफर किया जा रहा है। डॉक्टर का तर्क है कि पहले बच्चे में जटिलता ज्यादा होती है, जच्चा-बच्चा की मौत की आशंका बढ़ जाती है, ऐसे में सीएचसी में कोई भी महिला डॉक्टर न होने एवं सीमित संसाधन होने के कारण वे इन्हें रेफर कर रहे हैं। जबकि इस फरमान से आशा वर्कर गुस्से में हैं, उनका कहना है कि सीएचसी में प्रथम प्रसव वाली गर्भवती ज्यादा आती हैं, पिछले कई दिनों से ऐसी गर्भवती महिलाओं को रेफर किया जा रहा है, जिससे ये गर्भवती जिले के सरकारी अस्पताल के बजाय या तो घर वापस जाकर गांव की दाई से प्रसव करा रहीं हैं, या फिर किसी प्राइवेट अस्पताल जा रहीं हैं। महकमे के इस नए फॉर्मूले से इस बार सीएचसी पर प्रसव के आंकड़े गिरना तय हैं।
इस बात से नाराज हैं आशा वर्कर
रेफर की गई महिलाओं की तादाद देखकर अब गर्भवती सीएचसी आना नही चाह रहीं, सरकार एक तरफ संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, लेकिन दूसरी तरफ बिजुआ में इस नए फार्मूले से ये आंकड़े कम हो रहे हैं, जिससे आशा वर्करों के भी आंकड़े प्रभावित हो रहे हैं। गुरुवार को सीएचसी में ट्रेनिंग पर आईं आशा वर्कर रेफर केस की असलियत जानने ड्यूटी रूम में स्टॉफ नर्सों से मिलीं, तो उन्हें बताया गया कि प्रभारी के आदेश से यह व्यवस्था लागू की गई है।
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तीन दिन में करीब आठ प्रसूता रेफर की गई हैं, जिनकी पहली बार डिलीवरी होनी थी, पहला बच्चा होने में जटिलता रहती है, साथ ही यहां महिला डॉक्टर भी नहीं है, ऐसे में महिला की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता। यही कारण है कि महिलाओं को रेफर किया जा रहा है। -डॉ. प्रवीन निगम, प्रभारी डॉक्टर सीएचसी बिजुआ
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डॉक्टर बोले, पहले बच्चे में जटिलता अधिक होने के कारण महिला डॉक्टर का रहना जरूरी
बीते तीन दिन में एक दर्जन प्रसूताएं हुईं रेफर, कम हो रहे प्रसव के आंकड़े
सीएचसी में लगातार हो रहीं जच्चा-बच्चा की मौत के आंकड़े कम करने के लिए महकमे ने अनूठा फार्मूला निकाला है। अब बिजुआ सीएचसी में पहली बार मां बनने वाली प्रसूताओं की डिलीवरी करानी बंद कर दी गई है? ऐसे में पिछले तीन दिन में करीब 12 गर्भवती महिलाओं को रेफर कर दिया गया, यह वे प्रसूताएं थीं जिनका पहला बच्चा होना था। ऐसे में सीएचसी में डिलीवरी संख्या में कमी तो आई ही, साथ में उन प्रसूताओं की जिंदगी भी खतरे में पड़ रही है जो शहर जाकर डिलीवरी कराने के बजाय घर वापस जा रही हैं, क्योंकि इन लोगों में गरीब तबके की महिलाएं ज्यादा हैं जो प्राइवेट इलाज नही करा सकतीं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि इनमें अधिकतर मामले जटिल थे, महिला डॉक्टर के न होने तथा संसाधनों की कमी के कारण वे महिलाओं की जान जोखिम में नहीं डाल सकते।
पिछले माह सीएचसी में कई नवजात एवं प्रसूताओं की मौत होने से सीएचसी प्रबंधन इन आंकड़ों को कम करने में जुटा है। सीएचसी में पहली बार प्रसव के लिए लाई जाने वाली गर्भवती महिलाओं को अब यहां से रेफर किया जा रहा है। डॉक्टर का तर्क है कि पहले बच्चे में जटिलता ज्यादा होती है, जच्चा-बच्चा की मौत की आशंका बढ़ जाती है, ऐसे में सीएचसी में कोई भी महिला डॉक्टर न होने एवं सीमित संसाधन होने के कारण वे इन्हें रेफर कर रहे हैं। जबकि इस फरमान से आशा वर्कर गुस्से में हैं, उनका कहना है कि सीएचसी में प्रथम प्रसव वाली गर्भवती ज्यादा आती हैं, पिछले कई दिनों से ऐसी गर्भवती महिलाओं को रेफर किया जा रहा है, जिससे ये गर्भवती जिले के सरकारी अस्पताल के बजाय या तो घर वापस जाकर गांव की दाई से प्रसव करा रहीं हैं, या फिर किसी प्राइवेट अस्पताल जा रहीं हैं। महकमे के इस नए फॉर्मूले से इस बार सीएचसी पर प्रसव के आंकड़े गिरना तय हैं।
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इस बात से नाराज हैं आशा वर्कर
रेफर की गई महिलाओं की तादाद देखकर अब गर्भवती सीएचसी आना नही चाह रहीं, सरकार एक तरफ संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, लेकिन दूसरी तरफ बिजुआ में इस नए फार्मूले से ये आंकड़े कम हो रहे हैं, जिससे आशा वर्करों के भी आंकड़े प्रभावित हो रहे हैं। गुरुवार को सीएचसी में ट्रेनिंग पर आईं आशा वर्कर रेफर केस की असलियत जानने ड्यूटी रूम में स्टॉफ नर्सों से मिलीं, तो उन्हें बताया गया कि प्रभारी के आदेश से यह व्यवस्था लागू की गई है।
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तीन दिन में करीब आठ प्रसूता रेफर की गई हैं, जिनकी पहली बार डिलीवरी होनी थी, पहला बच्चा होने में जटिलता रहती है, साथ ही यहां महिला डॉक्टर भी नहीं है, ऐसे में महिला की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता। यही कारण है कि महिलाओं को रेफर किया जा रहा है। -डॉ. प्रवीन निगम, प्रभारी डॉक्टर सीएचसी बिजुआ