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बुखार के कई मरीज मिलने के बाद जागा स्वास्थ्य महकमा
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जिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लगी भीड़। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। प्रदेश के पश्चिमी जिलों की तरह खीरी में भी खतरनाक बुखार ने दस्तक दे दी है। डेंगू, स्क्रब टायफस और कालाजार के मरीजों के मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग नींद टूटी है। अधिकारी ताबड़तोड़ बैठकें कर खतरनाक बुखार को काबू में लाने में जुटे हैं। यह और बात है कि सरकारी दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। जिले में अब तक एईएस के 33, मलेरिया के 24, जेई के पांच और कालाजार के दो लोग पीड़ित मिले है। एईएस पीड़ित एक बच्चे की जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में मौत भी हो चुकी है।
पिछले एक माह में बुखार पीड़ित 64 बच्चों सहित 123 लोग चिल्ड्रन से लेकर मेडिकल वार्ड में भर्ती हुए हैं। इस दौरान सामान्य बुखार से सात बच्चों की मौत हुई है। करीब एक महीने पहले जनपद में बुखार का प्रकोप अब बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। जिले में डेंगू, स्क्रब टायफस और कालाजार जैसे खतरनाक बुखार के मरीज भी मिलने लगे हैं, जिससे जहां लोग घबराए हुए हैं। संक्रामक बीमारियों एवं बुखार से निपटने के लिए जिला अस्पताल की ओपीडी में भीड़ बढ़ती जा रही है। पिछले एक माह में चिल्ड्रेन वार्ड में बुखार पीड़ित 64 जबकि मेडिकल वार्ड में बुखार से 59 लोग भर्ती हुए। जिसमें चिल्ड्रन वार्ड में बुखार पीड़ित सात बच्चों की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके लोगों को जिला अस्पताल में बेहतर इलाज के लाले हैं।
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स्वास्थ्य विभाग का बेहतर इलाज का दावा
जिला अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट डॉ केपी सिंह ने बताया कि पैथोलॉजी में डेंगू, मलेरिया की जांच के पुख्ता इंतजाम है। डेंगू की जांच कार्ड एवं एलाइजा दोनों से की जा रही है। सीएमएस डॉ सीएस सिंह ने बताया कि जांच एवं दवाओं के पर्याप्त इंतजाम के साथ डेंगू पीड़ितों को भर्ती करने के लिए 10 बेड का वार्ड भी तैयार है।
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बेहजम में मलेरिया तो निघासन में कहर बरपा रहा एईएस
बेहजम में मलेरिया और निघासन ब्लॉक में एईएस पीड़ितो की संख्या सबसे ज्यादा मिलने पर सीएमओ ने दोनों ब्लॉकों में विशेष तौर पर संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। संक्रामक रोगों की रोकथाम को लेकर सीएमओ ने शुक्रवार को जिला मलेरिया अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी आदि से संक्रामक रोगों की रोकथाम को लेकर की गई तैयारियों के बाबत जानकारी ली। सीएमओ ने जिला मलेरिया अधिकारी को जेई, एईएस एवं मलेरिया से पीड़ित मिले बच्चों व बड़ों को चिह्नित कर उनके गांव व आस पास एंटी लारवा दवा का छिड़काव कराने के निर्देश दिए। उधर, नगर पालिका के ईओ को शहर और डीपीआरओ को गांवों में विधिवत सफाई कराने को कहा। उन्होंने कहा कि संक्रामक बीमारियों का कारण गंदगी और जलभराव है इसलिए गांवों और शहर में विशेष ध्यान दें जिससे लोगों को इन बीमारियों से बचाया जा सके। बैठक में जिला मलेरिया अधिकारी शैलेंद्र श्रीवास्तव डीपीआरओ सहित नगर पालिका के ईओ मौजूद रहे।
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डेंगू के लक्षण और बचाव
अचानक तेज बुखार, सिर में आगे की और तेज दर्द, आंखों के पीछे दर्द और आंखों के हिलने से दर्द में और तेजी, मांसपेशियों (बदन) और जोड़ों में दर्द, स्वाद का पता न चलना व भूख न लगना, छाती और ऊपरी अंगों पर खसरे जैसे दाने, चक्कर आना,जी घबराना उल्टी आना, शरीर पर खून के चकत्ते एवं खून की सफेद कोशिकाओं की कमी
घर की छत आदि पर रखे कबाड़ एवं आसपास पानी न इकट्ठा होने दें, कूलरों का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य बदलें, घर में कीट नाशक दवाएं छिड़कें, बच्चों को ऐसे कपड़े पहनाएं जिससे उनके हाथ पांव पूरी तरह से ढके रहें, सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, मच्छर भगाने वाली दवाइयों/ वस्तुओं का प्रयोग करें, टंकियों तथा बर्तनों को ढककर रखें, आवश्यकता होने पर जले हुए तेल या मिट्टी के तेल को नालियों में तथा इकट्ठे हुए पानी पर डालें। रोगी को उपचार हेतु तुरंत निकट के अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्र में ले जाएं।
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मलेरिया के लक्षण और बचाव
बुखार, पसीना आना, शरीर में दर्द और उल्टी आना प्रमुख लक्षण हैं। इससे बचने के लिए घर के आस-पास गंदगी और पानी इकट्ठा न होने दें। शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहने।
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कालाजार के लक्षण और बचाव
मुख्य रूप से बालू मक्खी से फैलता है। इसका परजीवी बालू मक्खी में ही जीवित रहता है। कालाजार एक संक्रामक रोग भी है और यह एक इंसान से दूसरे इंसान में आसानी से फैलता है। इसीलिए इससे प्रभावित इंसान से दूर रहें या उसके पास जाएं तो मास्क का इस्तेमाल करें। घरों के आसपास सफाई रखें। संवाद
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अब तक डेंगू के पांच, मलेरिया के 24, एईएस के 33 और जेई पीड़ित पांच बच्चे मिले हैं। मलेरिया के सबसे ज्यादा मरीज बेहजम ब्लॉक में और एईएस के निघासन में मिले हैं। इन दोनों ब्लॉकों में विशेष तौर पर स्वच्छता अभियान चलाकर एंटी लार्वा दवा का छिड़काव कराया जाएगा।
-डॉ शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ
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पिछले एक माह में बुखार पीड़ित 64 बच्चों सहित 123 लोग चिल्ड्रन से लेकर मेडिकल वार्ड में भर्ती हुए हैं। इस दौरान सामान्य बुखार से सात बच्चों की मौत हुई है। करीब एक महीने पहले जनपद में बुखार का प्रकोप अब बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। जिले में डेंगू, स्क्रब टायफस और कालाजार जैसे खतरनाक बुखार के मरीज भी मिलने लगे हैं, जिससे जहां लोग घबराए हुए हैं। संक्रामक बीमारियों एवं बुखार से निपटने के लिए जिला अस्पताल की ओपीडी में भीड़ बढ़ती जा रही है। पिछले एक माह में चिल्ड्रेन वार्ड में बुखार पीड़ित 64 जबकि मेडिकल वार्ड में बुखार से 59 लोग भर्ती हुए। जिसमें चिल्ड्रन वार्ड में बुखार पीड़ित सात बच्चों की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके लोगों को जिला अस्पताल में बेहतर इलाज के लाले हैं।
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स्वास्थ्य विभाग का बेहतर इलाज का दावा
जिला अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट डॉ केपी सिंह ने बताया कि पैथोलॉजी में डेंगू, मलेरिया की जांच के पुख्ता इंतजाम है। डेंगू की जांच कार्ड एवं एलाइजा दोनों से की जा रही है। सीएमएस डॉ सीएस सिंह ने बताया कि जांच एवं दवाओं के पर्याप्त इंतजाम के साथ डेंगू पीड़ितों को भर्ती करने के लिए 10 बेड का वार्ड भी तैयार है।
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बेहजम में मलेरिया तो निघासन में कहर बरपा रहा एईएस
बेहजम में मलेरिया और निघासन ब्लॉक में एईएस पीड़ितो की संख्या सबसे ज्यादा मिलने पर सीएमओ ने दोनों ब्लॉकों में विशेष तौर पर संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। संक्रामक रोगों की रोकथाम को लेकर सीएमओ ने शुक्रवार को जिला मलेरिया अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी आदि से संक्रामक रोगों की रोकथाम को लेकर की गई तैयारियों के बाबत जानकारी ली। सीएमओ ने जिला मलेरिया अधिकारी को जेई, एईएस एवं मलेरिया से पीड़ित मिले बच्चों व बड़ों को चिह्नित कर उनके गांव व आस पास एंटी लारवा दवा का छिड़काव कराने के निर्देश दिए। उधर, नगर पालिका के ईओ को शहर और डीपीआरओ को गांवों में विधिवत सफाई कराने को कहा। उन्होंने कहा कि संक्रामक बीमारियों का कारण गंदगी और जलभराव है इसलिए गांवों और शहर में विशेष ध्यान दें जिससे लोगों को इन बीमारियों से बचाया जा सके। बैठक में जिला मलेरिया अधिकारी शैलेंद्र श्रीवास्तव डीपीआरओ सहित नगर पालिका के ईओ मौजूद रहे।
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डेंगू के लक्षण और बचाव
अचानक तेज बुखार, सिर में आगे की और तेज दर्द, आंखों के पीछे दर्द और आंखों के हिलने से दर्द में और तेजी, मांसपेशियों (बदन) और जोड़ों में दर्द, स्वाद का पता न चलना व भूख न लगना, छाती और ऊपरी अंगों पर खसरे जैसे दाने, चक्कर आना,जी घबराना उल्टी आना, शरीर पर खून के चकत्ते एवं खून की सफेद कोशिकाओं की कमी
घर की छत आदि पर रखे कबाड़ एवं आसपास पानी न इकट्ठा होने दें, कूलरों का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य बदलें, घर में कीट नाशक दवाएं छिड़कें, बच्चों को ऐसे कपड़े पहनाएं जिससे उनके हाथ पांव पूरी तरह से ढके रहें, सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, मच्छर भगाने वाली दवाइयों/ वस्तुओं का प्रयोग करें, टंकियों तथा बर्तनों को ढककर रखें, आवश्यकता होने पर जले हुए तेल या मिट्टी के तेल को नालियों में तथा इकट्ठे हुए पानी पर डालें। रोगी को उपचार हेतु तुरंत निकट के अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्र में ले जाएं।
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मलेरिया के लक्षण और बचाव
बुखार, पसीना आना, शरीर में दर्द और उल्टी आना प्रमुख लक्षण हैं। इससे बचने के लिए घर के आस-पास गंदगी और पानी इकट्ठा न होने दें। शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहने।
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कालाजार के लक्षण और बचाव
मुख्य रूप से बालू मक्खी से फैलता है। इसका परजीवी बालू मक्खी में ही जीवित रहता है। कालाजार एक संक्रामक रोग भी है और यह एक इंसान से दूसरे इंसान में आसानी से फैलता है। इसीलिए इससे प्रभावित इंसान से दूर रहें या उसके पास जाएं तो मास्क का इस्तेमाल करें। घरों के आसपास सफाई रखें। संवाद
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अब तक डेंगू के पांच, मलेरिया के 24, एईएस के 33 और जेई पीड़ित पांच बच्चे मिले हैं। मलेरिया के सबसे ज्यादा मरीज बेहजम ब्लॉक में और एईएस के निघासन में मिले हैं। इन दोनों ब्लॉकों में विशेष तौर पर स्वच्छता अभियान चलाकर एंटी लार्वा दवा का छिड़काव कराया जाएगा।
-डॉ शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ
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