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धनतेरस से शुरू हुई त्योहारों की धूम कार्तिक पूर्णिमा तक रहेगी जारी
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संकटा देवी मार्ग पर देर रात तक रही जाम की स्थिति।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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लखीमपुर खीरी। पांच दिवसीय दीपावली का आगाज मंगलवार से हो चुका है। समापन छह नवंबर को भाई दूज से होगा। इसके बाद दस नवंबर को पूर्वांचल का सबसे बड़ा त्योहार छठ पर्व का मनाया जाएगा। त्योहारों का यह सिलसिला कार्तिक पूर्णिमा तक जारी रहेगा। देवकली तीर्थ स्थित स्वर्गीय श्रीमती चंद्रकला आश्रम एवं संस्कृत विद्यापीठ संचालक पंडित प्रमोद दीक्षित ने बताया कि इन 16 दिन में घर-घर में त्योहार मनाए जाएंगे। वहीं त्योहारों को लेकर घरों में जोरों से तैयारियां चल रही हैं। इन्हें सजाने संवारने का काम अंतिम दौर पर है।
तीन नवंबर- नरक चतुर्दशी दीपोत्सव के दूसरे दिन नरक चतुर्दशी पर्व मनाया जाएगा। इसे छोटी दिवाली भी कहते हैं। इस दिन घर की दहलीज एवं नाली पर जलता दीपक रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यतानुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध किया था।
चार नवंबर- दीपावली
चार नवंबर को दिवाली मनाई जाएगी। शाम को मां लक्ष्मी और गणेश का पूजन कर घरों में दीप जलाकर आतिशबाजी होगी। धार्मिक मान्यता अनुसार 14 साल का वनवास काटने के बाद भगवान श्रीराम आज के ही दिन अयोध्या वापस आए थे। इस पर अयोध्यावासियों ने घर घर दीप जलाए थे।
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पांच नवंबर- गोवर्धन पूजा
दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट यानी गोवर्धन पूजा होगी। घरों में भगवान गोवर्धन की पूजा होगी। महिलाएं व्रत रखकर विधि विधान से पूजन कर खील, बताशे और चूरा अर्पण करती हैं।
छह नंबवर- भाई दूज
दीपोत्सव के अंतिम दिन यानी छह नवंबर को भाई दूज पर्व मनाया जाएगा। मान्यतानुसार इस दिन यमुना नदी में भाई, बहन के स्नान करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन बहनें भाइयों को टीका कर उनकी सुख समृद्धि एवं लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।
दस नवंबर- छठ पूजा
दस नंवबर को छठ पूजा पर्व मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं व्रत रहकर भगवान सूर्य की आराधना करती हैं। पूर्वांचल समाज में इसे श्रद्धा व उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं जल में खड़े होकर उदय व सूर्यास्त होते सूर्य का पूजन करती हैं।
11 नवंबर- गोपाष्टमी
11 नवंबर को गोपाष्टमी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सप्तमी व अष्टमी की तिथि एक साथ रहेगी। इस दिन गौ माता के पूजन का विधान है। गौशालाओं में विधि विधान से गायों का पूजन होगा।
12 नवंबर- आंवला नवमी
इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने की परंपरा है। महिलाएं विधि विधान से आंवला पेड़ की परिक्रमा कर मूंगफली, आंवला आदि का दान करती है। यह पर्व पर्यावरण जागरूकता का संदेश देता है।
14 व 15 नवंबर- तुलसी एवं शालिगराम विवाह
पंचागों में तिथियों को लेकर तुलसी शालिगराम विवाह दो दिन यानी 14 और 15 नवंबर को मनाया जाएगा। इसका कारण 14 नवंबर को एकादशी तिथि का पूरे दिन और 15 नवंबर को सूर्योदय के समय रहना है। इस दिन भगवान शालिगराम व तुलसी का विवाह की परंपरा है।
18 नवंबर- देव दीपावली
बैकुंठी चतुर्दशी पर्व 18 नवंबर को मनाया जाएगा। इसे देव दीपावली भी कहा जाता हैं। इस दिन श्रद्धालु घर और मंदिरों में दीप जलाकर परिवार की खुशहाली के लिए कामना करते हैं।
19 नवंबर- कार्तिक पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 19 नवंबर को मनाया जाएगा। इसे गंगा स्नान से भी कहा जाता है। इस दिन गंगा एवं अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से विशेष पुण्य मिलता है। इस दिन धौरहरा के इलाके में एक दिवसीय ठुठवा मेला लगता है।
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तीन नवंबर- नरक चतुर्दशी दीपोत्सव के दूसरे दिन नरक चतुर्दशी पर्व मनाया जाएगा। इसे छोटी दिवाली भी कहते हैं। इस दिन घर की दहलीज एवं नाली पर जलता दीपक रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यतानुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध किया था।
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चार नवंबर- दीपावली
चार नवंबर को दिवाली मनाई जाएगी। शाम को मां लक्ष्मी और गणेश का पूजन कर घरों में दीप जलाकर आतिशबाजी होगी। धार्मिक मान्यता अनुसार 14 साल का वनवास काटने के बाद भगवान श्रीराम आज के ही दिन अयोध्या वापस आए थे। इस पर अयोध्यावासियों ने घर घर दीप जलाए थे।
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पांच नवंबर- गोवर्धन पूजा
दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट यानी गोवर्धन पूजा होगी। घरों में भगवान गोवर्धन की पूजा होगी। महिलाएं व्रत रखकर विधि विधान से पूजन कर खील, बताशे और चूरा अर्पण करती हैं।
छह नंबवर- भाई दूज
दीपोत्सव के अंतिम दिन यानी छह नवंबर को भाई दूज पर्व मनाया जाएगा। मान्यतानुसार इस दिन यमुना नदी में भाई, बहन के स्नान करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन बहनें भाइयों को टीका कर उनकी सुख समृद्धि एवं लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।
दस नवंबर- छठ पूजा
दस नंवबर को छठ पूजा पर्व मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं व्रत रहकर भगवान सूर्य की आराधना करती हैं। पूर्वांचल समाज में इसे श्रद्धा व उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं जल में खड़े होकर उदय व सूर्यास्त होते सूर्य का पूजन करती हैं।
11 नवंबर- गोपाष्टमी
11 नवंबर को गोपाष्टमी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सप्तमी व अष्टमी की तिथि एक साथ रहेगी। इस दिन गौ माता के पूजन का विधान है। गौशालाओं में विधि विधान से गायों का पूजन होगा।
12 नवंबर- आंवला नवमी
इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने की परंपरा है। महिलाएं विधि विधान से आंवला पेड़ की परिक्रमा कर मूंगफली, आंवला आदि का दान करती है। यह पर्व पर्यावरण जागरूकता का संदेश देता है।
14 व 15 नवंबर- तुलसी एवं शालिगराम विवाह
पंचागों में तिथियों को लेकर तुलसी शालिगराम विवाह दो दिन यानी 14 और 15 नवंबर को मनाया जाएगा। इसका कारण 14 नवंबर को एकादशी तिथि का पूरे दिन और 15 नवंबर को सूर्योदय के समय रहना है। इस दिन भगवान शालिगराम व तुलसी का विवाह की परंपरा है।
18 नवंबर- देव दीपावली
बैकुंठी चतुर्दशी पर्व 18 नवंबर को मनाया जाएगा। इसे देव दीपावली भी कहा जाता हैं। इस दिन श्रद्धालु घर और मंदिरों में दीप जलाकर परिवार की खुशहाली के लिए कामना करते हैं।
19 नवंबर- कार्तिक पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 19 नवंबर को मनाया जाएगा। इसे गंगा स्नान से भी कहा जाता है। इस दिन गंगा एवं अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से विशेष पुण्य मिलता है। इस दिन धौरहरा के इलाके में एक दिवसीय ठुठवा मेला लगता है।